भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर चर्चा में है। अक्टूबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयरों से अब तक ₹48,056 करोड़ की शुद्ध निकासी की है। सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने ₹35,861 करोड़ के शेयर बेचे थे। लगातार हो रही इस बिकवाली ने बाजार की दिशा और निवेशकों के भरोसे को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बिकवाली की रफ्तार कुछ कम होने के संकेत भी मिले हैं।
मोदी 3.0 में शेयर बाजार की स्थिति क्यों चर्चा में?
जून 2024 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी सरकार बनने के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी और गिरावट, दोनों दौर देखने को मिले हैं। बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे विदेशी पूंजी का बाहर जाना, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कंपनियों की कमाई को लेकर चिंताएं जैसे कई कारक बताए जा रहे हैं।
हालांकि, किसी एक सरकार के कार्यकाल में बाजार के प्रदर्शन को समझने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी के स्तर के साथ-साथ लाभांश, महंगाई, रुपये की विनिमय दर और दूसरे वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन को भी देखना जरूरी है।
विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे भारतीय शेयर?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका में ब्याज दरों का रुझान हैं।
1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
25 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इससे विदेशी निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं।
2. अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें
जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए वहां पैसा लगाना अपेक्षाकृत फायदेमंद हो सकता है। ऐसे में कुछ निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाते हैं।
इसका असर भारत जैसे बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
3. कंपनियों की कमाई को लेकर चिंता
शेयरों की कीमतें केवल अर्थव्यवस्था की विकास दर पर निर्भर नहीं करतीं। निवेशक यह भी देखते हैं कि कंपनियों का मुनाफा कितनी तेजी से बढ़ रहा है और भविष्य में उनकी कमाई कैसी रह सकती है।
तेल, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कुछ कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है। इसी वजह से निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रख रहे हैं।
4. दूसरे बाजारों में निवेश के अवसर
विदेशी निवेशक अलग-अलग देशों के बाजारों में जोखिम और संभावित रिटर्न की तुलना करते हैं। यदि उन्हें किसी अन्य बाजार में बेहतर अवसर दिखाई देते हैं, तो वे अपने निवेश का कुछ हिस्सा वहां स्थानांतरित कर सकते हैं।
इसलिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली को हमेशा भारत की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह निराश होने का संकेत नहीं माना जा सकता।
2026 में विदेशी निवेशकों ने कितना पैसा निकाला?
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों पर आधारित 25 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹3.08 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी की थी। यह आंकड़ा पूरे 2025 में दर्ज ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से काफी अधिक था।
हालांकि, निवेश का रुझान हर महीने एक जैसा नहीं रहा। विदेशी निवेशकों ने जुलाई में भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था। इसके बाद सितंबर और अक्टूबर में फिर बिकवाली देखने को मिली।
क्या विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में और गिरावट आएगी?
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है, लेकिन इससे भविष्य की गिरावट की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
भारतीय बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशक, म्यूचुअल फंड और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला पैसा विदेशी बिकवाली के असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।
25 अक्टूबर की रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने अपनी बिकवाली कम की और दो कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदारी की। इसे बिकवाली के दबाव में कुछ नरमी का संकेत माना जा सकता है, लेकिन इससे स्थायी तेजी की पुष्टि नहीं होती।
शेयर बाजार में टैक्स की भूमिका कितनी अहम है?
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए टैक्स भी निवेश की लागत और रिटर्न को प्रभावित करता है। भारत में शेयरों पर लागू सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स जैसे प्रावधान निवेश संबंधी फैसलों में भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की मौजूदा बिकवाली का पूरा कारण केवल टैक्स को मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए विदेशी निवेश के आंकड़ों, वैश्विक ब्याज दरों, रुपये की चाल, तेल की कीमतों और कंपनियों के मुनाफे का संयुक्त विश्लेषण जरूरी है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए आने वाले दिनों में कुछ प्रमुख संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे:
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की दैनिक और मासिक खरीद-बिक्री।
- कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम में बदलाव।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले।
- डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल।
- भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे और भविष्य की कमाई के अनुमान।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान।
मोदी 3.0 के दौरान भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन को लेकर बहस के बीच विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लेकिन बाजार की दिशा तय करने में घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारक काम करते हैं। निवेशकों को केवल राजनीतिक सुर्खियों या एक दिन की गिरावट के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम और अपने निवेश की अवधि पर ध्यान देना चाहिए।