दिल्ली-NCR में H1N1 का बढ़ा खतरा, 1,777 से ज्यादा मामले; हाई-रिस्क लोगों को सावधानी की सलाह, नोएडा स्कूलों ने जारी की एडवाइजरी

दिल्ली-NCR में H1N1 के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली में 1,777 से ज्यादा H1N1 मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और अन्य हाई-रिस्क लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में H1N1 (इन्फ्लुएंजा-A) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। चिकित्सकों ने खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिल्ली में इस साल अब तक इन्फ्लुएंजा-A के 2,300 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 1,777 से ज्यादा H1N1 मामले बताए गए हैं। अकेले एक दिन में 114 नए मामले दर्ज किए गए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य फ्लू से ज्यादातर लोग बिना गंभीर जटिलता के ठीक हो जाते हैं, लेकिन हाई-रिस्क समूह में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

H1N1 मामलों के बीच वैक्सीन को लेकर बढ़ी दिलचस्पी

दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। मेदांता के श्वसन एवं नींद चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉ. भरत गोपाल के अनुसार, खासकर हाई-रिस्क लोगों और ऐसे परिवारों में टीकाकरण को लेकर जानकारी लेने की रुचि बढ़ी है, जिनके घर में बच्चे या बुजुर्ग हैं।

चिकित्सकों के मुताबिक, फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण के अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। वैक्सीन लगवाने को लेकर व्यक्ति को अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।

अस्पतालों में H1N1 की जांच आसानी से उपलब्ध

सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बिभु आनंद ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच दिल्ली-NCR में अधिकांश अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर उपलब्ध है। निजी संस्थानों में जांच की कीमत अलग-अलग हो सकती है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह काफी कम खर्च में उपलब्ध हो सकती है।

उन्होंने बताया कि सामान्य H1N1 जांच की लागत निजी क्षेत्र में करीब 1,500 से 5,000 रुपये के बीच हो सकती है। वहीं, एक व्यापक श्वसन संक्रमण जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले बायोफायर पैनल की कीमत करीब 9,000 से 15,000 रुपये तक हो सकती है।

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में बढ़े मरीज

H1N1 संक्रमण के बढ़ते मामलों का असर अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या पर भी नजर आ रहा है। गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थ के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाशनील भट्टाचार्य के अनुसार, हाल के दिनों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव और लोगों के बीच संक्रमण का प्रसार ऐसे मामलों को बढ़ा सकता है। हालांकि हर बुखार या खांसी को H1N1 मानना सही नहीं है। लक्षणों की गंभीरता और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होती है।

बुखार-खांसी से लेकर शरीर में दर्द तक, ये हैं सामान्य लक्षण

H1N1 और अन्य इन्फ्लुएंजा संक्रमणों में कई सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • बुखार
  • खांसी
  • गले में खराश
  • सिरदर्द
  • शरीर में दर्द
  • ठंड लगना
  • थकान
  • नाक बहना
  • नाक बंद होना

कुछ बच्चों में मतली, उल्टी या दस्त जैसी समस्या भी हो सकती है।

हालांकि इन लक्षणों का होना अपने आप में H1N1 संक्रमण की पुष्टि नहीं करता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।

कब अस्पताल जाने की जरूरत पड़ सकती है?

चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य और बिना जटिलता वाले इन्फ्लुएंजा के कई मरीज घर पर आराम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार से ठीक हो सकते हैं। लेकिन यदि संक्रमण के साथ निमोनिया, सांस लेने में कठिनाई, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, लगातार तेज बुखार या पहले से मौजूद बीमारी का बिगड़ना शुरू हो जाए तो अस्पताल में उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

हाई-रिस्क मरीजों में लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

इन चेतावनी संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे लक्षण बताए हैं, जिनके दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • सांस लेने में बहुत अधिक परेशानी
  • लगातार सीने में दर्द
  • ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से कम होना
  • भ्रम या असामान्य व्यवहार
  • होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना
  • सुधार के बाद दोबारा बुखार आना
  • अत्यधिक कमजोरी या हालत तेजी से बिगड़ना

ऐसे संकेत दिखाई देने पर घर पर इंतजार करने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

नोएडा में H1N1 और डेंगू को लेकर स्कूल सतर्क

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में भी मौसमी बीमारियों को लेकर स्कूलों ने सावधानी बढ़ाई है। स्वाइन फ्लू और डेंगू के मामलों की खबरों के बीच कई स्कूलों ने अभिभावकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

स्कूलों ने साफ कहा है कि अगर किसी बच्चे को बुखार, सर्दी, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे स्कूल न भेजें। बच्चे को घर पर आराम देने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की गई है।

स्कूलों का कहना है कि सिर्फ उपस्थिति बनाए रखने के लिए बीमार बच्चे को स्कूल भेजने से उसकी तबीयत बिगड़ सकती है और दूसरे बच्चों में संक्रमण फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

स्कूलों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान

संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

बच्चों को बिना जरूरत आंख, नाक और मुंह छूने से बचने की सलाह दी जा रही है। कक्षाओं, दरवाजों, सामान्य क्षेत्रों और अन्य जगहों की सफाई पर भी ध्यान बढ़ाया गया है।

डेंगू को लेकर भी स्कूलों की निगरानी

गौतम बुद्ध नगर में H1N1 के साथ डेंगू को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। स्कूल परिसरों में पानी जमा होने वाली जगहों की जांच की जा रही है।

कूलर, गमले, छतों और अन्य स्थानों पर पानी जमा न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि लंबे समय तक जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है और इससे डेंगू का जोखिम बढ़ सकता है।

बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देने की अपील

स्कूलों ने अभिभावकों से बच्चों में लगातार बने रहने वाले या गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है। लगातार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि H1N1 और डेंगू दोनों से बचाव के लिए जागरूकता महत्वपूर्ण है। परिवार, स्कूल और स्वास्थ्य विभाग मिलकर स्वच्छता, समय पर पहचान और संक्रमण नियंत्रण पर ध्यान दें तो बीमारी के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है।

H1N1 से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों ने संक्रमण से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:

  • हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें।
  • फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्ति से करीबी संपर्क से बचें।
  • बीमार होने पर घर पर आराम करें और दूसरों से दूरी रखें।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं न लें।
  • हाई-रिस्क व्यक्ति लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करें।
  • बच्चों और स्कूल जाने वाले छात्रों में स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा दें।

महत्वपूर्ण: H1N1 के लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को लक्षण गंभीर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।