MP में UCC लागू होने की राह साफ, ड्राफ्ट में आदिवासी बाहर; लिव-इन पर सख्त नियम

मध्य प्रदेश UCC का अंतिम ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया। समिति ने ST समुदाय को दायरे से बाहर रखने और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की सिफारिश की। विधेयक मानसून सत्र में पेश हो सकता है।

भोपाल।

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अंतिम ड्राफ्ट सौंपा। यह रिपोर्ट जल्द ही विधि विभाग के परीक्षण के लिए भेजी जाएगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा के मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक लाया जा सकता है।

आदिवासी समुदाय को रखा गया बाहर

मुख्यमंत्री को सौंपे ड्राफ्ट में समिति ने अनेक सिफारिशें की हैं। खास बात यह कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। इस मामले में उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का हवाला दिया गया। समिति का मानना है कि आदिवासी रीति-रिवाजों का संरक्षण जरूरी है।

लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त

ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप मामले में कड़ी सिफारिशें की गई। मसलन,इसके लिए अनिवार्य पंजीकरण का प्रस्ताव है। इसके लिए जोड़ों को रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन करना होगा। पंजीयन के बाद पुलिस को इसकी सूचना दी जाएगी। पुलिस युवक और युवती के माता-पिता को भी इसकी जानकारी देगी। पहचान छिपाने या गलत जानकारी पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

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महिला सुरक्षा और समानता पर खास जोर

समिति ने रिपोर्ट में लैंगिक समानता को प्रमुख आधार बनाया है। इसमें महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष प्रावधान सुझाए गए हैं। वहीं, विवाह, तलाक और भरण-पोषण के नियम भी शामिल किए गए हैं। इसी तरह,उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।

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तीन भागों में तैयार हुई अंतिम रिपोर्ट

समिति ने तीन हिस्सों में अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसके पहले भाग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अध्ययन शामिल किया गया है। वहीं,दूसरे पार्ट में UCC विधेयक का पूरा प्रारूप है। ​रिपोर्ट में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां हैं। इसी तरह,तीसरे भाग में जनता से मिले 9.58 लाख सुझावों का विश्लेषण दिया गया है।

मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

रिपोर्ट पेश किए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिति का आभार जताया। उन्होंने समय पर रिपोर्ट सौंपने की सराहना की। माना जा रहा है कि विधि परीक्षण के बाद सरकार कैबिनेट में इसका प्रस्ताव ला सकती है। आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी को लेकर बिल लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समिति की अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह एवं सदस्य  अनूप नायर का भी धन्यवाद ज्ञापित किया जो व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सकें।

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