छींद वाले बब्बा के स्वरूप में विराजे पवनपुत्र, हनुमान नगर बना नया आस्था केंद्र
भोपाल के हनुमान नगर में दक्षिणमुखी हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक विधि से संपन्न हुई। भव्य कलश यात्रा, शोभायात्रा, हवन-पूजन और भंडारे के साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा।
जाटखेड़ी रोड स्थित हनुमान नगर ने रविवार को अपने नाम को सच्चे अर्थों में चरितार्थ कर दिया। करीब दो दशक पहले बसे इस नगर में पहली बार भगवान हनुमान की दक्षिणमुखी प्रतिमा की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके साथ ही श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर परिसर धार्मिक आस्था का नया केंद्र बन गया। तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का समापन भव्य कलश यात्रा, शोभायात्रा और भंडारे के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आचार्य प्रवीण कुमार शर्मा (In Photo with Idole) एवं उनके सहयोगी विद्वानों ने पूर्ण वैदिक विधि से प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई।
आचार्य शर्मा ने बताया कि मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी हनुमानजी की प्रतिमा रायसेन जिले के प्रसिद्ध छींद वाले बब्बा हनुमान धाम की प्रतिकृति है।
वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजन के साथ संपन्न इस अनुष्ठान के बाद मंदिर को सिद्धस्थल का स्वरूप प्राप्त हुआ।
भक्ति से सराबोर रही कलश यात्रा
समारोह के अंतिम दिन निकली भव्य कलश एवं शोभायात्रा हनुमान नगर से शुरू होकर स्टर्लिंग ग्लोब ग्रैंड परिसर और जाटखेड़ी रोड से होती हुई पुनः मंदिर पहुंची।
यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। महिलाओं ने पीले वस्त्र धारण कर सिर पर कलश रखे, मंगलगीत और भजन गाते हुए यात्रा में भाग लिया।
वहीं डीजे पर बजते भक्ति गीतों और जय श्रीराम-जय बजरंगबली के उद्घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
स्टर्लिंग ग्लोब में हुआ भव्य स्वागत
स्टर्लिंग ग्लोब ग्रैंड के फेज-1 और फेज-3 के रहवासियों ने शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना की और भक्ति संगीत पर झूमते हुए यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सात दंपतियों ने निभाई यजमान की भूमिका
17 से 19 जुलाई तक चले इस धार्मिक आयोजन में सात दंपतियों ने यजमान बनकर लगातार तीन दिनों तक पूजा-अर्चना, हवन और साधना की।
इनमें रूपेश यादव, अंजुल शर्मा, आनंद सैनी, आनंद सांड, बलराम रघुवंशी, सौरभ चौहान और मिलिंद जामठे शामिल रहे।
वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा इलाका आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा।
भीमेश्वर महादेव मंदिर परिसर में तीसरा मंदिर
(बाल हनुमान का स्वरूप धारण किए नन्हा श्रद्धालु अपनी मां की गोद में यात्रा में शामिल हुआ।)
हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर परिसर में तीसरे मंदिर की स्थापना हो गई। इससे पहले यहां महादेव मंदिर और शीतला माता मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं। अब हनुमान मंदिर जुड़ने से यह परिसर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया है।
मंदिर निर्माण और आयोजन में हनुमान नगर रहवासी समिति के अध्यक्ष नीलेश शुक्ला सहित रामविलास यादव, डी.पी. पाराशर, कमलेश कुमार शर्मा, अरुण अवस्थी, आर.एम. मिश्रा, उमरे जी, श्रीवास्तव जी, मुकेश त्रिवेदी, ओमप्रकाश सैनी और अन्य रहवासियों का विशेष योगदान रहा।
रविवार शाम होगा भंडारा
प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में रविवार शाम 7 बजे मंदिर परिसर में भंडारे और प्रसादी वितरण का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य यजमान आरती एवं अरुण अवस्थी ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।
दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में दक्षिणमुखी हनुमानजी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि दक्षिण दिशा यम की दिशा होती है और दक्षिणमुखी हनुमान भक्तों को भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों, शनि दोष और बाधाओं से रक्षा करते हैं। ऐसी प्रतिमाओं की पूजा से साहस, आत्मबल, सफलता और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए दक्षिणमुखी हनुमान मंदिरों को अत्यंत जागृत और सिद्ध माना जाता है।
छींद वाले बब्बा हनुमान धाम क्यों है प्रसिद्ध?
रायसेन जिले का छींद वाले बब्बा हनुमान धाम मध्यप्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिना जाता है। यहां विराजमान दक्षिणमुखी हनुमानजी के दर्शन के लिए प्रदेश ही नहीं, देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से कष्टों का निवारण, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यही कारण है कि हनुमान नगर में स्थापित नई प्रतिमा भी उसी स्वरूप की प्रतिकृति होने से श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई है।