धुएं में घिरा चमोली : जंगलों की आग आबादी की दहलीज पर

चमोली।

Chamoli में सोमवार से शुरू हुआ जंगलों में आग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक के बाद एक भड़कती आग से पूरा इलाका धुएं की चादर में लिपटा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ने लगी हैं।

🌲 होली पर भी नहीं थमी आग

बुधवार को होली के दिन भी नारायणबगड़, जाख-कड़ाकोट, बेड़गांव, मानूर, तलासेरा और टेंटुड़ा के जंगल दिनभर सुलगते रहे।
उत्तरी कड़ाकोट पट्टी के सुनभी और भटियाणा क्षेत्र से भी आग लगने की खबरें आईं। अब कई स्थानों पर आग आबादी की ओर बढ़ती दिख रही है, जिससे ग्रामीणों में चिंता गहराने लगी है।

🌳 कंडारा और आदिबदरी क्षेत्र में भारी नुकसान

ब्लॉक की कपीरी पट्टी स्थित ग्राम पंचायत कंडारा और आसपास के जंगलों में लगी आग से वन संपदा को व्यापक क्षति पहुंची है।
पूर्व प्रधान कुसुम कंडारी और पदमेंद्र कंडारी के अनुसार, दो दिनों से जंगल लगातार जल रहे हैं और आग विकराल रूप लेती जा रही है।

आदिबदरी के समीप जंगल दूसरे दिन भी धधकते रहे, जबकि बरतोली गांव में आग बुझाने के लिए महिलाएं खुद मोर्चा संभालती नजर आईं।

🚨 अभियान पर सवाल, जमीनी तैयारी नाकाफी?

एक ओर वन विभाग वनाग्नि सुरक्षा अभियान चलाने का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर पर्याप्त इंतजाम न होने से इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आग के कारण मवेशियों के लिए चारा-पत्ती लाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्राम प्रहरियों और वन सरपंचों को सक्रिय करने की मांग की है।

🌫️ स्वास्थ्य पर असर, कार्रवाई की मांग

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि धुएं से सांस के रोगियों को खासा नुकसान हो रहा है, लेकिन आग नियंत्रित करने के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि विभागीय कर्मियों को कंडारा क्षेत्र में आग बुझाने के लिए तत्काल भेजा जा रहा है।

हालात संकेत दे रहे हैं कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जंगलों की यह आग पर्यावरण ही नहीं, ग्रामीण जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

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