MP: वाणिज्य कर में अफसरों को प्रमोशन,CTI की वरिष्ठता पर विवाद; पदोन्नति नियमों पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग में 4 dozen अधिकारियों को पदोन्नति मिली है। दूसरी ओर, CTI से ACTO पदोन्नति में वरिष्ठता और नियमों को लेकर विवाद है। मामला न्यायालय पहुंच चुका है।

भोपाल(9826019364)।

मध्य प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग में एक ओर बड़े स्तर पर पदोन्नति हुई है।

दूसरी ओर, निरीक्षकों की पदोन्नति का पुराना विवाद फिर सामने आ गया है।

शुक्रवार को विभाग के 4 दर्जन से अधिक अधिकारियों को पदोन्नति दी गई।

इसके साथ ही विभाग में ACTO, CTO, सहायक आयुक्त और उपायुक्त स्तर पर प्रशासनिक बदलाव हुआ है।

हालांकि, इसी बीच वाणिज्यिक कर निरीक्षक (CTI) से ACTO पद पर पदोन्नति का मामला विवादों में है।

सीधी भर्ती और कराधान सहायकों  के बीच वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से मतभेद हैं।

मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है।

सीटीआई की वरिष्ठता बना विवाद का केंद्र

सूत्रों के अनुसार, वाणिज्यिक कर विभाग में CTI के कुल 535 पद स्वीकृत हैं।

इनमें करीब 94 पद फिलहाल रिक्त बताए जा रहे हैं।

भरे हुए पदों में 2013 में MPPSC से चयनित निरीक्षक भी शामिल हैं।

वहीं, विशेष कार्य के नाम पर कराधान सहायक बनाए गए भी इन पदों पर कार्यरत हैं।

इन्हीं दोनों वर्गों के बीच वरिष्ठता को लेकर विवाद है।

इसका आधार वर्ष 2008 और 2013 में जारी किए गए विभागीय सर्कुलर बताए जा रहे हैं।

2013 में बदली गई थी पदोन्नति की व्यवस्था

दरअसल, पहले की व्यवस्था में ACTO के 100 प्रतिशत पद CTI की पदोन्नति से भरे जाने थे।

इसके बाद वर्ष 2013 में CTI की सीधी भर्ती के साथ नियमों में बदलाव किया गया।

इसके तहत CTI से पदोन्नति के जरिए भरे जाने वाले पदों की संख्या आधी कर दी गई।

वहीं, बाकी पद कराधान सहायकों से भरने का निर्णय लिया गया।

इसके संबंध में राजपत्र में अधिसूचना भी जारी की गई थी।

100% पदोन्नति वाले पदों पर सीधी भर्ती का आरोप

विवाद केवल CTI की वरिष्ठता तक सीमित नहीं है।

विभाग में ACTO के पदों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि अलग-अलग वर्षों में ACTO के करीब 80 पदों पर सीधी भर्ती की गई।

इनमें 67 पद अभी भरे हुए हैं।

जबकि पहले ACTO के सभी पद पदोन्नति के जरिए भरे जाने की व्यवस्था थी।

ऐसे में सीधी भर्ती होने से विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

वर्तमान में वाणिज्यिक कर विभाग में ACTO के 432 और CTO के 214 पद बताए गए हैं।

क्या सरकार की मंजूरी के बिना बदली गई व्यवस्था?

विभागीय सूत्रों का आरोप है कि CTI से ACTO पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में बदलाव तत्कालीन अधिकारियों के स्तर पर किया गया।

दावा है कि इस बदलाव के दौरान सरकार को भरोसे में नहीं लिया गया।

साथ ही, मंत्रिपरिषद से भी मंजूरी नहीं ली गई।

आरोप यह भी है कि संबंधित अधिकारी अब विभाग में वरिष्ठ पदों पर हैं।

इसलिए पुरानी व्यवस्था में हुए बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं हो पा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

निरीक्षकों के मंत्रालय आने पर रोक का भी दावा

सूत्रों ने विभाग के भीतर एक और गंभीर स्थिति का दावा किया है।

उनके अनुसार, विभागीय निरीक्षकों के मंत्रालय में प्रवेश पर अघोषित रोक जैसी स्थिति है।

दावा है कि इससे निरीक्षकों को वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखने में परेशानी हो रही है।

इसी वजह से कुछ निरीक्षकों ने न्यायालय का रुख किया है।

अब वरिष्ठता और पदोन्नति व्यवस्था से जुड़े सवालों पर अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

एक दिन पहले 46 अधिकारियों को मिला प्रमोशन

इधर, 7 अगस्त को भी वाणिज्यिक कर विभाग में बड़े स्तर पर पदोन्नति आदेश जारी हुए थे।

इन आदेशों में चार श्रेणियों के पद शामिल थे।

ACTO को CTO, CTO को सहायक आयुक्त और सहायक आयुक्त को उपायुक्त पद पर पदोन्नत किया गया।

इसके अलावा निजी सहायकों को वरिष्ठ निजी सहायक बनाया गया।

इन पदोन्नतियों का आधार वर्ष 2025 की रिक्तियां हैं।

विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की 29 जुलाई 2026 को हुई बैठक की अनुशंसा भी इसका आधार रही।

पदोन्नति पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की शर्त

सरकार ने पदोन्नति आदेशों में महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है।

सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

अदालत के भविष्य के आदेश का इन पदोन्नतियों पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल पदोन्नत अधिकारियों को तत्काल नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

पदोन्नति सूची देखने निम्न PDF को करें क्लिक

1- पदोन्_नति आदेश – ACTO to CTO-1

2-पदोन्_नति आदेश – ACTO to CTO

3-पदोन्_नति आदेश – PA to Senior PA

4-पदोन्_नति आदेश – CTO to AC

5-आदेश – श्री राममिलन साहू

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