बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव ने नई हलचल पैदा कर दी है। एनडीए खेमे में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की तैयारी लगभग पूरी है। अगर ऐसा होता है तो बिहार की सत्ता की कमान भाजपा के हाथ में जा सकती है।
भाजपा का सीएम, जेडीयू की नई भूमिका?
सूत्रों के मुताबिक, एनडीए के भीतर इस बात पर मंथन चल रहा है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा। नामों पर औपचारिक घोषणा भले न हुई हो, लेकिन सत्ता संतुलन को साधने की रणनीति पर बातचीत जारी है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर जल्द ही शीर्ष स्तर पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
‘निशांत फैक्टर’ की एंट्री?
चर्चा यह भी है कि निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री की जमीन तैयार हो चुकी है। पहले उनका नाम राज्यसभा के लिए उछला था, लेकिन अब खुद नीतीश कुमार के नाम की चर्चा जोरों पर है।
कयास यहां तक हैं कि निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाकर नई पीढ़ी को आगे लाने का संदेश दिया जा सकता है।
अमित शाह की मौजूदगी से बढ़ेंगे संकेत?
सूत्रों का दावा है कि नामांकन के वक्त केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की मौजूदगी कई राजनीतिक संदेश दे सकती है।
गुरुवार को संभावित बैठक में जेडीयू और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व और भूमिका को लेकर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
10 बार सीएम की शपथ, अब नई पारी?
75 वर्षीय नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। 2015 से, Jitan Ram Manjhi के संक्षिप्त कार्यकाल को छोड़ दें तो वे लगातार सत्ता में बने रहे।
2025 में राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमान के विपरीत उन्होंने महिला वोटरों के भरोसे शानदार वापसी की थी-साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उनकी मजबूत सामाजिक पकड़ बनाई।
दिल्ली-पटना के बीच तेज हुई आवाजाही
जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की दिल्ली से पटना वापसी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मुलाकात ने अटकलों को और हवा दी है।
पार्टी के भीतर और भाजपा नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क यह संकेत दे रहा है कि आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकते हैं।
सियासी संदेश साफ है: अगर नीतीश कुमार दिल्ली की राह पकड़ते हैं, तो बिहार में सत्ता संतुलन का नया अध्याय शुरू हो सकता है-जहां भाजपा नेतृत्व में सरकार और जेडीयू की नई भूमिका दोनों की परीक्षा होगी।