पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाने और रिश्तेदारी आधारित प्रभाव को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने पंचायत सचिवों की नई तबादला नीति लागू कर दी है।
अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इतना ही नहीं, यदि सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बनता है तो उसका तबादला अनिवार्य होगा।
रिश्तों के असर पर सरकार का बड़ा प्रहार
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के आधार पर नई गाइडलाइन जारी की है।
सभी कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जाए। प्रदेश में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं।
15 जून तक पूरी होगी तबादला प्रक्रिया
9 जून को जारी आदेश के अनुसार जिले के भीतर पंचायत सचिवों के तबादले 15 जून तक किए जा सकेंगे।
स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद प्रभावी होंगे। आदेश जारी करने का अधिकार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दिया गया है।
क्यों जरूरी हुई नई व्यवस्था?
सरकार का मानना है कि वर्षों से एक ही पंचायत में कार्यरत कई सचिव स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रिश्तेदारों के प्रभाव में आ जाते हैं।
जांचों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जहां सरपंच, उपसरपंच और सचिव की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां हुईं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए नई तबादला नीति में सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं।
इन मामलों में तबादला होगा अनिवार्य
–सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुना जाए।
-सचिव अपने पैतृक गांव या ससुराल की पंचायत में पदस्थ हो।
-एक ही पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ सचिव।
-लंबे समय से जमे सचिवों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा।
प्रतिबंध अवधि में भी हो सकेंगे तबादले
स्थानांतरण पर रोक के दौरान भी विशेष परिस्थितियों में सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे। इनमें भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, गंभीर शिकायतें, अनुशासनात्मक कार्रवाई, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जांच से जुड़े मामले तथा शासन के विशेष प्रशासनिक निर्देश शामिल हैं।
महिला सचिवों को मिलेगी राहत
अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर होगा। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी। अनुकंपा नियुक्ति वाले सचिवों को भी अपने मूल जिले में जाने का अवसर मिलेगा।
एक बार ही मिलेगा अंतरजिला संविलियन का लाभ
संविलियन के लिए रिक्त पद की उपलब्धता जरूरी होगी। स्वीकृति के बाद सचिव का नाम नई वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा। अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार ही दिया जाएगा।