कन्हैया नाथ,बुधनी/भोपाल।
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नर्मदा तट पर स्थित सीहोर जिले का बुधनी वनमंडल दुधई (दूधी) के वृक्षों के लिए प्रसिद्ध है। इसी लकड़ी से बनने वाले पारंपरिक खिलौनों ने बुधनी को देशभर में पहचान दिलाई है।
लेकिन खिलौना उद्योग के विस्तार के साथ दुधई के जंगलों पर दबाव भी तेजी से बढ़ा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कारोबारियों और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से दुधई के वृक्षों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।
नियमों के अनुसार खिलौना निर्माण में केवल 20 सेंटीमीटर से अधिक गोलाई वाली निर्धारित लकड़ी का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। आरोप हैं कि पूरे-के-पूरे वृक्ष काटे जा रहे हैं और वन संरक्षण के नियमों की अनदेखी की जा रही है।
पेड़ काटने का जिम्मा भी कारोबारियों के मजदूरों को
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन वृक्षों का विदोहन वन विभाग को स्वयं करना चाहिए, वहां कथित तौर पर कारोबारियों के मजदूरों को ही कटाई की अनुमति दी जा रही है।
इससे कटाई की निगरानी और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मनमाने तरीके से पेड़ों की कटाई से वन क्षेत्र लगातार सिमट रहा है। इससे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ रहा है।
‘न खाता, न बही, जो मैदानी अमला कहे वही सही’
लकड़ी विक्रय के लिए जारी की जा रही रसीदें भी कई सवालों के घेरे में हैं। सूत्रों के मुताबिक ‘मनी रसीद’ के नाम पर जारी पर्चियों में कई जरूरी जानकारियां नहीं होतीं।
इनमें न वन क्षेत्र का स्पष्ट उल्लेख होता है, न कटाई की तारीख और न ही विभागीय मुहर। यही नहीं,रसीद में दर्ज राशि व रसीदों के क्रमांक इत्यादि भी विभाग के बही-खातों में दर्ज नहीं हो रहे हैं।
हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि कुछ रसीदों पर पहले से ही खरीददार कारोबारियों के नाम और पते छपे हुए हैं। आरोप हैं कि इन्हीं रसीदों का उपयोग एक से अधिक बार परिवहन के लिए किया जाता है। जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
दुधई की लकड़ी खिलौनों के लिए क्यों है पहली पसंद?
दुधई (Wrightia tinctoria) की लकड़ी अपने विशेष गुणों के कारण पारंपरिक खिलौना निर्माण के लिए आदर्श मानी जाती है।
-हल्की और सुरक्षित: बच्चों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित।
-मुलायम और चिकनी: आसानी से मनचाहा आकार दिया जा सकता है।
-गैर-विषाक्त: प्राकृतिक रंगों के साथ उपयोग होने पर स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित।
-मजबूत और टिकाऊ: लंबे समय तक उपयोग योग्य।
-विशिष्ट पहचान: इसके गुणों के कारण इसे जीआई टैग दिलाने के प्रयास भी हुए हैं।
सरकार ने बढ़ावा दिया, उद्योग बना पहचान
मध्य प्रदेश सरकार ने बुधनी के खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। क्षेत्र में टॉय क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई गई, शिल्पकारों का पंजीयन कराया गया और उनके लिए बांसापुर में शेड भी विकसित किए गए। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान टॉय फेस्टिवल आयोजित कर इस कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया गया।
इन्वेस्टर्स समिट में छाए थे बुधनी के खिलौने
भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बुधनी के खिलौनों और शिल्पकारों को विशेष मंच मिला। यहां लगाए गए स्टॉल निवेशकों और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बने।
सरकार ने इन्हें ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना में भी शामिल कर विशेष पहचान दिलाने की कोशिश की।
जंगलों के अस्तित्व पर संकट
जिस दुधई लकड़ी ने बुधनी के खिलौनों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, क्या वही उद्योग अब दुधई के जंगलों के अस्तित्व पर संकट बनता जा रहा है?
यदि कटाई और परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो यह पारंपरिक उद्योग और वन संरक्षण-दोनों के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।
कमजोरी विभाग की, निशाने पर पत्रकार?
दुधई जंगलों में कथित अवैध कटाई और लकड़ी परिवहन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में है।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रभावित क्षेत्र की निगरानी के लिए पर्याप्त मैदानी अमला उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप वन संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी अपने मूल दायित्वों का निर्वहन करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
रेहटी-जमोनिया क्षेत्र के वनपाल हरिश्चंद्र महेश्वरी ने 19 मई 2026 को वनमंडलाधिकारी सीहोर को लिखे पत्र में बताया कि उनकी ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी हुई है। ऐसे में वे अपने बीट क्षेत्र में दुधई वृक्षों की कटाई और परिवहन की प्रभावी निगरानी नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया कि उनके क्षेत्र में किसी अन्य कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए, ताकि मौके पर मौजूद रहकर कटाई और परिवहन की निगरानी की जा सके।
मीडिया रिपोर्टों से छवि प्रभावित होने की शिकायत
पत्र में वनपाल ने यह भी उल्लेख किया है कि दुधई लकड़ी की कटाई और परिवहन को लेकर मीडिया में लगातार खबरें और वीडियो प्रकाशित हो रहे हैं। उ
नके अनुसार इन खबरों के कारण उनकी व्यक्तिगत छवि प्रभावित हो रही है और उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने अधिकारियों से व्यवस्था सुधारने और अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
















