दीपक विश्वकर्मा,उमरिया/भोपाल।
उमरिया जिले के पीएमश्री कन्या शिक्षा परिसर पाली की 250 से ज्यादा छात्राओं ने
सोमवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया।
छात्राएं कलेक्टर से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराना चाहती थीं।
हालांकि, पाली एसडीएम के आश्वासन के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।
छात्राओं ने स्कूल में पढ़ाई, खेलकूद और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
वहीं, इसी विद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्य पर छात्रवृत्ति की राशि वापस लेने के आरोपों का मामला भी लंबित है।
पढ़ाई और सुविधाओं को लेकर छात्राओं में नाराजगी
सोमवार शाम पाली कन्या विद्यालय की छात्राएं कलेक्टोरेट पहुंचीं।
उन्होंने स्कूल में शिक्षण कार्य और खेलकूद गतिविधियों को लेकर असंतोष जताया।
छात्राओं का आरोप है कि शिक्षकों का पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं है।
इसके अलावा, बजट उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल में जरूरी सुविधाओं की कमी है।
छात्राओं ने बताया कि वे पहले भी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रख चुकी हैं।
हालांकि, उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसी वजह से उन्होंने कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग की।
एसडीएम के आश्वासन पर छात्राओं ने खत्म किया धरना
छात्राओं के प्रदर्शन के दौरान पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने उनसे बातचीत की।
उन्होंने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
मौके पर मौजूद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रीता पटेल ने भी छात्राओं को विभागीय अधिकारियों तक उनकी शिकायतें पहुंचाने की जानकारी दी।
अधिकारियों की समझाइश के बाद छात्राएं वापस लौट गईं।
छात्रवृत्ति मामले में अब तक नहीं मिली पूरी राहत
पाली कन्या विद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्य सरिता जैन पर गरीब छात्राओं की छात्रवृत्ति की राशि वापस लेने के आरोप लगे थे।
छात्राओं और उनके अभिभावकों ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी।
शिकायतों के बाद विभागीय जांच कराई गई।
विभागीय कार्रवाई के तहत प्राचार्य को विद्यालय से हटाया गया।
साथ ही, राशि की रिकवरी के निर्देश दिए गए।
बताया गया है कि रिकवरी नहीं होने पर तत्कालीन कलेक्टर राखी सहाय ने पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, अब तक इस मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एफआईआर के लिए मूल दस्तावेज मांग रही पुलिस

जनजातीय कार्य विभाग की जिला संयोजक पूजा द्विवेदी के अनुसार, प्रशासन की ओर से एफआईआर की अनुशंसा की जा चुकी है।
हालांकि, पुलिस की ओर से मूल दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभागीय जांच रिपोर्ट और दोष संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
ऐसे में पुलिस द्वारा मांगे जा रहे अतिरिक्त दस्तावेजों को लेकर उन्हें भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वहीं, पाली थाना प्रभारी गोविंद सिंह धुर्वे ने कहा कि विभागीय जांच और पुलिस जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
उनके अनुसार, कुछ अभिभावकों की सहमति से छात्रवृत्ति की राशि तत्कालीन प्राचार्य को दिए जाने की बात सामने आई है।
इसके संबंध में सहमति पत्र भी मिले हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों पर दबाव बनाने के आरोप
(करीब 4 माह पुराना वीडियो,जब छात्राओं व उनके अभिभावकों ने आरोप लगाए थे।)
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि कुछ पीड़ित छात्राओं और उनके अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
कथित तौर पर उन्हें छात्रवृत्ति की राशि स्कूल को सहमति से दिए जाने की बात लिखने के लिए कहा जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
छात्रवृत्ति की राशि पर छात्राओं के अधिकार और उसकी वापसी से जुड़े सवालों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
इस संबंध में कलेक्टर राखी सहाय, पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी
और एएसपी आलोक कुमार शर्मा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि, उनसे संपर्क नहीं हो सका।
विभागीय जांच के बीच प्राचार्य को पदोन्नति का मामला
इस मामले में एक और सवाल पूर्व प्रभारी प्राचार्य की पदोन्नति को लेकर उठ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, विभागीय जांच के दौरान ही उन्हें पदोन्नति मिल गई।
दावा है कि मैदानी स्तर से समय पर जानकारी मुख्यालय तक नहीं पहुंचने के कारण यह स्थिति बनी।
विभागीय अपर आयुक्त तृप्ति श्रीवास्तव ने भी इस मामले में हुई चूक की जांच कराने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि प्रकरण की पड़ताल के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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