भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाले संकेत सामने आए हैं। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों (Core Sectors) की उत्पादन वृद्धि मई 2026 में घटकर केवल 0.5 फीसदी रह गई। यह पिछले सात महीनों का सबसे निचला स्तर है और औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार में कमजोरी का संकेत देता है।
अप्रैल और पिछले वर्ष के मुकाबले गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में इन क्षेत्रों की वृद्धि दर 1.8 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि मई 2025 में यह 1.2 फीसदी रही थी। ऐसे में मई 2026 के आंकड़े उत्पादन गतिविधियों में स्पष्ट सुस्ती को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोर सेक्टर की धीमी वृद्धि का असर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और समग्र आर्थिक विकास दर पर भी पड़ सकता है।
किन क्षेत्रों में आई गिरावट?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख क्षेत्रों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें शामिल हैं:
- कोयला उत्पादन
- कच्चा तेल (Crude Oil)
- प्राकृतिक गैस
- रिफाइनरी उत्पाद
- उर्वरक (Fertilizers)
इन क्षेत्रों में उत्पादन घटने से कोर सेक्टर की कुल वृद्धि दर पर दबाव बढ़ा है।
अप्रैल-मई अवधि में भी सुस्ती
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों यानी अप्रैल-मई के दौरान आठ प्रमुख क्षेत्रों की संयुक्त वृद्धि दर 1.1 फीसदी रही। यह लगभग पिछले वर्ष के समान स्तर पर है, लेकिन अपेक्षाओं से कम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में इन क्षेत्रों के उत्पादन में 0.1 फीसदी की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके बाद से उत्पादन गतिविधियों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्र देश के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 40 फीसदी योगदान देते हैं। इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।
इन क्षेत्रों की धीमी वृद्धि:
- औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
- निवेश गतिविधियों पर असर डाल सकती है।
- आर्थिक विकास दर की रफ्तार को धीमा कर सकती है।
- ऊर्जा और निर्माण क्षेत्र की मांग को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन और मांग में सुधार के लिए सरकार को बुनियादी क्षेत्रों में निवेश और नीतिगत समर्थन बढ़ाने की आवश्यकता होगी।