MP: आरक्षण रोस्टर में गड़बड़ी से पंचायती राज की 378 पदों की भर्ती रद्द, 18 अगस्त तक बुलाए थे आवेदन

आरक्षण रोस्टर में त्रुटि के कारण पंचायती राज विभाग ने पीसीओ समेत 378 पदों की भर्ती निरस्त कर दी। नई भर्ती की तारीख तय नहीं है। पदोन्नति प्रक्रिया भी दस्तावेजों के अभाव में अटकी है।

भोपाल(9826019364)।

मध्यप्रदेश में पंचायती राज विभाग की भर्ती प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है।

आरक्षण रोस्टर में त्रुटि सामने आने के बाद 378 पदों की भर्ती निरस्त कर दी गई है।

यह भर्ती कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से प्रस्तावित थी।

मंडल ने इन पदों के लिए 18 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए थे। अब विभाग के आदेश के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लग गई है।

खास बात यह है कि नई भर्ती कब शुरू होगी, इस बारे में निरस्तीकरण आदेश में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

प्रस्ताव में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुआ

पंचायती राज  संचालक छोटे सिंह के हस्ताक्षर से जारी आदेश में भर्ती निरस्त करने की वजह बताई गई है।

आदेश के मुताबिक, समूह-02 और उपसमूह-04 के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव कर्मचारी चयन मंडल को भेजा गया था।

बाद में विभाग के संज्ञान में आया कि प्रस्ताव तैयार करते समय आरक्षण रोस्टर का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

इसी आधार पर विभाग ने भर्ती प्रस्ताव को शून्य मानते हुए निरस्त करने का निर्णय लिया।

साथ ही कर्मचारी चयन मंडल से संबंधित पदों की विज्ञप्ति को निरस्त/डिनोटिफाइड करने का अनुरोध किया गया है।

365 पीसीओ समेत 378 पद थे शामिल

पंचायती राज विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली हैं।

इनमें पंचायत समन्वय अधिकारी (PCO) के पद भी शामिल हैं।

विभाग ने हाल ही में कर्मचारी चयन मंडल को पीसीओ के 365 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव भेजा था।

इनमें 54 बैकलॉग पद भी शामिल थे।

इसके अलावा कार्यपालिक श्रेणी में खंड पंचायत अधिकारी के 5 और डाटा एंट्री ऑपरेटर संविदा के 8 पद शामिल थे।

इस तरह कुल 378 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी।

पीसीओ के करीब 60% पद खाली

 

पंचायत विभाग में मैदानी अमले की कमी लंबे समय से बनी हुई है।

गैर-कार्यपालिक श्रेणी में पंचायत समन्वय अधिकारियों के करीब दो हजार पद स्वीकृत बताए जाते हैं।

इनमें लगभग 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं।

इन पदों को विभागीय पदोन्नति और सीधी भर्ती के जरिए भरने की योजना थी।

भर्ती निरस्त होने से खाली पदों को भरने की प्रक्रिया फिलहाल फिर अटक गई है।

विलय की चर्चा ने बढ़ाया असमंजस

भर्ती निरस्त होने के पीछे विभागों के प्रस्तावित विलय की चर्चा भी सामने आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज संचालनालय का ग्रामीण विकास विभाग में विलय प्रस्तावित है।

यह प्रस्ताव लंबे समय से शासन स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है।

हालांकि, इसका अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

सूत्रों का दावा है कि नई भर्ती होने से प्रस्तावित विलय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।

इसी वजह से भर्ती रोकने का निर्णय लिया गया।

हालांकि, विभागीय आदेश में विलय को भर्ती निरस्त करने की वजह नहीं बताया गया है।

पदोन्नति प्रक्रिया भी लंबे समय से अटकी

पंचायती राज विभाग में सिर्फ सीधी भर्ती ही नहीं, पदोन्नति प्रक्रिया भी अटकी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, गोपनीय चरित्रावली, वरिष्ठता सूची और अन्य जरूरी दस्तावेज समय पर तैयार नहीं होने से पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

बताया जाता है कि अब तक केवल 10 जिलों से मैदानी अमले की जानकारी मुख्यालय को मिली है।

बाकी जिलों से जानकारी नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

पंचायत सचिवों की पदोन्नति के नियम भी तैयार नहीं

पंचायत सचिवों की पदोन्नति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

विभाग अब तक इसके लिए जरूरी नियम तैयार नहीं कर सका है।

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025 की वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का विकल्प मौजूद है।

इसके बावजूद मैदानी अमले की पदोन्नति को लेकर विभागीय स्तर पर अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है।

इस स्थिति से पंचायत विभाग के कर्मचारियों में असंतोष बढ़ने की बात सामने आ रही है।