रवि अवस्थी, भोपाल
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जिस आशंका को जनप्रचार ने दो दिन पहले उठाया था, वही अब हकीकत बनकर सामने आ गई है। आयुष विभाग ने उज्जैन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेपी चौरसिया का सेवानिवृत्ति आदेश अंतिम समय तक रोके रखा और जब आदेश जारी किया, तब तक मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका था। नतीजा यह हुआ कि न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत दे दी। सवाल यह है कि क्या आयुष विभाग जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बना रहा है, जिससे चिकित्सकों को अदालत से सेवा विस्तार का लाभ मिल सके?
जनप्रचार की आशंका सही साबित
29 जून को जनप्रचार ने अपनी खबर ‘रिटायरमेंट आदेश पर रहस्य: आयुष विभाग ने अंतिम दिन तक रोकी कार्रवाई’ में आशंका जताई थी कि सेवानिवृत्ति आदेश में असामान्य देरी भविष्य में न्यायिक राहत का आधार बन सकती है। खबर में यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या विभागीय स्तर पर जानबूझकर ऐसी तकनीकी स्थिति निर्मित की जा रही है, जिससे संबंधित अधिकारी अदालत में लाभ लेने की स्थिति में पहुंच जाए। अब नए घटनाक्रम ने इस आशंका को सही साबित कर दिया है।
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सेवानिवृत्ति के बाद बिना तरीख का आदेश हुआ जारी



डॉ. चौरसिया(In Photo) पहले ही हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर चुके थे। एक जुलाई को सुनवाई के दौरान विभागीय पक्ष अपेक्षित मजबूती से नहीं रखा जा सका और अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत दे दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आयुष चिकित्सकों की सेवा आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा दो बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में शासनादेश जारी नहीं हुआ है।