शेयर बाजार में 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, लगातार 8वें हफ्ते Sensex-Nifty लाल निशान में; जानें क्यों टूटा बाजार

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार आठवें हफ्ते भी जारी रहा। Sensex 570 अंक और Nifty करीब 198 अंक टूटकर बंद हुए। FII बिकवाली, महंगा क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए 1 अक्टूबर का कारोबारी सत्र भी दबाव भरा रहा। Sensex और Nifty लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जो करीब 25 साल में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला है। गुरुवार को Sensex 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी गिरकर 22,421.95 पर पहुंच गया।

25 साल में पहली बार लगातार 8 हफ्ते गिरावट

शेयर बाजार के दोनों प्रमुख बेंचमार्क लगातार आठवें सप्ताह कमजोर हुए हैं। Reuters के मुताबिक, इस सप्ताह Nifty 50 में करीब 3.1 फीसदी और Sensex में 2.7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। आठ सप्ताह की अवधि में Nifty करीब 8.7 फीसदी और Sensex करीब 8.4 फीसदी नीचे आया है।

यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 2001 में Nifty लगातार नौ सप्ताह तक गिरा था। मौजूदा सिलसिला कोविड दौर में दर्ज सात सप्ताह की लगातार गिरावट से भी लंबा हो गया है।

सितंबर में भी बाजार को लगा बड़ा झटका

सितंबर 2026 में भी भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। Nifty और Sensex दोनों में करीब 6 फीसदी की मासिक गिरावट दर्ज हुई। Sensex सितंबर में लगभग 4,500 अंक नीचे आया।

बाजार में लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगा कच्चा तेल, रुपये की कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारकों का दबाव बना हुआ है।

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FII की लगातार बिकवाली से बढ़ा दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है। Reuters के अनुसार, 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों में बिकवाली करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो रिकॉर्ड स्तर है।

30 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बिकवाली की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दो सत्रों में ही करीब 20,128 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई।

महंगा क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बनी वजह

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई है। Brent crude हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा क्रूड महंगाई और चालू खाते से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है।

इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बढ़ सकता है।

ऑटो शेयरों में ज्यादा कमजोरी

गुरुवार के कारोबार में ज्यादातर सेक्टर इंडेक्स गिरावट में रहे। ऑटो सेक्टर पर खास दबाव देखने को मिला। Bajaj Auto के शेयर में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई, जबकि Mahindra & Mahindra भी नीचे बंद हुआ।

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वहीं IT इंडेक्स बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच बढ़त दर्ज करने वाला प्रमुख सेक्टर रहा। अमेरिका में उम्मीद से कम महंगाई के आंकड़ों ने अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित किया।

आठ हफ्तों में Nifty की तस्वीर

Nifty 50 में इस सप्ताह करीब 3.1 फीसदी की गिरावट आई और आठ सप्ताह की कुल गिरावट करीब 8.74 फीसदी हो गई। इस अवधि में कुछ बड़े शेयरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली।

इस दौरान Tata Motors Passenger Vehicles, Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra और Jio Financial Services जैसे शेयर दबाव में रहे।

आगे बाजार के लिए किन चीजों पर रहेगी नजर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर FII फ्लो, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। साथ ही अमेरिकी और भारतीय ब्याज दरों से जुड़े संकेत भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल बाजार में लगातार आठ सप्ताह की गिरावट ने निवेशकों के लिए अस्थिरता बढ़ा दी है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी।