करंट की बाड़ में तेंदुआ, कुल्हाड़ी से मौत… छह माह बाद भी जांच फाइलों में

नीमच के चर्चित तेंदुआ हत्याकांड में छह माह बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। शिकायत में मुख्य आरोपी को बचाने, बयान बदलवाने और जांच प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि SIT अभी भी रिपोर्ट का इंतजार करा रही है।

सिराज खान नीमच/रवि अवस्थी,भोपाल।

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मध्यप्रदेश के नीमच जिले के चर्चित तेंदुआ हत्याकांड में छह महीने बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मामले के वास्तविक आरोपी को बचाने के लिए वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने जांच की दिशा बदल दी, जबकि शुरुआती बयानों में मुख्य आरोपी का नाम सामने आया था। बाद में कथित रूप से बयान बदलवाकर पूरा मामला मजदूरों के सिर मढ़ दिया गया। शिकायत के बाद पीसीसीएफ स्तर से गठित दो सदस्यीय जांच समिति को एक माह में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन छह माह बाद भी रिपोर्ट लंबित है। जांच समिति का कहना है कि कुछ लोगों के बयान अभी शेष हैं।

शुरुआती बयान में खेत मालिक की भूमिका का जिक्र, बाद में बदल गई कहानी

मामला मनासा तहसील के ग्राम परवानी का है। आरोप है कि 3 जनवरी 2026 को जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ के खेत में करंट प्रवाहित अवैध बाड़ में एक तेंदुआ फंस गया था। शिकायत के अनुसार तेंदुआ पूरी तरह मृत नहीं था, बल्कि अर्धमूर्छित अवस्था में था।

आरोप है कि खेत मालिक के कहने पर वहां कार्यरत श्रमिक देवीलाल ने कुल्हाड़ी से उसके सिर पर वार कर तेंदुए को मार दिया। बाद में शव को सूखे घास के नीचे छिपाकर रात में जंगल में फेंक दिया गया।

वन विभाग के समक्ष दर्ज प्रारंभिक बयान में सह-आरोपी अंबालाल ने भी इस घटनाक्रम का उल्लेख किया था, जिसमें खेत मालिक की मौजूदगी और बाद में शव ठिकाने लगाने की बात कही गई थी।

बाद में बदले बयान, मजदूरों ने अपने ऊपर लिया पूरा अपराध

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में तीनों मजदूरों के बयान बदल गए और उन्होंने पूरी घटना की जिम्मेदारी स्वयं पर ले ली।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह बदलाव स्वेच्छा से नहीं हुआ बल्कि कथित दबाव, धमकी और आर्थिक सहायता के आश्वासन के कारण कराया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मजदूरों को भरोसा दिलाया गया कि यदि वे खेत मालिक का नाम नहीं लेंगे तो उनके परिवार की आर्थिक मदद की जाएगी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायत में गंभीर आरोप: ‘मुख्य आरोपी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश’

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्थानीय वन अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे मामले की जांच प्रभावित की गई।

शिकायत के अनुसार—

-मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
-शुरुआती बयानों को बदलवा दिया गया।
-डिजिटल साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं हुई।
-कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच नहीं कराई गई।
-पूरे मामले का दोष केवल श्रमिकों पर डाल दिया गया।

शिकायत में कई अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की गई है।

पीसीसीएफ ने बनाई SIT, एक माह में रिपोर्ट का था आदेश

शिकायत मिलने के बाद 28 मई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कार्यालय ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के सहायक प्रभारी जितेंद्र बंसल (भोपाल) और प्रभारी अधिकारी शरद जाटव (इंदौर) की दो सदस्यीय जांच समिति गठित की।

आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि समिति संबंधित व्यक्तियों के बयान लेकर आवश्यक दस्तावेजों सहित एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।

जांच अधूरी, समिति बोली—’कुछ बयान बाकी हैं’

घटना को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक विभाग किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।जांच समिति के सदस्य जितेंद्र बंसल और शरद जाटव के अनुसार—”जांच अभी जारी है। कुछ लोगों के बयान होना शेष हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट विभागीय टास्क फोर्स को सौंप दी जाएगी।”

हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है ताकि मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाए। इस संबंध में खेत मालिक जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से खबर में शामिल किया जाएगा।

बड़ा सवाल: क्या असली आरोपी तक पहुंचेगी जांच?

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अनुसूची-1 के वन्यप्राणी तेंदुए की हत्या अत्यंत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच अपेक्षित होती है,लेकिन इस मामले में जांच रिपोर्ट लंबित रहने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं—

-क्या शुरुआती बयानों की दोबारा जांच होगी?
-क्या कथित मुख्य आरोपी की भूमिका की स्वतंत्र पड़ताल होगी?
-क्या डिजिटल साक्ष्य और कॉल रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे?
-क्या जांच समिति तय समय से कई गुना अधिक विलंब का कारण बताएगी?

इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।