सीएम बोले 65 साल, वित्त ने कहा ‘नहीं’; आयुष ने कोर्ट से खोज लिया रास्ता !

आयुष विभाग की देरी से जारी सेवानिवृत्ति आदेश ने डॉ. जेपी चौरसिया को हाईकोर्ट से राहत दिला दी। जनप्रचार की आशंका सही साबित हुई। वित्त विभाग की आपत्ति के बावजूद 65 वर्ष सेवा आयु का न्यायिक रास्ता खुलता दिख रहा है।

रवि अवस्थी, भोपाल
(9826019364)

जिस आशंका को जनप्रचार ने दो दिन पहले उठाया था, वही अब हकीकत बनकर सामने आ गई है। आयुष विभाग ने उज्जैन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेपी चौरसिया का सेवानिवृत्ति आदेश अंतिम समय तक रोके रखा और जब आदेश जारी किया, तब तक मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका था। नतीजा यह हुआ कि न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत दे दी। सवाल यह है कि क्या आयुष विभाग जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बना रहा है, जिससे चिकित्सकों को अदालत से सेवा विस्तार का लाभ मिल सके?

जनप्रचार की आशंका सही साबित

29 जून को जनप्रचार ने अपनी खबर ‘रिटायरमेंट आदेश पर रहस्य: आयुष विभाग ने अंतिम दिन तक रोकी कार्रवाई’ में आशंका जताई थी कि सेवानिवृत्ति आदेश में असामान्य देरी भविष्य में न्यायिक राहत का आधार बन सकती है। खबर में यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या विभागीय स्तर पर जानबूझकर ऐसी तकनीकी स्थिति निर्मित की जा रही है, जिससे संबंधित अधिकारी अदालत में लाभ लेने की स्थिति में पहुंच जाए। अब नए घटनाक्रम ने इस आशंका को सही साबित कर दिया है।

यह भी पढ़ें——–. रिटायरमेंट आदेश पर रहस्य.. Click

सेवानिवृत्ति के बाद बिना तरीख का आदेश हुआ जारी

सूत्रों के मुताबिक डॉ. चौरसिया 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन उनका सेवानिवृत्ति आदेश उसी दिन देर शाम कार्यालय समय समाप्त होने के बाद जारी किया गया। इतना ही नहीं, आदेश पर पूरी तारीख तक अंकित नहीं थी और उसमें केवल “जून-2026” लिखा गया।

आमतौर पर ऐसे आदेश छह माह पहले जारी किए जाते हैं, ताकि पेंशन और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हो सकें। लेकिन इस मामले में फाइल आखिरी दिन तक लंबित रखी गई।

विभागीय चूक या सुनियोजित रणनीति?

                         

डॉ. चौरसिया(In Photo) पहले ही हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर चुके थे। एक जुलाई को सुनवाई के दौरान विभागीय पक्ष अपेक्षित मजबूती से नहीं रखा जा सका और अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत दे दी।

सूत्रों का कहना है कि समय पर सेवानिवृत्ति आदेश जारी नहीं होने और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं रहने से विभागीय अधिकारी न्यायालय में प्रभावी ढंग से विभाग का पक्ष नहीं रख सके। इसका प्रत्यक्ष लाभ याचिकाकर्ता को मिला।

डॉ. पीसी शर्मा के बाद डॉ. चौरसिया ऐसे दूसरे चिकित्सक हैं, जिन्हें इस तरह राहत मिली है। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि क्या आयुष विभाग सेवा आयु बढ़ाने के औपचारिक आदेश के अभाव में अदालतों के जरिए अपने चिकित्सकों के लिए राहत का रास्ता तैयार कर रहा है।

सरकार को भरोसे में नहीं लिया

सूत्रों का दावा है कि डॉ चौ​रसिया के प्रकरण में विभाग ने सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। उनके सेवानिवृत्ति आदेश को अंतिम दिन तक खींचा गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर मुख्यमंत्री की घोषणा को न्यायिक संरक्षण के जरिए लागू कराने की एक अप्रत्यक्ष रणनीति?

वित्त विभाग पहले ही जता चुका है आपत्ति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आयुष चिकित्सकों की सेवा आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा दो बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

दूसरी ओर वित्त विभाग सेवा वृद्धि के प्रस्ताव पर पहले ही आपत्ति दर्ज कर चुका है। आयुष चिकित्सकों ने एलोपैथी चिकित्सकों की तरह उनकी भी सेवा आयु 65 साल करने की मांग की थी,लेकिन वित्त विभाग का मानना है कि एलोपैथी चिकित्सक 24 घंटे सेवाएं देने के लिए बाध्य हैं,जबकि आयुष चिकित्सकों के साथ ऐसा कोई बंधन या आवश्यकता नहीं है।

आयु सीमा बढ़ाए जाने से न सिर्फ विभाग का खर्च बढ़ेगा,बल्कि यह बेरोजगार चिकित्सकों के हक पर भी कुठाराघात होगा। वित्त विभाग की इस स्पष्ट आ​पत्ति के बाद आयुष चिकित्सकों को अदालतों से मिल रही राहतें अब विभागीय रणनीति और प्रशासनिक पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर रही हैं।

सवाल यह भी उठ रहा है कि डॉ चौ​​रसिया के सेवा​निवृत्ति आदेश जारी करने में किया गया विलंब क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर मुख्यमंत्री की घोषणा को न्यायिक संरक्षण के जरिए लागू कराने की एक अप्रत्यक्ष रणनीति?

50 से ज्यादा चिकित्सकों की निगाह अदालत पर

सूत्रों का दावा है कि विभाग के करीब 50 चिकित्सक सेवा विस्तार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई पहले से अदालत की शरण में हैं। ऐसे में डॉ. चौरसिया और डॉ. पी.सी. शर्मा के मामले आने वाले समय में अन्य चिकित्सकों के लिए मिसाल बन सकते हैं।

यानी सरकार ने आदेश नहीं दिया, वित्त विभाग ने सहमति नहीं दी, लेकिन अदालतों से मिल रही राहतें 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने का नया रास्ता जरूर दिखा रही हैं।