नई दिल्ली।
दिल्ली में संदिग्ध नकली रैबीज वैक्सीन मिलने के बाद देशभर में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट किया है।
राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को संदिग्ध वैक्सीन की बिक्री और सप्लाई पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला Abhayrab वैक्सीन के बैच नंबर KE25012 से जुड़ा है।
सरकारी जांच में इस बैच का सैंपल जरूरी potency test में फेल हुआ।
इसे ‘Not of Standard Quality’ और misbranded drug बताया गया है।
🏠 दिल्ली के फ्लैट में मिला संदिग्ध स्टॉक
दरअसल, अप्रैल 2026 में दिल्ली के मुखर्जी नगर में कार्रवाई की गई थी।
क्राइम ब्रांच, दिल्ली पुलिस और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की टीम ने एक बिना लाइसेंस वाले परिसर की तलाशी ली।
वहां Abhayrab के नाम वाली संदिग्ध वैक्सीन की शीशियां मिलीं।
इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
🔬 जांच में सामने आईं 17 गड़बड़ियां
मामला सिर्फ potency test तक सीमित नहीं रहा।
जांच में जब्त शीशियों और कंपनी के असली रिकॉर्ड वाले नमूनों के बीच 17 अंतर सामने आए।
लेबलिंग में गड़बड़ी मिली।
पैकेजिंग अलग थी।
QR कोड में अंतर था।
कैप के रंग में भी फर्क पाया गया।
इन अंतर ने वैक्सीन के नकली होने की आशंका को और मजबूत किया।
🏭 कंपनी ने कहा- ये हमारी बनाई वैक्सीन नहीं
Abhayrab बनाने वाली Indian Immunologicals Ltd. (IIL) ने भी मामले पर सफाई दी है।
कंपनी का कहना है कि जब्त की गई शीशियां उसकी बनाई हुई नहीं हैं।
कंपनी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए हैं।
IIL के मुताबिक, अधिकृत चैनलों से सप्लाई की गई उसकी असली वैक्सीन इस मामले से प्रभावित नहीं है।
MP समेत सभी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है।
राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को संदिग्ध बैच की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखने को कहा गया है।
यानी मध्यप्रदेश समेत देश के सभी राज्यों में स्वास्थ्य और औषधि विभागों को सतर्क रहना होगा।
🐕 रैबीज क्या है और इतना खतरनाक क्यों?
रैबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है।
यह संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या कुछ परिस्थितियों में उसकी लार के संपर्क से फैल सकती है।
WHO के मुताबिक, इंसानों में रैबीज के करीब 99% मामले संक्रमित कुत्तों से जुड़े होते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद रैबीज लगभग 100% घातक होती है।
हालांकि, समय पर सही इलाज और गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन से इसे रोका जा सकता है।
💉 रैबीज वैक्सीन कब काम आती है?
रैबीज वैक्सीन मुख्य रूप से दो स्थितियों में इस्तेमाल होती है।
पहली- बचाव के लिए।
जिन लोगों को रैबीज वायरस के संपर्क का लगातार या ज्यादा खतरा रहता है,
उन्हें exposure से पहले वैक्सीन दी जा सकती है।
दूसरी- जानवर के काटने के बाद।
इसे Post-Exposure Prophylaxis यानी PEP कहा जाता है।
WHO के अनुसार, संदिग्ध जानवर के काटने या खरोंच के बाद तुरंत PEP शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है।
🩹 काटने के बाद सबसे पहले क्या करें?
कुत्ते या किसी संदिग्ध जानवर के काटने पर सिर्फ वैक्सीन लगवाना ही पर्याप्त नहीं है।
सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए।
इसके बाद तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
स्थिति के अनुसार रैबीज वैक्सीन दी जाती है।
गंभीर exposure में Rabies Immunoglobulin (RIG) या monoclonal antibodies की जरूरत भी पड़ सकती है।
⚠️ नकली वैक्सीन क्यों बन सकती है जानलेवा?
रैबीज में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अगर किसी व्यक्ति को वास्तविक exposure के बाद ऐसी वैक्सीन मिले जिसकी potency पर्याप्त न हो,
तो जरूरी सुरक्षा विकसित नहीं हो सकती।
यही वजह है कि नकली या घटिया वैक्सीन का मामला सामान्य नकली दवा से ज्यादा गंभीर माना जाता है।
WHO के अनुसार, सही wound care और गुणवत्तापूर्ण PEP समय पर मिलने पर रैबीज से होने वाली मौतों को लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है।
🔎 अभी क्या पता चला है?
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध वैक्सीन कहां तैयार हुई।
साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इसकी सप्लाई कहां-कहां तक पहुंची।
सरकार की निगरानी खास तौर पर बैच KE25012 पर केंद्रित है।
इसलिए रैबीज वैक्सीन खरीदते या लगवाते समय अधिकृत अस्पताल, क्लिनिक या फार्मेसी से ही वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है।
याद रखें—रैबीज से बचाव संभव है, लेकिन इसके लिए समय पर सही और प्रमाणित वैक्सीन बेहद जरूरी है।
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