चीनी की कीमतों पर बड़ी राहत की उम्मीद, शुगर मिलों ने कहा- देश में पर्याप्त स्टॉक; जल्द सस्ती हो सकती है चीनी

चीनी की कीमतों में 20% से ज्यादा उछाल के बाद सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। शुगर इंडस्ट्री का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक है और आने वाले दिनों में कीमतें कम हो सकती हैं।

नई दिल्ली: देश में बढ़ती चीनी की कीमतों के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में इसकी कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम 20 फीसदी से अधिक बढ़कर करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। सरकार के इस फैसले से आने वाले समय में बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

चीनी की कमी नहीं, त्योहारों के लिए पर्याप्त स्टॉक

ISMA ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आने वाले त्योहारों के दौरान भी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने की उम्मीद है।

शुगर इंडस्ट्री का मानना है कि आयातित चीनी की खेप आने के बाद बाजार में सप्लाई और मजबूत होगी। इससे थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात को दी मंजूरी

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई लाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।

सरकार के इस कदम से शुगर मिलों को कच्ची चीनी उपलब्ध होगी, जिसे देश की रिफाइनरियों और मिलों में प्रोसेस करके सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा। इसके बाद यह चीनी घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होगी।

15 अक्टूबर से पहले पहुंच सकती है पहली खेप

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे के मुताबिक, आयात की गई चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती हैं।

हालांकि, आयात के लिए ब्राजील पर निर्भरता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि थाईलैंड खुद चीनी की कमी का सामना कर रहा है, इसलिए फिलहाल ब्राजील प्रमुख विकल्प के तौर पर सामने आ रहा है।

ब्राजील से भारत तक जहाजों को पहुंचने में लगभग 40 से 45 दिन लग सकते हैं। इसके बाद बंदरगाह से चीनी को संबंधित मिलों तक पहुंचाने में भी समय लगेगा। आयात की वास्तविक समयसीमा डीजीएफटी की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट और बंदरगाहों पर भीड़ जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

31 अक्टूबर की डेडलाइन में मिल सकती है छूट

सरकार ने आयात की खेप के लिए 31 अक्टूबर की समयसीमा तय की है। हालांकि, NFCSF का मानना है कि रास्ते में आ चुके शिपमेंट को इस तारीख के बाद भी भारत पहुंचने की अनुमति मिल सकती है।

इससे उन कंपनियों और मिलों को राहत मिल सकती है जिन्होंने समयसीमा को ध्यान में रखते हुए पहले ही आयात प्रक्रिया शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों को पहले मिलेगी सप्लाई

आयातित रॉ शुगर सबसे पहले देश के तटीय राज्यों तक पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को बंदरगाहों के नजदीक होने के कारण शुरुआती सप्लाई मिलने की उम्मीद है।

इसके बाद उत्तर भारत के लैंडलॉक्ड राज्यों में रेल और सड़क परिवहन के जरिए चीनी पहुंचाई जाएगी। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

भारत ने तय कोटे से कम किया चीनी का निर्यात

NFCSF के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अनुकूल नहीं होने के कारण भारत ने निर्धारित 20 लाख टन के निर्यात कोटे में से केवल करीब 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात किया।

फेडरेशन के अनुसार, यदि निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं होती, तब भी कुल निर्यात करीब 10 लाख टन से ज्यादा रहने की संभावना नहीं थी।

घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है।

2025-26 सीजन में करीब 2.79 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान

NFCSF ने 2025-26 सीजन के लिए अपने नेट शुगर प्रोडक्शन अनुमान को 2.79 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। इसमें से करीब 24 लाख टन चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया गया है।

भारत में सामान्य तौर पर हर साल करीब 3 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होता है। ऐसे में घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और शुगर इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है।

रॉ शुगर से कैसे बनती है सफेद चीनी?

ब्राजील जैसे देशों से आने वाली रॉ शुगर को सीधे खाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसे देश की रिफाइनरियों और शुगर मिलों में प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद रॉ शुगर को सफेद दानेदार चीनी में बदला जाता है और फिर यह खुदरा बाजार तक पहुंचती है।

कुल मिलाकर, सरकार के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले और घरेलू स्टॉक को पर्याप्त बताए जाने से आने वाले महीनों में चीनी की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका वास्तविक असर आयातित चीनी की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स और घरेलू मांग पर निर्भर करेगा।