भोपाल(9826019364)।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर आए।
5 सितंबर को भोपाल में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने के बाद वे 6 सितंबर को रीवा पहुंचे।
यहां उन्होंने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के धरने में हिस्सा लिया।
वहीं, सागर में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला नहीं थमा है।
सोमवार को तीन और लोगों की मौत हो गई।
इसके साथ मृतकों की संख्या 19 हो गई है।
फिलहाल 112 लोग अस्पतालों में भर्ती बताए गए हैं।
मामले में 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
इनमें से 10 की गिरफ्तारी हो चुकी है।
रीवा में धरने में शामिल हुए दिग्विजय सिंह

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह देर रात रीवा पहुंचे।
इसके बाद वे जयस्तंभ चौराहे पर कांग्रेस के धरने में शामिल हुए।
यह प्रदर्शन संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के विरोध में आयोजित किया गया।
इधर, कल्पना मिश्रा के पिता सिरमौर चौराहे पर अलग धरना दे रहे हैं।
इस दौरान दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए।
स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना
धरने को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि यदि स्वास्थ्य मंत्री को इसके लिए जिम्मेदार नहीं माना जाए, तो फिर किसे जिम्मेदार माना जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित है।
साथ ही कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अपने गृह जिले में भी व्यवस्था सुधारने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
संजय गांधी अस्पताल पर भी उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने अस्पताल में सामने आई गंभीर घटनाओं का जिक्र किया।
साथ ही अस्पताल की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई।
उन्होंने नर्सिंग भर्तियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
उनका आरोप है कि वर्षों से नर्सिंग भर्ती और घोटालों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
इसका असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है।
साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
सागर में जहरीली शराब से 3 और मौतें

सागर में जहरीली शराब कांड में सोमवार को तीन और लोगों की मौत हुई।
धुरमार निवासी 55 वर्षीय महेश रावत ने बंडा अस्पताल में दम तोड़ा।
वहीं छापरी गांव की 50 वर्षीय श्याम बाई अहिरवार की जिला अस्पताल में मौत हुई।
इसके अलावा पापेट गांव निवासी कृष्ण कुमार लोधी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा।
इससे पहले भोपाल एयरलिफ्ट किए गए राम प्रसाद लोधी की रविवार रात मौत हो गई थी।
इस तरह मामले में अब तक 19 मौतें हो चुकी हैं।
वहीं, 112 लोग अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं।
30 आरोपी नामजद, 10 गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस उनसे शराब की सप्लाई और नेटवर्क से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।
FIR में लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और यशवंत ठाकुर के नाम भी शामिल हैं।
पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
उमंग सिंघार ने भी लगाए गंभीर आरोप
आज बंडा तहसील के ग्राम बमूरा पहुँचकर जहरीली शराब त्रासदी में जान गंवाने वाले परिवारों से मुलाकात की। यहाँ जहरीली शराब से 6 लोगों की मृत्यु हुई है।
मृतकों के छोटे-छोटे बच्चे बता रहे हैं कि किस तरह शराब खुलेआम दुकानों पर बिक रही है। उनकी बातें सुनकर मन व्यथित है।
यह स्पष्ट है कि… pic.twitter.com/jIKCauQjxr
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 6, 2026
इधर,सागर दौरे से वापसी पर मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया से बात की।
उन्होंने इस दौरान सरकार को घेरा।
सिंघार ने कहा कि सरकार और आबकारी विभाग शराब के नेटवर्क के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
उनके मुताबिक, इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश की बजाय मध्यप्रदेश के उज्जैन से जुड़े हो सकते हैं।
उज्जैन में अनीश यादव किससे जुड़े?
सिंघार ने भावनगर में शराब से हुई मौतों का हवाला दिया।
उन्होंने उज्जैन के कथित नेटवर्क की जांच की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सिंघार ने सवाल किया कि उज्जैन में अनीश यादव किससे जुड़े हुए हैं ।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
सिंघार ने आरोप लगाया कि उज्जैन और धार में जहरीली शराब तैयार होकर सागर तक पहुंच रही है।
आबकारी आयुक्त के सागर दौरे पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ⬆️ के सागर दौरे पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि अधिकारी मामले की जांच के लिए पहुंचे थे या किसी को बचाने के लिए।
सिंघार ने कहा कि जिला आबकारी अधिकारी और बड़े अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने डिस्टलरी मालिकों की भूमिका की भी जांच की मांग की।
सिंघार ने आबकारी विभाग के कथित आदेशों में बदलाव का मुद्दा भी उठाया।
उनका कहना है कि यदि किसी शराब ब्रांड को पहले पीने योग्य नहीं बताया गया
और बाद में आदेश बदल दिया गया, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए अधिकारियों और डिस्टलरी संचालकों के बीच संभावित मिलीभगत की जांच की मांग की।
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