अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। यह नियुक्ति मंदिर के प्रशासन, संचालन और भविष्य की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और उन्होंने पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली है। उनके लंबे सैन्य अनुभव को देखते हुए ट्रस्ट ने उन्हें इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद के लिए चुना है।
5585 आवेदनों के बाद हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस प्रक्रिया की शुरुआत करीब 5,585 आवेदनों से हुई थी। कई चरणों की स्क्रीनिंग, ऑनलाइन बातचीत और अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। अंततः तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा गया और जितेंद्र मिश्रा का चयन हुआ।
इस चयन प्रक्रिया में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े और पूर्व न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली वाली तीन सदस्यीय सर्च कमेटी की अहम भूमिका रही। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की थी।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब 38 साल तक सेवा दे चुके हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच ज्वाइन की थी।
अपने करियर के दौरान वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट रहे। उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल में वरिष्ठ टेस्ट फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी काम किया। इसके अलावा वह MiG-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में चीफ टेस्ट पायलट जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख भी रहे
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। इस पद पर रहते हुए उनके जिम्मे देश की महत्वपूर्ण वायु सुरक्षा और ऑपरेशनल जिम्मेदारियां थीं।
उनके सैन्य करियर में ऑपरेशनल प्लानिंग, विमान आधुनिकीकरण और रणनीतिक प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पद शामिल रहे हैं।
गरुड़ IV अभ्यास में भी निभाई अहम भूमिका
मिश्रा के करियर में अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास का अनुभव भी शामिल है। जून 2010 में उन्होंने फ्रांस में आयोजित बहुराष्ट्रीय Garuda IV एयर एक्सरसाइज में भारतीय वायुसेना के दल का नेतृत्व किया था।
उनके नेतृत्व में भारतीय दल ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया और भारत तथा अन्य देशों की वायु सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा नाम
जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर से भी जोड़ा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान से जुड़ी उनकी भूमिका और सैन्य सेवा के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO का पद मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक और संचालन संबंधी कामों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर परिसर के प्रशासन, विभिन्न परियोजनाओं के समन्वय और रोजमर्रा के संचालन को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी होगी।
राम मंदिर परिसर के निर्माण और उससे जुड़ी विभिन्न सुविधाओं का विस्तार लगातार जारी है। ऐसे में ट्रस्ट के भीतर एक पूर्णकालिक कार्यकारी अधिकारी होने से प्रशासनिक फैसलों और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को अधिक व्यवस्थित करने की उम्मीद है।
पहली बार बनाया गया पूर्णकालिक CEO पद
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जितेंद्र मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO हैं। ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर बनाने के लिए इस पद को स्थापित किया है।
मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, दान और वित्तीय प्रबंधन तथा विभिन्न निर्माण एवं संचालन गतिविधियों को देखते हुए यह पद भविष्य में काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्यों खास है जितेंद्र मिश्रा का चयन?
जितेंद्र मिश्रा के चयन के पीछे उनके लंबे प्रशासनिक और सैन्य अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वायुसेना में उन्होंने ऑपरेशनल प्लानिंग, नेतृत्व, रणनीतिक प्रबंधन और बड़े स्तर पर संसाधनों के समन्वय से जुड़े काम किए हैं।
राम मंदिर जैसी विशाल और लगातार विकसित हो रही परियोजना के लिए भी बड़े स्तर के प्रशासनिक समन्वय की जरूरत है। ऐसे में सैन्य पृष्ठभूमि वाले अनुभवी अधिकारी को CEO बनाना ट्रस्ट के प्रशासन को अधिक अनुशासित और व्यवस्थित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति मंदिर के प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव है। करीब 38 साल की भारतीय वायुसेना सेवा, वरिष्ठ कमान का अनुभव और रणनीतिक प्रबंधन की पृष्ठभूमि के साथ अब उनकी जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन और संचालन को नई दिशा देना होगी।
CEO पद के गठन से यह संकेत मिलता है कि राम मंदिर परियोजना अब केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दीर्घकालिक प्रबंधन, संचालन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी संस्थागत रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।