125वीं जयंती पर डॉ. मुखर्जी को राष्ट्रीय नमन: मोदी बोले- उनकी सोच आज भी आधुनिक भारत का पथप्रदर्शक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक महान देशभक्त और एक दृष्टा थे जो भारत की एकता के लिए समर्पित थे। उन्होंने कहा कि उनकी विचारधारा ने आधुनिक भारत को मार्गदर्शन किया है।

नई दिल्ली।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि डॉ मुखर्जी ने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। प्रधानमंत्री ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार, संकल्प और राष्ट्रदृष्टि आज भी आधुनिक भारत को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। जिन्होंने राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी विचारधारा ने देश के राजनीतिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा प्रदान की।

सालभर चलेगा राष्ट्रीय स्मरण समारोह 

प्रधानमंत्री ने बताया कि डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्मरण कार्यक्रम तैयार किया है। इसकी शुरुआत आज 6 जुलाई से हो चुकी है। यह आयोजन अगले वर्ष 6 जुलाई तक जारी रहेगा।

इस दौरान देशभर में सेमिनार, प्रदर्शनी, व्याख्यानमाला, युवा संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोध गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ताकि नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रवादी चिंतन से परिचित कराया जा सके।

‘एक देश में दो विधान’ के विरोध से राष्ट्रीय पहचान

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान और अलग झंडे के प्रावधान का मुखर विरोध किया था। उनका प्रसिद्ध नारा— “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”— आज भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण संदर्भ माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

शिक्षाविद, प्रशासक और राष्ट्रवादी नेता

डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। वे महज 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने।

स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन बाद में वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे बाद में भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक नींव माना गया।

भाजपा के लिए वैचारिक प्रेरणास्रोत

भाजपा लंबे समय से डॉ. मुखर्जी को अपने प्रमुख वैचारिक स्तंभों में शामिल करती रही है।

पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा में डॉ. मुखर्जी के विचारों की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।

 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़े अहम तथ्य

▶ जन्म : 6 जुलाई 1901
▶ निधन : 23 जून 1953
▶ भारतीय जनसंघ के संस्थापक
▶ स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री
▶ 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने
▶ जम्मू-कश्मीर में विशेष प्रावधानों के विरोध का नेतृत्व किया
▶ नारा : “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”