भोपाल।
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई नियुक्तियां संगठन के लिए चर्चा के साथ मुश्किलें भी लेकर आई हैं।
19 जिलों में अध्यक्षों और महामंत्रियों की घोषणा के बाद कई जगह विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
कहीं नवनियुक्त अध्यक्ष के परिवार से जुड़ा विवाद सामने आया है, तो कहीं पुराने निष्कासन के बावजूद जिम्मेदारी मिलने पर सवाल उठ रहे हैं।
कुछ जिलों में चयन प्रक्रिया और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी नाराजगी है।
बालाघाट, मंडला, नर्मदापुरम, सिवनी, इंदौर ग्रामीण और सागर की नियुक्तियां खास तौर पर चर्चा में हैं।
इन मामलों ने युवा मोर्चा की चयन प्रक्रिया और संगठनात्मक संतुलन पर बहस छेड़ दी है।

बालाघाट: नियुक्ति के बाद पारिवारिक विवाद थाने पहुंचा

(पूजा गांधी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची।)
बालाघाट में अमन गांधी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पारिवारिक विवाद चर्चा में आ गया।
उनकी भाभी पूजा गांधी ने 30 अक्टूबर को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में अमन गांधी, उनके ससुर और अन्य परिजनों पर मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने अपने पति और छह वर्षीय बच्चे की सुरक्षा की मांग भी की है।
पूजा गांधी का आरोप है कि घटना के समय मारपीट करने वाले लोग शराब के नशे में थे।
इस परिवार से जुड़ी शिकायत पहले भी अगस्त में दर्ज होने की बात सामने आई है।
इस घटनाक्रम के बाद नई नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
मंडला: थार की मांग के आरोपों के बीच मिली जिम्मेदारी

(उत्कर्ष यादव के खिलाफ गत जून में दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज हुआ।)
मंडला में उत्कर्ष यादव को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर भी विवाद सामने आया है।
उनकी पत्नी ने जून 2026 में दहेज प्रताड़ना की FIR दर्ज कराई थी।
यह मामला लखनादौन थाने में दर्ज हुआ था।
शिकायत में उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के तीन सदस्यों पर आरोप लगाए गए हैं।
पत्नी के मुताबिक, मार्च 2026 में विवाह के दौरान उनके पिता ने अपनी क्षमता के अनुसार गृहस्थी का सामान दिया था।
लेकिन बाद में ससुराल पक्ष की ओर से थार गाड़ी की मांग की जाने लगी।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
अब जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद यह पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।
आरोपों की सत्यता का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगा।
नर्मदापुरम: छह साल का निष्कासन, फिर जिलाध्यक्ष की कुर्सी

नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी की नियुक्ति सबसे ज्यादा चर्चा में है।
उन्हें वर्ष 2023 में पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया था।
विवाद तत्कालीन इटारसी नगर मंडल अध्यक्ष अभिषेक निर्मल की नियुक्ति को लेकर हुआ था।
आरोप था कि कुलदीप और उनके साथियों ने विरोध के दौरान मारपीट की थी।
पुलिस ने इस मामले में प्रकरण दर्ज किया था।
इसके बाद तत्कालीन जिला अध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने कुलदीप को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
यह अवधि 2029 तक बताई गई थी।
अब करीब साढ़े तीन साल में उनकी वापसी और सीधे जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जाता है कि संबंधित घटना में कुलदीप का नाम गलत तरीके से जोड़ा गया था।
करीब डेढ़ महीने में ही वे दोषमुक्त हो गए थे। इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी हो गई थी।
सिवनी: पैनल को दरकिनार करने का आरोप

सिवनी में योगेश शिवहरे को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन के भीतर नाराजगी सामने आई है।
आरोप है कि जिला स्तर पर कोर ग्रुप की सहमति से जो पैनल तैयार किया गया था, उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
इसी पैनल में शामिल नामों को लेकर पहले से सहमति होने की बात कही जा रही है।
इसके बावजूद योगेश शिवहरे को जिम्मेदारी मिलने से कुछ युवा नेताओं में असंतोष है।
अब इस नियुक्ति को लेकर प्रदेश संगठन की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इंदौर ग्रामीण: लगातार तीसरी बार एक ही समाज को मौका?
इंदौर ग्रामीण में अजय सिंह पंवार को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
उनकी नियुक्ति के बाद सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठने लगा है।
कुछ नेताओं की आपत्ति है कि लगातार तीसरी बार राजपूत समाज से अध्यक्ष बनाया गया है।
उनका कहना है कि संगठन में दूसरे समाजों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
इसके अलावा दावेदारों की उम्र और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं।
सांवेर, महू, राऊ और बेटमा क्षेत्र के नेताओं ने भी दावेदारी की थी।
विजेंद्र जाट ने सामाजिक संतुलन और अपनी दावेदारी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
इस विवाद ने नियुक्तियों में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की बहस को फिर सामने ला दिया है।
सागर: आयकर कार्रवाई से जुड़े परिवार की नियुक्ति चर्चा में

(जसवंत राठौर)
सागर में जसवंत राठौर को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके परिवार से जुड़ी पुरानी आयकर कार्रवाई भी चर्चा में है।
5 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने पूर्व भाजपा विधायक हरवंश सिंह राठौर के आवास सहित तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी।
यह कार्रवाई बीड़ी कारोबार, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच से संबंधित थी।
जसवंत राठौर के खिलाफ इस कार्रवाई में सीधे तौर पर किसी कार्रवाई का उल्लेख सामने नहीं आया है।
इसके बावजूद परिवार से जुड़ी पुरानी कार्रवाई उनकी नियुक्ति के बाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
नियुक्तियों से संगठन के सामने नई चुनौती
भाजयुमो की नई नियुक्तियों के बाद सामने आए ये मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं।
कहीं पुलिस में शिकायत दर्ज है, कहीं पुराना संगठनात्मक विवाद है और कहीं चयन प्रक्रिया पर असंतोष है।
इन सभी मामलों को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा।
FIR में दर्ज आरोप दोषसिद्धि नहीं होते।
इसी तरह किसी परिवार से जुड़ी जांच को संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
फिर भी इन घटनाओं ने संगठन के सामने कुछ अहम सवाल खड़े किए हैं।
क्या नियुक्तियों से पहले दावेदारों की पृष्ठभूमि की पर्याप्त पड़ताल हुई?
स्थानीय संगठन की राय को क्या उचित महत्व मिला?
सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन का क्या ध्यान रखा गया?
नई टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन विवादों से आगे बढ़कर संगठन को सक्रिय और एकजुट रखना है।
आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व का रुख इन नियुक्तियों के भविष्य और संगठन के भीतर असंतोष की दिशा तय कर सकता है।
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