उत्तर प्रदेश ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा, बेहतर लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक विकास और सुशासन उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह बात उत्तर प्रदेश-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 को संबोधित करते हुए कही।

योगी आदित्यनाथ ने जापानी निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों के दौरान राज्य के बजट, सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP और प्रति व्यक्ति आय में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक, इस अवधि में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी भी तीन गुना से अधिक बढ़ी है।

ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया है। राज्य में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार को औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर का विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जापानी कंपनियों को राज्य में निवेश के अवसरों से अवगत कराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ा बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी और पर्याप्त मानव संसाधन मौजूद है।

इंफ्रास्ट्रक्चर बना विकास का बड़ा आधार

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा राज्य में है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 17 हवाई अड्डे, बड़ा रेलवे नेटवर्क और मेट्रो कनेक्टिविटी मौजूद है।

उन्होंने कहा कि राज्य में पहला रीजनल रैपिड रेल कॉरिडोर, पहला अंतर्देशीय जलमार्ग, दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और कई लॉजिस्टिक्स हब भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

सरकार का मानना है कि बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से उद्योगों के लिए माल की आवाजाही आसान होगी और उत्पादन तथा परिवहन की लागत को कम करने में मदद मिलेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर पर भी फोकस

उत्तर प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखकर निवेश का आधार तैयार कर रहा है।

डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इससे आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कारोबार के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

शिवराज सिंह चौहान ने जापानी तकनीक पर दिया जोर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कार्यक्रम में भारत-जापान सहयोग को कृषि क्षेत्र से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका सीधा लाभ किसानों, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचना चाहिए।

शिवराज सिंह चौहान ने जापानी कंपनियों और संस्थानों से ऐसी कृषि तकनीक और मशीनरी विकसित करने का आग्रह किया, जो भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी तथा किफायती हो।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीक की जरूरत है, जिससे उत्पादकता बढ़ाई जा सके, पानी की खपत कम हो और किसानों की उत्पादन लागत घटे। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

छोटे किसानों तक पहुंचे तकनीक का लाभ

भारत में बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान हैं। ऐसे में महंगी मशीनरी और तकनीक हर किसान के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती। शिवराज सिंह चौहान ने जापानी कंपनियों से भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक विकसित करने की अपील की।

उनका जोर ऐसी मशीनों और तकनीकी समाधानों पर रहा, जिनका इस्तेमाल छोटे खेतों में भी किया जा सके। साथ ही सिंचाई, फसल प्रबंधन, कटाई और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीक को भी भारतीय किसानों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।

200 से ज्यादा जापानी प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा

उत्तर प्रदेश-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 का आयोजन 18 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में किया जा रहा है। कार्यक्रम में 200 से अधिक जापानी उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।

इस निवेश बैठक को उत्तर प्रदेश और जापान के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जापानी कंपनियां ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में भारत में लंबे समय से मौजूद हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

भारत-जापान व्यापार भी बढ़ रहा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.5 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं के बीच उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

राज्य सरकार जापानी निवेशकों के लिए औद्योगिक क्षेत्रों, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल माहौल को प्रमुख आकर्षण के तौर पर पेश कर रही है।

रोजगार और औद्योगिक विकास पर नजर

उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में निवेश के साथ रोजगार सृजन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए उद्योगों और परियोजनाओं के आने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि-प्रसंस्करण और तकनीकी क्षेत्रों में निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को विविध आधार मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक तकनीक पर जोर दे रही है। UP-Japan Investment Meet 2026 के जरिए जापानी निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की कोशिश भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तथा डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों का विस्तार उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को बढ़ा सकता है। वहीं कृषि क्षेत्र में जापानी तकनीक और विशेषज्ञता का इस्तेमाल किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है।