MPका टाइगर स्टेट का दर्जा कायम रहने के आसार,9 को PM मोदी करेंगे घोषणा

भोपाल। Tiger State tag मध्य प्रदेश टाइगर के साथ ही लेपर्ड व चीता स्टेट भी है। टाइगर के मामले में उसका यह गौरव आगे भी कायम रहने के आसार हैं। बल्कि बाघों की रिकॉर्ड संख्या के साथ। पीएम नरेंद्र मोदी आगामी 9 अप्रैल को नई दिल्ली में बाघ गणना के परिणाम घोषित करेंगे।विभागीय सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश में बीते चार साल के दौरान करीब सात सौ बाघों का पता चला है। ज​बकि वर्ष 2018 की गणना में मप्र में सिर्फ 526 बाघ पाए गए थे। हालांकि इस संख्या के साथ भी मप्र बाघों के ​मामले में देश में पहले स्थान पर रहा था। वही कर्नाटक 524 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर था।

इस बार भी कर्नाटक Karnataka से कडी टक्कर रहने का अनुमान है,लेकिन मप्र में बीते चार सालों के दौरान बाघों को कुनबा तेजी से बढा है। गणना के दौरान ही प्रदेश की विभिन्न सेंचुरीज की दो हजार से अधिक बीट में बाघों के पद चिन्ह मिले हैं।

इससे अनुमान है कि इस बार यह आंकडा सात सौ के पार जा सकता है।

दरअसल,पिछली बाघ गणना Tiger counting में इनके 66 शावकों को शामिल नहीं किया जा सका था।

यह शावक अब वयस्क हो चुके हैं। इसके चलते इन्हें भी नई गणना में शामिल किया गया।

दूसरी ओर पन्ना,बांधवगढBandhavgarh  व अन्य नेशनल पार्कोंं National Parks में भी बाघों की संख्या तेजी से बढी है।अकेले बांधवगढ़ में 150 से ज्यादा बाघ होने की संभावना है। वहीं कान्हा Kanha में बाघों की संख्या 120 से अधिक बताई जा रही है। कमोबेश यही स्थिति पन्ना नेशनल पार्क में है।

सवा सौ बाघों की मौतों ने किया निराश
सूत्रों के अनुसार,बीते तीन सालों के दौरान ही प्रदेश में सवा सौ से अधिक बाघ बीमारी,शिकार व अन्य कारणों से मारे गए। इन्हें संरक्षित Protection किया जाता तो बाघों की संख्या सात सौ से कहीं अधिक रह सकती थी।

टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडलों Centuary में ही बाघ शावकों की संख्या लगभग 196 बताई जाती है। जबकि 66 शावक पिछली गणना के जोडे जाना शेष हैं। इस तरह इस बार प्रदेश में बाघों की संख्या सात सौ से अधिक रहने का अनुमान जताया जा रहा है।

जो भी हो इसका खुलासा आगामी 9 अप्रैल को बाघ गणना की रिपोर्ट जारी होने पर हो सकेगा। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री PM नरेंद्र मोदी एक सादे समारोह में यह रिपोर्ट जारी करेंगे।

 दिखे पहले से ज्यादा बाघ
– 2014 में 714 बीट में 308 बाघों की गणना हुई।
– 2018 में 1432बीट में 526 टाइगर देखे गए थे।
– 2022 की गणना में 2 हजार से ज्यादा बीट में बाघ देखे गए।

2018 में भी मिल चुका है टाइगर स्टेट का दर्जा
बाघों की गणना देश में प्रत्येक चार वर्ष में होती है। इस कार्य में स्थानीय वन विभाग के अमले के अलावा भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून एवं केंद्रीय वन मंत्रालय के विषय विशेषज्ञों की टीम भी गणना में शामिल होती है। यह गणना प्रत्येक राज्य में एक निश्चित पैरामीटर के तहत होती है।इसमें बाघों के पद चिन्ह व अन्य संकेतों को गणना का आधार बनाया जाता है। पिछली यानी 2018 की गणना में विभिन्न राज्यों में बाघों की संख्या इस प्रकार रही थी…

– मध्य प्रदेश      (526)

– कर्नाटक        (524)

– उत्तराखंड      (442)

– महाराष्ट्र        (312)

– तमिलनाडु    (264)

– केरल / असम 190-190

– उत्तर प्रदेश    (173)

– राजस्थान       (91)

– बंगाल           (88)

– आंध्र प्रदेश    (48)

– अरुणाचल प्रदेश   (29)

– बिहार          (31)

– ओडिशा      (28)

– छत्तीसगढ़   (19)

– झारखंड      (05)

– गोवा           (03)

 इस तरह देश में कुल 2,967 बाघ पाए गए थे।

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