दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा मोड़, बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश; FIR दर्ज करने का भी निर्देश

दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI जांच और FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को आरोपी नहीं माना जाएगा और CBI जांच में सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।

मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने CBI को FIR दर्ज करने और एक वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है।

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के महज छह दिन बाद 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत भी मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच अंतर के कारण दिशा की मौत को लेकर लंबे समय से कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं। हालांकि, अदालत के मौजूदा आदेश का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दोषी माना गया है।

CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश

अदालत ने CBI के मुंबई क्षेत्र के संयुक्त निदेशक को निर्देश दिया कि वह एक वरिष्ठ और अनुभवी जांच अधिकारी नियुक्त करें। अधिकारी दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने के बाद उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर FIR दर्ज करेगा और मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगा।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR दर्ज होने मात्र से किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री और उचित संदेह सामने आने पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर देखा जा सकेगा।

छह साल पुरानी मौत की फिर होगी जांच

दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report (ADR) के तहत जांच की थी। पुलिस का कहना रहा है कि उपलब्ध जांच और फॉरेंसिक सामग्री के आधार पर मौत आत्महत्या या इमारत से गिरने के कारण हुई थी और किसी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। बाद में सार्वजनिक और सोशल मीडिया पर सामने आए दावों के बीच मामले की दोबारा जांच की गई।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक FIR दर्ज किए बिना जांच किस कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रखी गई। अदालत ने कहा कि अगर गंभीर आरोप सामने आए थे तो मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कर उसका अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए था।

दिशा के पिता ने क्या आरोप लगाए?

दिशा के पिता सतीश सालियान ने अदालत में याचिका दाखिल कर उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने मामले में FIR दर्ज करने और स्वतंत्र CBI जांच की मांग की थी। उनकी याचिका में हत्या और यौन अपराध समेत गंभीर आरोप लगाए गए थे।

उनके वकील ने सुनवाई के दौरान जांच से जुड़े दस्तावेजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित कुछ सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि उनकी जांच में किसी आपराधिक साजिश या हत्या के पर्याप्त सबूत सामने नहीं आए।

आदित्य ठाकरे का नाम भी चर्चा में

मामले की सुनवाई के दौरान शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी सामने आया। दिशा के पिता की ओर से उन पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आरोप या FIR दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। जांच अधिकारी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करनी होगी।

आदित्य ठाकरे की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और इसका विरोध किया। वहीं सरकारी पक्ष ने भी कहा कि पुलिस की जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने योग्य पर्याप्त सामग्री नहीं मिली थी।

अगर अपराध साबित हुआ तो चार्जशीट, नहीं तो क्लोजर रिपोर्ट

हाई कोर्ट ने CBI जांच के नतीजे को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है और पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो CBI को संबंधित अदालत में उचित रिपोर्ट/चार्जशीट दाखिल करनी होगी। वहीं यदि जांच में अपराध का कोई आधार नहीं मिलता है, तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

अदालत ने दिशा के पिता को भी यह स्वतंत्रता दी है कि यदि CBI की ओर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाती है तो वह कानून के मुताबिक उसके खिलाफ विरोध याचिका दायर कर सकते हैं।

सुशांत सिंह राजपूत से क्यों जुड़ा रहा दिशा सालियान का मामला?

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी, जबकि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच केवल छह दिनों का अंतर होने के कारण दिशा का मामला सुशांत की मौत से जुड़ी सार्वजनिक चर्चाओं का हिस्सा बन गया। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि करना जांच का विषय है और इसे मौजूदा अदालत के आदेश से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।