झंडे की जंग में पत्थरों की बरसात, 800 से ज्यादा घायल,9 गंभीर; विधायक भी मैदान में

पांढुर्णा के गोटमार मेले में झंडे पर कब्जे को लेकर पत्थरबाजी हुई। 600 से ज्यादा लोग घायल हुए। चार को गंभीर चोट लगी। विधायक नीलेश उईके के भी पत्थर चलाने की बात सामने आई।

पांढुर्णा।

पांढुर्णा का पारंपरिक गोटमार मेला इस बार भी पत्थरबाजी के कारण सुर्खियों में है।

जाम नदी में झंडे पर कब्जे की होड़ के बीच पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष आमने-सामने हैं।

हालात ऐसे बने कि पत्थरों की चोट से 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

इनमें कई लोगों के सिर में गंभीर चोट आई है।

इनमें आधा दर्जन से अधिक की हालत गंभीर बताई जाती है।

इन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती किया गया है।

वहीं, चार खिलाड़ियों को गंभीर चोट के कारण बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

इसी बीच पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक नीलेश उईके के भी पत्थरबाजी में शामिल होने की बात सामने आई है।

यह दृश्य अब मेले की परंपरा के साथ राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है।

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चार लोगों को गंभीर चोट

पत्थरबाजी में कुछ लोगों को गंभीर चोट लगी।

बताया जाता है कि सावरगांव निवासी नितिन भादे (33) का पैर टूट गया।

वहीं, प्रह्लाद साहू (48) के कंधे की हड्डी टूट गई।

पांढुर्णा निवासी सचिन हाटेकर (39) के पैर में गंभीर चोट आई।

सावरगांव के संजय धारपुरे (30) के सिर और पैर में चोट लगी।

इसके बाद सचिन और संजय को इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया।

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इलाज के लिए 7 अस्थायी केंद्र

घायलों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था बढ़ाई है।

मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं।

वहीं, 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है।

इसके अलावा 22 एंबुलेंस तैनात हैं।

पहले मौके पर प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।

जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े अस्पताल भेजा जा रहा है।

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700 पुलिसकर्मी, ड्रोन से निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है।

मेला क्षेत्र में करीब 700 पुलिसकर्मी तैनात हैं।

साथ ही, CCTV और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

क्योंकि पत्थरबाजी के दौरान चोट लगने का खतरा लगातार बना रहता है।

 सदियों पुरानी परंपरा, लेकिन मौतों का इतिहास भी

गोटमार मेला पांढुर्णा की पुरानी परंपरा से जुड़ा है।

इसमें जाम नदी के बीच झंडा लगाने और उस पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी होती है।

हालांकि, यह परंपरा लंबे समय से विवादों में भी रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1955 से 2025 तक गोटमार के दौरान पत्थरबाजी में 13 लोगों की मौत हो चुकी है।

इसलिए हर साल सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ इस परंपरा को लेकर बहस भी तेज हो जाती है।

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