भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के 400 उद्योगपति! ‘विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन’ में बनेगा विकास का रोडमैप

भोपाल में 22-23 अक्टूबर को विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन 2026 होगा। 400 उद्यमी निवेश, MSME, निर्यात और रोजगार पर मंथन करेंगे।

भोपाल(9826019364)।

मध्यप्रदेश में उद्योग, व्यापार और निवेश को नई दिशा देने के लिए राजधानी भोपाल में बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है।

फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FMPCCI) की ओर से 22 और 23 अक्टूबर को

‘विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन 2026’ आयोजित किया जाएगा।

इसमें देश के 10 से 15 राज्यों के करीब 400 उद्यमी शामिल होंगे।

रूस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।

FMPCCI के अध्यक्ष हिमांशु खरे व सचिव प्रवीण आचार्य ने यह जानकारी सोमवार को मीडिया से साझा की।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य उद्योगों को नए अवसर उपलब्ध कराना है।

साथ ही निवेश, निर्यात, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।

आयोजकों को उम्मीद है कि इससे मध्यप्रदेश के उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने में मदद मिलेगी।

CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन, जगदीश देवड़ा होंगे अध्यक्ष

सम्मेलन का पहला दिन 22 अक्टूबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा।

सुबह 11 बजे उद्घाटन समारोह प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे।

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

दूसरे दिन 23 अक्टूबर को कार्यक्रम एनआरआई बायपास, भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

इसमें उद्योग, व्यापार और विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी।

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‘एक राष्ट्र, एक उद्योग दृष्टि, एक विकसित भारत’ होगा संदेश

सम्मेलन की थीम ‘एक राष्ट्र, एक उद्योग दृष्टि, एक विकसित भारत’ रखी गई है।

इसके तहत मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं और निवेश की संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

दूसरे राज्यों के सफल औद्योगिक मॉडल भी साझा किए जाएंगे।

सम्मेलन में उद्योग संगठनों, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स और MSME प्रतिनिधियों के सुझाव जुटाए जाएंगे।

इन सुझावों को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाने की पहल की जाएगी।

खास तौर पर छोटे उद्योगों के विकास, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और तकनीकी उन्नयन पर जोर रहेगा।

भोपाल डिक्लेरेशन से केंद्र तक पहुंचेंगे सुझाव

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ होगा।

इसके माध्यम से उद्योग और व्यापार जगत की समस्याओं तथा सुझावों को एक साझा दस्तावेज में संकलित किया जाएगा।

इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की योजना है।

साथ ही संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और भारत सरकार तक सुझाव पहुंचाने की पहल की जाएगी।

इसका उद्देश्य MSME क्षेत्र को नई गति देना है। रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना

और भारतीय अर्थव्यवस्था में छोटे उद्योगों की भागीदारी मजबूत करना भी इसके प्रमुख लक्ष्य हैं।

निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार तक पहुंच पर चर्चा

पहले दिन उद्योग संगठनों के प्रस्तुतिकरण के साथ निर्यात पर विशेष संवाद होगा।

‘मेक इन एमपी’ प्रदर्शनी में संस्कृति, शिल्प, उद्यमिता और नवाचार को प्रमुखता दी जाएगी।

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उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न राज्यों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी होगा।

दोपहर के सत्र में MSME की चुनौतियों, वित्तीय उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा होगी।

‘MSME निर्यात को प्रोत्साहन देने में प्रमुख एजेंसियों की भूमिका’ विषय पर पैनल चर्चा भी प्रस्तावित है।

इसमें निर्यात संवर्धन संस्थाओं और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के उपायों पर विचार किया जाएगा।

पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा पर भी फोकस

23 अक्टूबर को पर्यटन एवं आतिथ्य, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, MSME ऋण और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष सत्र होंगे।

पावर इंजीनियरिंग और उद्योगों के विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

निर्धारित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञों तथा सिडबी और बीपीसीएल के कार्यपालक निदेशकों के संबोधन शामिल हैं।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वेंडर विकास, आपूर्ति श्रृंखला और उद्योग 4.0 जैसी तकनीकों पर विचार-विमर्श होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स को अपनाने के अवसर भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

1975 से उद्योग जगत के हितों के लिए सक्रिय है फेडरेशन

फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री वर्ष 1975 से उद्योग और व्यापार जगत के हितों के लिए काम कर रहा है।

अध्यक्ष हिमांशु खरे ने उद्योगपतियों, व्यापारियों, MSME उद्यमियों, स्टार्टअप्स और निर्यातकों से सम्मेलन में भाग लेने की अपील की है।

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वेयरहाउस निर्माण के लिए सरकार दे सॉवरेन गारंटी: अशोक आनंद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में FMPCCI की वेयरहाउसिंग कमेटी के चेयरमैन अशोक आनंद भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अधिकांश निजी वेयरहाउस संचालक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

सरकारी उपार्जन के तहत भंडारित फसलों का किराया समय पर नहीं मिलने से उन्हें बैंक की किस्तें चुकाने में परेशानी हो रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में ढाई हजार से अधिक निजी वेयरहाउस हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, इनके संचालकों का करीब सवा लाख करोड़ रुपये का सरकारी भुगतान लंबे समय से बकाया है।

इसके चलते कई वेयरहाउस खाली पड़े हैं। अशोक आनंद ने मांग की कि सरकार निजी वेयरहाउस के निर्माण को

प्रोत्साहित करने के लिए सॉवरेन गारंटी (सरकारी ऋण गारंटी) उपलब्ध कराए।

साथ ही, फसलों की प्रकृति और भंडारण के आधार पर किराया तय किया जाए।

उन्होंने कहा कि मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने से वेयरहाउसिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।

इस मुद्दे को ‘विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन 2026’ में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

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भोपाल डिक्लेरेशन (Bhopal Declaration), मध्यप्रदेश निर्यात (MP Exports), रोजगार सृजन (Employment Generation)