“महर्षि महेश योगी वैदिक विवि की शिकायतों पर दूसरी बार निर्देश; सवाल—पहले जांच समिति क्यों नहीं बनी?”
भोपाल(9826019364)।
उच्च शिक्षा विभाग में मंत्री के निर्देशों के पालन पर सवाल उठे हैं।
एक निजी विश्वविद्यालय की जांच के लिए दूसरी बार नोटशीट लिखनी पड़ी है।
मामला महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय से जुड़ा है।
आरोप है कि चार महीने पहले भी जांच के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, अब तक जांच समिति गठित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
अब उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने नई शिकायत को भी पुराने प्रकरणों के साथ जोड़कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
पुरानी शिकायत, नया निर्देश

सागर निवासी सुधाकर सिंह राजपूत ने विश्वविद्यालय के कामकाज को लेकर मंत्री से शिकायत की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अपने अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत काम कर रहा है।
शिकायत में उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
साथ ही, दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी उठाई गई है।
इसके बाद मंत्री परमार ने अपनी टीप में इस शिकायत को पूर्व की शिकायतों के साथ शामिल करने को कहा है।
उन्होंने समान कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
चार महीने पहले भी जांच की बात

सूत्रों के अनुसार, करीब चार महीने पहले भी मंत्री परमार ने विभाग को जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए थे।
मंत्री के नए निर्देश में भी पूर्व के आदेश का उल्लेख बताया जा रहा है।
इससे विभागीय स्तर पर पुराने निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों का दावा है कि अब तक न तो समिति गठित हुई और न जांच आगे बढ़ी।
हालांकि, विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
विश्वविद्यालय पर पहले भी उठते रहे सवाल

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना 1995 में पारित एक पृथक अधिनियम के तहत हुई थी।
बाद में 1999 में इससे संबंधित संशोधित अधिनियम भी पारित किया गया।
विश्वविद्यालय के कामकाज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
इस मुद्दे पर विधानसभा सत्रों में भी प्रश्न सामने आते रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यूजीसी ने विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया हुआ है।
हालांकि, मौजूदा शिकायत की जांच के दौरान इन बिंदुओं की भी तथ्यात्मक पुष्टि की जाएगी।
विधायक भी जता चुके हैं नाराजगी

विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में विभाग की भूमिका को लेकर कुछ विधायक भी सवाल उठा चुके हैं।
बीते एक वर्ष में कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा, विवेक विक्की पटेल और मधु भगत ने विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखे थे।
विधायकों ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में सदन को भ्रामक या गलत जानकारी दी गई।
ये मामले विधानसभा की प्रश्न संदर्भ एवं आश्वासन समिति तक भी पहुंचे।
शिकायतकर्ता ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
सुधाकर सिंह राजपूत का कहना है कि उन्हें अब तक किसी जांच समिति की जानकारी नहीं दी गई है।
उनका बयान भी दर्ज नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्तर पर उनकी शिकायत को प्रमाणहीन बताकर नस्तीबद्ध कर दिया गया था।
राजपूत का दावा है कि उन्होंने शिकायतों के साथ दस्तावेज और तथ्यात्मक प्रमाण उपलब्ध कराए थे।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे जांच में सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को तैयार हैं।
विभागीय ओएसडी बोले-जानकारी जुटाएंगे

मंत्री के पूर्व निर्देशों पर विभागीय ओएसडी डॉ. जीआर गंगेले ने अनभिज्ञता जताई।
उन्होंने कहा कि संबंधित शाखा का प्रभार उन्हें कुछ दिन पहले मिला है।
अब वे जानकारी जुटाएंगे कि पूर्व में कोई जांच समिति बनाई गई थी या नहीं।
अब विभाग की इस पड़ताल के बाद साफ होगा कि मंत्री के पहले निर्देश पर क्या कार्रवाई हुई थी।
इस संबंध में महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के प्रभारी रजिस्ट्रार संदीप शर्मा से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
हालांकि, उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया और न ही व्हाट्सएप संदेश का जवाब दिया।
भविष्य में विश्वविद्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया या पक्ष सामने आता है तो उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
अब नजर जांच समिति और रिपोर्ट पर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच की प्रगति का है।
क्या पुरानी शिकायतों के लिए समिति बनी थी?
यदि नहीं, तो निर्देश के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब मंत्री के नए निर्देश के बाद विभाग को इन सवालों का जवाब देना होगा।
जांच समिति बनती है या मामला फिर फाइलों तक सीमित रहता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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