उत्तराखंड: चमोली की टनल में मलबे का कहर,3 मजदूरों की मौत, दो दर्जन से अधिक के दबे होने की आशंका

चमोली की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की टनल में भूस्खलन से बड़ा हादसा हुआ। तीन मजदूरों की मौत की सूचना है, जबकि 13 घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल भेजा गया।

चमोली।
उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजना की सुरंग एक बार फिर बड़े हादसे की गवाह बनी।

हादसा विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की टीआरटी (टेल रेस टनल) में हुआ। यहां गुरुवार शाम काम के दौरान हुए भूस्खलन ने मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

पानी के तेज बहाव के साथ पत्थर और भारी मलबा सुरंग में घुस गया।

हादसे में तीन मजदूरों की मौत की सूचना है, जबकि 13 घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया है।

कुछ अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका के चलते रातभर राहत-बचाव अभियान जारी रहा।

150 मीटर दूर खिसकी पहाड़ी, टनल तक पहुंचा मलबा

हादसा बृहस्पतिवार शाम करीब 6:10 बजे हुआ।

उस समय मजदूर टेल रेस टनल में सरिया वेल्डिंग का काम कर रहे थे।

बताया गया कि काम वाली जगह से करीब 150 मीटर दूर अचानक भूस्खलन हुआ।

इसके बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा तेजी से सुरंग के भीतर पहुंच गया।

कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। देखते ही देखते टनल के अंदर अफरा-तफरी मच गई।

13 मजदूरों को निकाला, अस्पताल में इलाज जारी

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

इसके बाद SDRF, NDRF, ITBP और सेना को भी राहत अभियान में लगाया गया।

रात करीब 9 बजे तक 13 घायल मजदूरों को टनल से बाहर निकालकर जिला अस्पताल गोपेश्वर भेजा गया।

हालांकि, राहत दलों को आशंका है कि कुछ मजदूर अभी भी मलबे के नीचे या सुरंग के प्रभावित हिस्से में फंसे हो सकते हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन पर प्रशासन की नजर

बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला और जिलाधिकारी गौरव कुमार ने घटनास्थल पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बचाव अभियान में किसी तरह की देरी न हो।

टनल के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

चुनौती यह है कि सुरंग के अंदर मलबा, पानी और अस्थिर भूभाग रेस्क्यू ऑपरेशन को मुश्किल बना रहे हैं।

क्या है टीआरटी, जहां हुआ हादसा?

टीआरटी यानी टेल रेस टनल जल विद्युत परियोजना का अहम हिस्सा होती है।

बिजली उत्पादन के बाद टरबाइन से निकलने वाले पानी को इसी सुरंग के जरिए पावरहाउस से बाहर मुख्य नदी तक पहुंचाया जाता है।

विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में यह टनल करीब ढाई किलोमीटर लंबी बताई जाती है।

इसी भूमिगत हिस्से में निर्माण कार्य के दौरान यह हादसा हुआ।

इसी परियोजना में पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा

यह पहली बार नहीं है, जब इस निर्माणाधीन परियोजना में बड़ा हादसा हुआ हो।

पिछले साल 31 दिसंबर की रात सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं।

उस दुर्घटना में करीब 60 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे।

उस समय सुरंग के भीतर 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे।

हादसे के बाद निर्माण कार्य भी लंबे समय तक प्रभावित रहा था।

अब एक बार फिर टनल में हुए भूस्खलन ने परियोजना में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे लोगों तक पहुंचना और सभी को सुरक्षित बाहर निकालना है।