भोपाल(9826019364)।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आयुष डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से जुड़े बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि जिन आयुष डॉक्टरों को पहले से अंतरिम राहत मिली हुई है, वे 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रख सकेंगे, लेकिन इस अवधि में उन्हें नियमित वेतन एवं भत्तों का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, जिन डॉक्टरों को अब तक कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है, उनके मामले में राज्य सरकार को यह विवेकाधिकार होगा कि वह उन्हें 65 वर्ष तक सेवा में बनाए रखे या नहीं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने यह आदेश डॉ. सुधीर पांडे सहित बड़ी संख्या में आयुष चिकित्सकों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का हवाला देते हुए पहले दिए गए अंतरिम आदेशों में संशोधन का आग्रह किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर बदली व्यवस्था
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने State of Rajasthan vs. Anisur Rahman प्रकरण में राज्यों को यह विकल्प दिया है कि वे आयुष डॉक्टरों को 62 वर्ष की आयु के बाद भी 65 वर्ष तक सेवा में बनाए रख सकते हैं, लेकिन नियमित वेतन एवं भत्तों का लाभ देना अनिवार्य नहीं होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट से अंतरिम आदेश में संशोधन की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने भी रखी है यह शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार डॉक्टरों को 62 वर्ष के बाद भी सेवा में रखती है, तो उन्हें नियमित वेतन एवं भत्तों का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि उन्हें आधा वेतन एवं भत्ते दिए जाएंगे। यदि बाद में अंतिम फैसला आयुष डॉक्टरों के पक्ष में आता है तो शेष राशि भी देय होगी। यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आता, तो दी गई राशि का समायोजन पेंशन अथवा अन्य देयकों से किया जाएगा।
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पहले से राहत पाने वालों को 65 वर्ष तक सेवा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में पहले से अंतरिम आदेश पारित हो चुका है और जिनकी राहत निरस्त नहीं हुई है, वे 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखेंगे। हालांकि उनकी पेंशन संबंधी प्रक्रिया उन्हें 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त मानकर अस्थायी (प्रोविजनल) रूप से पूरी की जाएगी। अंतिम अधिकार याचिकाओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर रहेगा।
बाकी डॉक्टरों पर सरकार करेगी फैसला
जिन आयुष डॉक्टरों को अभी तक अंतरिम राहत नहीं मिली है, उनके संबंध में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी है। सरकार चाहे तो उन्हें 65 वर्ष तक सेवा में बनाए रख सकती है। यदि सरकार ऐसा प्रस्ताव देती है और संबंधित डॉक्टर उसे स्वीकार नहीं करते, तो बाद में याचिका के अंतिम निर्णय का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा।
क्या है पूरा विवाद?
मध्यप्रदेश के आयुष डॉक्टर लंबे समय से अपनी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि एमबीबीएस डॉक्टरों की तरह उन्हें भी समान सेवानिवृत्ति आयु का लाभ मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर अलग-अलग समय में अनेक याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं, जिनकी एक साथ सुनवाई चल रही है।
उज्जैन कॉलेज के प्राचार्य को मिला था स्टे
मप्र आयुष विभाग में भी दो दर्जन से ज्यादा चिकित्सक कोर्ट से पूर्व में मिली अंतरिम राहत के आधार पर 62 साल के बाद भी सेवा में बने हुए हैं। अंतिम निर्णय गत एक जुलाई को उज्जैन आयुष कॉलेज के प्राचार्य डॉ जेपी चौरसिया के पक्ष में आया था। अव्वल तो विभाग ने समय रहते उनका सेवानिवृत्ति आदेश समय रहते जारी नहीं किया। एक दिन पहले देर रात आदेश को लेकर भी न्यायालय में मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया। इसके चलते अगले दिन डॉ चौरसिया को कोर्ट से राहत मिली,लेकिन अब नए निर्णय से उनकी सेवाएं भी प्रभावित होने के आसार हैं।
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