‘कपड़े उतरवाए, प्राइवेट पार्ट्स पर टॉर्च से जांच की…’, तिहाड़ जेल के डरावने अनुभव पर छलका एक्ट्रेस का दर्द

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार महीने से ज्यादा समय तिहाड़ जेल में बिताने वाली एक्ट्रेस संदीपा विर्क ने जेल के अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कई बार कपड़े उतारकर तलाशी से गुजरना पड़ा और जेल की परिस्थितियां बेहद मुश्किल थीं।

नई दिल्ली:

एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क ने तिहाड़ जेल में बिताए अपने चार महीने से ज्यादा के समय को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं।

संदीपा ने कहा कि जेल के दौरान उन्हें बार-बार कपड़े उतारकर तलाशी देने के लिए कहा गया।

उनका दावा है कि इस दौरान उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने जेल की साफ-सफाई, खाने और वहां की दिनचर्या को लेकर भी अपना अनुभव साझा किया है।

संदीपा विर्क कथित तौर पर करीब 6 करोड़ रुपये से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार हुई थीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में उन्हें जमानत दे दी थी।

अदालत ने अपने आदेश में उनकी चार महीने से अधिक की हिरासत,

जांच की स्थिति और मामले के मुख्य आरोपी के फरार होने समेत कई परिस्थितियों पर विचार किया था।

‘मुझे कई बार कपड़े उतारकर तलाशी देने के लिए कहा गया’

संदीपा विर्क ने अपने जेल अनुभव को साझा करते हुए दावा किया कि हिरासत के दौरान उनकी कई बार स्ट्रिप सर्च की गई।

एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि करीब साढ़े चार महीने के दौरान उन्हें लगभग 25 से 30 बार कपड़े उतारकर जांच से गुजरना पड़ा।

उनके मुताबिक, यह अनुभव उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था और इसका उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा।

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संदीपा ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान शरीर के निजी हिस्सों की टॉर्च की रोशनी से जांच की जाती थी।

हालांकि, ये संदीपा विर्क के व्यक्तिगत दावे हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

तिहाड़ जेल की स्थिति पर भी उठाए सवाल

संदीपा ने जेल के अंदर की व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपबीती सुनाई।

उन्होंने दावा किया कि वॉशरूम की हालत बेहद खराब थी और कैदियों को फर्श पर सोना पड़ता था।

उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों के साथ एक ही जगह रहने को भी मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बताया।

अपने पहले के एक इंटरव्यू में संदीपा ने कहा था कि जेल के दौरान तनाव के कारण उनकी तबीयत काफी खराब हो गई थी।

उन्होंने यह भी बताया कि कई बार उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वे इस स्थिति को और सहन नहीं कर पाएंगी।

खाने और रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर भी बयान

संदीपा के मुताबिक, जेल में मिलने वाला खाना भी उनकी परेशानी का एक कारण था।

उन्होंने बताया था कि रोजमर्रा के भोजन में एक जैसी दाल-सब्जी, रोटी और चावल मिलते थे,

जिससे उनका खाने का मन नहीं करता था।

उन्होंने जेल की दिनचर्या का जिक्र करते हुए बताया कि बैरक तय समय पर खोली और बंद की जाती थीं।

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संदीपा ने वहां बिताए समय को शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद मुश्किल दौर बताया था।

6 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी गिरफ्तारी

संदीपा विर्क का मामला कथित तौर पर करीब 6 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय से जुड़ा था।

जांच एजेंसी का आरोप था कि धनराशि उनके खातों के जरिए ट्रांसफर हुई और उसका संबंध कुछ संपत्ति खरीद व अन्य गतिविधियों से था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 दिसंबर 2025 को उन्हें जमानत दी थी।

अदालत ने कहा था कि संदीपा चार महीने से ज्यादा समय से न्यायिक हिरासत में थीं,

उनके संबंध में जांच पूरी हो चुकी थी और मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही थी।

अदालत ने यह भी नोट किया था कि मामले का मुख्य आरोपी फरार था।

जेल से बाहर आने के बाद साझा किया अनुभव

जमानत मिलने के बाद संदीपा विर्क ने अलग-अलग इंटरव्यू में तिहाड़ जेल में बिताए समय को लेकर खुलकर बात की।

उन्होंने कहा कि जेल का अनुभव उनकी जिंदगी का बेहद कठिन दौर था

और इस दौरान उन्हें सामाजिक व मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ा।

संदीपा ने यह भी बताया था कि जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने वहां मिली कुछ महिला कैदियों को कानूनी मदद दिलाने की कोशिश की।

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नोट: तिहाड़ जेल में तलाशी और कथित व्यवहार को लेकर बताए गए विवरण संदीपा विर्क के व्यक्तिगत दावों पर आधारित हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।