श्रीनगर: राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम के पूरे संस्करण के दौरान खड़े रहने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए थे। अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को ही घेरते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के वीडियो सामने रख दिए हैं।
उमर अब्दुल्ला के पूरे वंदे मातरम पर हुआ विवाद
दरअसल, श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस दौरान करीब 3 मिनट 10 सेकेंड तक सम्मान में खड़े रहे।
इसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई। कांग्रेस का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नेताओं ने वंदे मातरम के चुनिंदा हिस्से को अपनाने का फैसला किया था और इसी परंपरा का पालन किया जाना चाहिए।
NC ने कांग्रेस से पूछा- पहले अपने मुख्यमंत्रियों को देखिए
कांग्रेस के विरोध के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता तनवीर सादिक ने सोशल मीडिया पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के वीडियो शेयर किए।
NC का दावा है कि इन दोनों वीडियो में कांग्रेस के मुख्यमंत्री वंदे मातरम के पूरे संस्करण के दौरान सम्मान में खड़े दिखाई दे रहे हैं। तनवीर सादिक ने कांग्रेस नेता तारिक हमीद कर्रा को टैग करते हुए तंज कसा कि पहले अपने कांग्रेस मुख्यमंत्रियों को देखें और फिर इस मुद्दे पर अपना विचार रखें।
तारिक हमीद कर्रा ने उमर अब्दुल्ला पर साधा था निशाना
इस विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता तारिक हमीद कर्रा की टिप्पणी से हुई थी। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय प्रतीकों, गीतों और परंपराओं की देश के लोगों के दिल में विशेष जगह है। उनके मुताबिक, इनकी ताकत देश की विविधता को एक सूत्र में बांधने में है।
कांग्रेस नेता ने चिंता जताई थी कि गठबंधन के सहयोगियों ने वंदे मातरम के पूरे संस्करण को गाने का विकल्प चुना है।
केसी वेणुगोपाल ने भी जताई थी आपत्ति
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उमर अब्दुल्ला से जुड़े वीडियो को शेयर करते हुए पूरे वंदे मातरम के इस्तेमाल पर सवाल उठाया था।
उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम का पूरा संस्करण उस साझा और बहुलवादी संस्कृति के अनुरूप नहीं है, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनाया था। वेणुगोपाल ने कांग्रेस की ओर से सहयोगी दलों से उस संस्करण का पालन करने की अपील की, जिसे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नेताओं ने स्वीकार किया था।
कांग्रेस का क्या है तर्क?
कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में वंदे मातरम के चुनिंदा हिस्सों को अपनाने का फैसला सांप्रदायिक विवाद से बचने और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखने के लिए किया गया था।
कांग्रेस नेता इसी ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
अब कांग्रेस पर ही उठ रहे सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से सिद्धारमैया और रेवंत रेड्डी के वीडियो शेयर किए जाने के बाद कांग्रेस के सामने नया सवाल खड़ा हो गया है। NC का कहना है कि यदि पूरे वंदे मातरम को लेकर आपत्ति है तो कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के ऐसे वीडियो पर भी पार्टी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
इस घटनाक्रम ने INDIA गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद को और सामने ला दिया है। हालांकि, दोनों दल गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन वंदे मातरम के संस्करण और उसके सार्वजनिक आयोजन को लेकर उनके रुख में फिलहाल अंतर दिखाई दे रहा है।
विवाद के बीच राजनीतिक घमासान तेज
वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल राष्ट्रगीत के संस्करण तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता एक-दूसरे के नेताओं और उनके पुराने या सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने रखकर अपने-अपने तर्क मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा INDIA गठबंधन के भीतर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।