मनुकुमार शाह,सिंगरौली/भोपाल।
ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना के कामों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है।
सितुल खुर्द पंचायत के नौढिया गांव में करीब 23.30 लाख रुपए की लागत से बना चेकडैम पहली बारिश में ही धराशायी हो गया।
इसका लोकार्पण जुलाई में हुआ था।
अगस्त की पहली बारिश ने निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए।
नौढिया के ग्रामीण लंबे समय से नदी पर चेकडैम बनाने की मांग कर रहे थे।
उनकी मांग पर वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के तहत निर्माण की मंजूरी मिली।
करीब दो साल चले निर्माण के बाद जुलाई में चेकडैम का लोकार्पण किया गया।
इसके कुछ ही समय बाद हुई पहली तेज बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ा और चेकडैम का बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया।
ग्रामीण इस स्थिति से हैरान हैं।
उनका कहना है कि जिस निर्माण से वर्षों तक जल संरक्षण की उम्मीद थी,
वह पहली बारिश भी नहीं झेल सका।
निर्माण पूरा होते ही उठने लगे थे सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक चेकडैम बनने के दौरान ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे।
उन्होंने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
अब पहली बारिश में चेकडैम के टूटने के बाद ये आरोप फिर चर्चा में हैं।
हालांकि ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लाखों का काम, पहली बारिश में जवाब

चेकडैम का निर्माण 23.30 लाख रुपए की स्वीकृत लागत से किया गया था।
ऐसे में पहली बारिश में इसके क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता जांच के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि केवल टूटे हिस्से की मरम्मत न कराई जाए।
पूरे निर्माण की तकनीकी जांच होनी चाहिए।
इसमें इस्तेमाल सामग्री, निर्माण की मात्रा, तकनीकी मानक और भुगतान प्रक्रिया की जांच शामिल हो।
बिलों की भी हो जांच

ग्रामीणों ने निर्माण से जुड़े बिलों और भुगतान दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
उनका आरोप है कि पंचायत स्तर पर कुछ ऐसे दुकानदारों के बिल लगाए गए हो सकते हैं, जो पंचायत से जुड़े लोगों के करीबी हैं।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए बिलों का मौके पर इस्तेमाल सामग्री से मिलान जरूरी है। खरीद की तारीख, मात्रा और भुगतान का रिकॉर्ड भी जांचा जाना चाहिए।
जीएसटी दस्तावेजों पर भी सवाल

निर्माण सामग्री की खरीद से जुड़े जीएसटी बिल और वित्तीय दस्तावेज भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में दर्ज सामग्री और मौके पर इस्तेमाल सामग्री का मिलान कराया जाए।
यदि दोनों में अंतर मिलता है, तो वित्तीय अनियमितता का पहलू भी सामने आ सकता है।

सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे सवाल
निर्माण और भुगतान प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच राजकुमारी साकेत और सचिव शिव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों ने माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, भुगतान बिल, सामग्री खरीद और जीएसटी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
सचिव बोले- अभी कुछ नहीं बताएंगे
मामले में पंचायत सचिव शिवकुमार सिंह करकोसा से प्रतिक्रिया ली गई।
उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब एक माह पहले ही पंचायत सचिव का काम संभाला है।
जब उनसे विभागीय मुख्यालय को भेजे गए हालिया देयकों के बारे में सवाल किया गया,
तो उन्होंने कहा, “अभी कुछ नहीं बताएंगे। जो भी होगा, कल बताएंगे।”
सचिव की इस प्रतिक्रिया के बाद भी ग्रामीणों को प्रशासन की जांच का इंतजार है।
अब प्रशासन की परीक्षा
23.30 लाख रुपए की लागत से बना चेकडैम पहली बारिश में ही टूट गया।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर है।
तकनीकी जांच से पता चल सकता है कि चेकडैम प्राकृतिक दबाव से टूटा या निर्माण में किसी स्तर पर कमी रही।
वहीं वित्तीय जांच से सामग्री खरीद और भुगतान से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर है।
सवाल यही है कि क्या चेकडैम टूटने की सिर्फ मरम्मत होगी या जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी और वित्तीय जांच भी कराई जाएगी?
इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक रामनिवास शाह एवं आरईएस अभियंता राकेश शाह से संपर्क करने का प्रयास किया गया,
लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने से उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।