कुछ दिन की अनहेल्दी डाइट भी बिगाड़ सकती है शरीर का इम्यून रिस्पॉन्स? नई स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली बात

नई रिसर्च के मुताबिक, चूहों में सिर्फ चार दिनों की हाई-फैट डाइट ने सूजन संबंधी इम्यून रिस्पॉन्स को प्रभावित किया। इसका असर कई सप्ताह बाद भी दिखा।

हम अक्सर सोचते हैं कि कुछ दिनों तक जंक फूड, ज्यादा फैट वाला खाना या अनहेल्दी डाइट लेने से सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बाद में फिर से सामान्य खानपान शुरू कर देंगे तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन Nature जर्नल में प्रकाशित एक नई रिसर्च ने इस सोच पर सवाल खड़े किए हैं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के वैज्ञानिकों ने पाया कि चूहों में सिर्फ चार दिनों तक हाई-फैट डाइट लेने से सूजन पैदा करने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तेज हो सकती है। इतना ही नहीं, डाइट सामान्य करने और सूजन कम हो जाने के कई सप्ताह बाद भी प्रभावित त्वचा में इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया पहले से ज्यादा तेज देखी गई।

हालांकि, इस अध्ययन को समझते समय एक बात बेहद जरूरी है: यह रिसर्च चूहों पर की गई है। इससे यह साबित नहीं होता कि इंसानों में कुछ दिन जंक फूड खाने से बिल्कुल ऐसा ही असर होगा।

सिर्फ चार दिन की हाई-फैट डाइट से बदला इम्यून रिस्पॉन्स

शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि मोटापे के कारण शरीर में सूजन बढ़ती है या फिर ज्यादा फैट वाला खानपान भी अपने आप में इसकी वजह बन सकता है।

इसके लिए वैज्ञानिकों ने चूहों को अलग-अलग तरह की डाइट दी। एक समूह को कम फैट वाला भोजन दिया गया, जबकि दूसरे समूह को हाई-फैट डाइट पर रखा गया। इसके बाद उनकी त्वचा पर इम्यून प्रतिक्रिया को सक्रिय करने वाली इमीक्विमोड (Imiquimod) क्रीम लगाई गई।

रिसर्च में पाया गया कि हाई-फैट डाइट लेने वाले चूहों में त्वचा की सूजन ज्यादा गंभीर थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सामान्य वजन वाले चूहों को भी केवल चार दिनों तक हाई-फैट डाइट दी। उनमें भी सूजन की प्रतिक्रिया काफी तेज हो गई।

See also  हड्डियों को बनाएं मजबूत, दिमाग को बनाएं तेज़: बच्चों की डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड्स

इसके उलट, मोटे चूहों को चार दिनों तक कम फैट वाला भोजन देने पर उनकी सूजन संबंधी प्रतिक्रिया हल्की देखी गई। इससे संकेत मिला कि शरीर का वजन ही नहीं, बल्कि सूजन शुरू होने के आसपास का खानपान भी इम्यून रिस्पॉन्स को प्रभावित कर सकता है।

डाइट बदलने के बाद भी त्वचा में बनी रही इम्यून सिस्टम की याद

इस अध्ययन का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि हाई-फैट डाइट बंद करने के बाद भी असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जब चूहों को दोबारा कम फैट वाला भोजन दिया गया और त्वचा की शुरुआती सूजन कम हो गई, तब भी प्रभावित हिस्से में कुछ इम्यून सेल्स मौजूद रहे। कई सप्ताह बाद उसी जगह दोबारा इमीक्विमोड क्रीम लगाने पर सूजन की प्रतिक्रिया पहले से ज्यादा तेज हुई।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसमें मेमोरी टी-सेल्स (Memory T-cells) की भूमिका हो सकती है। ये प्रतिरक्षा कोशिकाएं पहले हुए इम्यून रिस्पॉन्स की जानकारी बनाए रख सकती हैं। इस वजह से प्रभावित ऊतक अगली बार उसी तरह की चुनौती मिलने पर ज्यादा सक्रिय प्रतिक्रिया दे सकता है।

इस प्रक्रिया को अध्ययन में टिश्यू इन्फ्लेमेटरी मेमोरी यानी ऊतकों में सूजन से जुड़ी प्रतिरक्षा स्मृति के रूप में समझाया गया है।

शरीर में सूजन बढ़ाने में इन इम्यून सेल्स की भूमिका

रिसर्च के अनुसार, हाई-फैट डाइट लेने के बाद त्वचा में न्यूट्रोफिल्स (Neutrophils) नाम की प्रतिरक्षा कोशिकाएं तेजी से पहुंचीं। ये कोशिकाएं सूजन की शुरुआती प्रतिक्रिया को तेज करने में भूमिका निभाती हैं।

See also  Swine Flu: स्वाइन फ्लू को लेकर न घबराएं, AIIA डायरेक्टर ने बताए बचाव के तरीके; आयुर्वेदिक दवाएं लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रभावित त्वचा में इन कोशिकाओं के साथ NLRP3 और IL-1β जैसे सूजन से जुड़े संकेत भी अधिक सक्रिय थे। बाद में सूजन कम होने पर मेमोरी टी-सेल्स वहां बनी रह सकती हैं, जिससे उसी ऊतक में अगली प्रतिक्रिया ज्यादा तीव्र हो सकती है।

अध्ययन में यह भी देखा गया कि कुछ दिनों की हाई-फैट डाइट के बाद फेफड़ों में जलन पैदा करने वाली चुनौती पर भी सूजन की प्रतिक्रिया बढ़ सकती है। यानी असर केवल त्वचा तक सीमित रहने की संभावना नहीं दिखी, हालांकि इस नतीजे को भी इंसानों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

क्या इंसानों में भी कुछ दिन जंक फूड खाने से ऐसा हो सकता है?

इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह अध्ययन चूहों पर किया गया था और प्रयोग में इस्तेमाल की गई हाई-फैट डाइट को इंसानों के सामान्य खानपान या कभी-कभार खाए जाने वाले फास्ट फूड के बराबर नहीं माना जा सकता।

रिसर्च यह संकेत जरूर देती है कि खानपान में थोड़े समय का बदलाव भी शरीर की सूजन संबंधी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि कुछ दिन पिज्जा, बर्गर या तला हुआ खाना खाने से इंसानों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है या उन्हें संक्रमण होने का खतरा निश्चित रूप से बढ़ जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि खानपान, व्यायाम और नींद जैसे कारक इम्यून सिस्टम को हमारी अपेक्षा से ज्यादा तेजी से प्रभावित कर सकते हैं। इंसानों में इसके असर, अवधि और स्वास्थ्य संबंधी महत्व को समझने के लिए आगे और रिसर्च की जरूरत है।

See also  दिल्ली-NCR में H1N1 का बढ़ा खतरा, 1,777 से ज्यादा मामले; हाई-रिस्क लोगों को सावधानी की सलाह, नोएडा स्कूलों ने जारी की एडवाइजरी

सेहतमंद इम्यून सिस्टम के लिए कैसी हो डाइट?

इस रिसर्च का व्यावहारिक संदेश यह नहीं है कि किसी एक भोजन से डरने की जरूरत है, बल्कि लंबे समय तक संतुलित खानपान की आदत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

  • रोजाना भोजन में फल और हरी सब्जियां शामिल करें।

  • दाल, बीन्स और अन्य प्रोटीन स्रोतों को डाइट का हिस्सा बनाएं।

  • साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ चुनें।

  • बहुत ज्यादा तले हुए और अत्यधिक फैट वाले भोजन का सेवन सीमित रखें।

  • पर्याप्त नींद लें और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।

  • किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डाइट बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी संतुलित और विविधतापूर्ण खानपान पर जोर देता है। किसी एक फूड या सप्लीमेंट को इम्यूनिटी बढ़ाने का निश्चित उपाय मानना सही नहीं है।

खानपान का असर तेजी से दिख सकता है, लेकिन इंसानों पर पुष्टि बाकी

चूहों में हाई-फैट डाइट के केवल कुछ दिनों के सेवन से सूजन संबंधी प्रतिक्रिया बदल सकती है। डाइट सामान्य करने के बाद भी प्रभावित ऊतक में इम्यून सिस्टम की स्मृति बनी रह सकती है।

हालांकि, यह शुरुआती वैज्ञानिक निष्कर्ष है, इंसानों के लिए कोई अंतिम मेडिकल सलाह नहीं। फिलहाल सबसे बेहतर तरीका संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद की आदत बनाए रखना है।