UP Election 2027: महिला वोट बैंक पर सियासी दांव, फ्री बस सेवा से ₹40 हजार तक के वादे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले महिला वोट बैंक को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी मुकाबला तेज हो गया है। योगी सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शुरू की है, जबकि सपा ने सत्ता में आने पर गरीब महिलाओं को सालाना ₹40 हजार देने समेत कई वादे किए हैं।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दलों ने महिला मतदाताओं पर फोकस बढ़ा दिया है। जातीय समीकरणों के साथ अब महिला वोट बैंक भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। हाल के चुनावों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके वोटिंग पैटर्न ने राजनीतिक दलों को इस वर्ग के लिए अलग योजनाएं और घोषणाएं करने के लिए प्रेरित किया है।

इसी कड़ी में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और समाजवादी पार्टी ने महिलाओं को लेकर अलग-अलग योजनाओं और वादों की घोषणा की है। एक ओर योगी सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की योजना शुरू की है, वहीं समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आने पर गरीब महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने समेत कई घोषणाएं की हैं।

60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा

योगी आदित्यनाथ सरकार ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ शुरू की है। इसके तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य बुजुर्ग महिलाओं की आवाजाही को आसान बनाना बताया गया है।

इसके अलावा रक्षाबंधन के अवसर पर 27, 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को एक सहयात्री के साथ निशुल्क बस यात्रा की सुविधा देने की घोषणा भी की गई है। सरकार ने इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर परिवहन विभाग तथा प्रशासन को जरूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

सपा का ₹40 हजार सालाना देने का वादा

समाजवादी पार्टी ने महिला मतदाताओं को केंद्र में रखते हुए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ का ऐलान किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने घोषणा की कि अगर सपा की सरकार बनती है तो गरीब महिलाओं को हर साल 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

पार्टी ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ शिक्षा से जुड़े कई वादे भी किए हैं। इनमें इंटरमीडिएट पास करने वाली छात्राओं को लैपटॉप और साइकिल देने तथा महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा जैसी घोषणाएं शामिल हैं। छात्राओं के लिए मेट्रो यात्रा मुफ्त करने का भी वादा किया गया है।

महिला वोटरों पर क्यों बढ़ा फोकस?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक जातीय समीकरण चुनावी रणनीति का प्रमुख आधार रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी और उनके स्वतंत्र मतदान व्यवहार ने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है।

अब पार्टियां महिलाओं को सिर्फ किसी जाति या परिवार के हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि एक अलग और प्रभावशाली चुनावी समूह के तौर पर देख रही हैं। विशेषज्ञ विश्लेषणों में भी महिला मतदाताओं को 2027 के यूपी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वर्ग माना जा रहा है।

भाजपा और सपा के बीच बढ़ सकती है सीधी टक्कर

महिलाओं के लिए योजनाओं और घोषणाओं को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा के ₹40 हजार वाले वादे को चुनावी घोषणा बताते हुए निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा पुराने मुद्दों और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे वादे कर रही है।

वहीं सपा का जोर महिलाओं की आर्थिक मदद, सुरक्षा, शिक्षा और मुफ्त परिवहन जैसी सुविधाओं पर है। ऐसे में आने वाले महीनों में महिला केंद्रित योजनाएं और चुनावी घोषणाएं यूपी की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकती हैं।

BSP की रणनीति भी रहेगी महत्वपूर्ण

बहुजन समाज पार्टी भी 2027 के चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी प्रमुख मायावती दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और सवर्ण वर्गों को साथ लाने की कोशिश में हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं को लेकर भाजपा और सपा के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बसपा की रणनीति भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

2027 में महिला वोट तय कर सकता है सियासी दिशा?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन महिला मतदाताओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। मुफ्त बस यात्रा, आर्थिक सहायता, छात्राओं के लिए लैपटॉप-साइकिल और मुफ्त मेट्रो जैसी घोषणाएं बताती हैं कि पार्टियां महिलाओं को चुनावी रणनीति के केंद्र में ला रही हैं।

आने वाले समय में अगर महिला केंद्रित योजनाओं और वादों की संख्या बढ़ती है, तो यह देखना अहम होगा कि महिला मतदाता इन घोषणाओं को कितना महत्व देती हैं और क्या उनका मतदान रुझान उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।