अंतरिक्ष से दिखा मानसून का ‘यू-टर्न’! INSAT-3DS की तस्वीरों ने खोला मौसम का राज

INSAT-3DS ने दिखाई मानसून की विदाई, 4 दिन में बदला मौसम का मिजाज

नई दिल्ली।

भारत में मानसून अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है।

इसका असर जमीन के साथ-साथ अंतरिक्ष से भी साफ दिखाई दे रहा है।

भारतीय मौसम उपग्रह INSAT-3DS की 23 और 27 सितंबर की तस्वीरों में कुछ ही दिनों में बादलों के पैटर्न में बड़ा बदलाव नजर आया है।

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्से अपेक्षाकृत साफ दिखाई दिए,

जबकि कुछ क्षेत्रों में मौसम प्रणालियों के कारण बादल और बारिश की गतिविधियां बनी रहीं।

🛰️ 4 दिन में बदली आसमान की तस्वीर

23 सितंबर की तस्वीर में उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में व्यापक बादल दिखाई दे रहे थे।

लेकिन 27 सितंबर की तस्वीर में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्से अपेक्षाकृत साफ नजर आए।

यह बदलाव मानसून की धीरे-धीरे हो रही वापसी का संकेत है।

🌧️ फिर कहां से आ गई बारिश?

मानसून की वापसी के बीच भी बारिश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

उत्तर भारत में Western Disturbance यानी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ।

यह सिस्टम उत्तर भारत में बादल, बारिश और गरज-चमक की स्थिति बना सकता है।

इसके साथ मध्य भारत के ऊपर बने मौसम सिस्टम की भी भूमिका रही।

दोनों के प्रभाव से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों में बारिश हुई।

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🌬️ पश्चिमी विक्षोभ क्या करता है?

पश्चिमी विक्षोभ एक मौसम प्रणाली है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है।

इसकी उत्पत्ति भूमध्यसागरीय क्षेत्र के आसपास से होती है।

भारत पहुंचने पर यह खासकर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में बादल, बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति पैदा कर सकता है।

मानसून की नमी के साथ इसकी सक्रियता बढ़ने पर बारिश की गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं।

☁️ सैटेलाइट तस्वीर में बादल इतने अलग क्यों दिखते हैं?

INSAT-3DS मौसम की निगरानी के लिए कई तरह के सेंसर का इस्तेमाल करता है।

थर्मल-इन्फ्रारेड तस्वीरों से बादलों के तापमान का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बहुत ऊंचे और ठंडे बादल अक्सर गहरे संवहनीय बादलों यानी Deep Convection से जुड़े होते हैं।

ऐसे बादल गरज और तेज बारिश की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, केवल सैटेलाइट तस्वीर देखकर किसी स्थान पर बारिश की मात्रा तय नहीं की जा सकती।

इसके लिए मौसम विभाग के अन्य आंकड़ों और पूर्वानुमानों को भी देखना जरूरी होता है।

🌦️ मानसून की विदाई का मतलब बारिश खत्म नहीं

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

मानसून की वापसी शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में तुरंत बारिश बंद हो जाएगी।

अलग-अलग मौसम प्रणालियां बाद में भी बारिश करा सकती हैं।

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IMD मानसून की वापसी तय करने के लिए केवल बारिश रुकने को नहीं देखता।

लगातार शुष्क मौसम, निचले स्तर के वायुमंडल में एंटी-साइक्लोन और नमी में कमी जैसे संकेत भी देखे जाते हैं।

📅 29 सितंबर के आसपास दिख सकता है बड़ा बदलाव

मौसम रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर के अंतिम दिनों में कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि कम होने की संभावना है।

29 सितंबर को मौसम के अधिक शुष्क होने की दिशा में एक संभावित अहम मोड़ बताया गया है।

लेकिन पूरे भारत से मानसून की वापसी किसी एक निश्चित तारीख पर नहीं होती।

यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।

🔎 अंतरिक्ष से मौसम की निगरानी क्यों जरूरी?

भारत जैसे विशाल देश में हर मौसम प्रणाली को जमीन से लगातार देखना मुश्किल है।

ऐसे में INSAT-3DS जैसे उपग्रह बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी में मदद करते हैं।

इनसे बादलों की दिशा, मौसम प्रणालियों की गतिविधि और उनके बदलाव को समझने में मौसम वैज्ञानिकों को मदद मिलती है।

यानी, आसमान में बादलों की तस्वीर सिर्फ तस्वीर नहीं है।

यह बदलते मौसम का संकेत भी है।