शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, हमारे शिक्षक ऐप को लेकर उठे कई सवाल

जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस से जुड़ी याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। यह मामला रिट याचिका क्रमांक 91852/2025 से जुड़ा है। याचिका में 20 जून 2025 के विभागीय आदेश को चुनौती दी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने यह आदेश जारी किया था। इसके बाद शिक्षकों के लिए हमरे शिक्षक ऐप से हाजिरी जरूरी हुई। व्यवस्था के तहत तय समय में मोबाइल से हाजिरी लगानी थी। समय पर हाजिरी नहीं होने पर आधे दिन का नियम था।

मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामला रिट याचिका क्रमांक 91852/2025 से जुड़ा है। याचिका में 20 जून 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी उस विभागीय आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत शिक्षकों के लिए ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से डिजिटल हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य किया गया था।

याचिका के अनुसार, शिक्षकों को निर्धारित समय के भीतर मोबाइल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी थी। समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में आधे दिन की उपस्थिति माने जाने जैसे प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई गई है।

ग्रामीण स्कूलों में नेटवर्क की समस्या का मुद्दा

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रदेश के सभी स्कूलों में तकनीकी सुविधाएं एक जैसी नहीं हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण शिक्षकों के लिए निर्धारित समय पर मोबाइल से उपस्थिति दर्ज करना मुश्किल हो सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि कई स्थानों पर शिक्षकों के पास पर्याप्त तकनीकी संसाधन या इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केवल डिजिटल माध्यम से हाजिरी को अनिवार्य करने से व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।

निजी मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल पर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से निजी संसाधनों के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि सरकारी कार्य के लिए मोबाइल, इंटरनेट और डेटा का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाता है, तो इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी और खर्च का बोझ पड़ सकता है।

याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए।

डेटा और प्राइवेसी को लेकर भी आपत्ति

ई-अटेंडेंस ऐप के जरिए एकत्र किए जाने वाले डेटा को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि डिजिटल हाजिरी की व्यवस्था में चेहरे की पहचान और लोकेशन जैसी जानकारी से जुड़े पहलू शामिल हैं।

याचिका में जन्मतिथि और आधार नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। इस आधार पर डेटा की सुरक्षा और कर्मचारियों की निजता से जुड़े सवाल अदालत के सामने रखे गए।

वेतन रोकने और कार्रवाई का मुद्दा

ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में शिक्षकों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। याचिका में इस तरह के प्रावधानों और संभावित वेतन कटौती पर आपत्ति जताई गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि तकनीकी समस्या, नेटवर्क की खराबी या अन्य व्यावहारिक कारणों से शिक्षक समय पर डिजिटल हाजिरी दर्ज नहीं कर पाते हैं, तो उसके लिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

अब शिक्षकों की ई-अटेंडेंस से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि चुनौती दिए गए विभागीय आदेश और डिजिटल हाजिरी की अनिवार्यता को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

क्या है पूरा मामला?

  • मामला रिट याचिका क्रमांक 91852/2025 से संबंधित है।
  • याचिका में 20 जून 2025 के विभागीय आदेश को चुनौती दी गई है।
  • ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के जरिए डिजिटल हाजिरी का मुद्दा केंद्र में है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी सुविधाओं को लेकर आपत्ति जताई गई है।
  • निजी मोबाइल, इंटरनेट, डेटा सुरक्षा और निजता से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।
  • जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर दायर याचिका में तकनीकी सुविधा, निजी संसाधनों के इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और वेतन संबंधी कार्रवाई जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। फिलहाल हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है और अंतिम आदेश आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस व्यवस्था को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है।