सीहोर/बुधनी। संवाददाता कन्हैया नाथ
बुधनी के लकड़ी के खिलौना कारोबार को बढ़ावा देने के लिए तैयार खिलौना क्लस्टर अब आवंटन प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है।
क्लस्टर में करीब 50 दुकानें तैयार होने की जानकारी है।
इनमें करीब 42 हितग्राहियों के नाम चिह्नित किए गए हैं।
अब कुछ स्थानीय कलाकार और कारोबारी आवंटन की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सभी पात्र हितग्राहियों के बीच दुकान का स्थान लॉटरी से तय किया जाए।
उनका तर्क है कि इससे फ्रंट, बीच और पीछे की दुकानों को लेकर उठ रहे सवाल खत्म हो सकते हैं।
साथ ही, किसी को पसंदीदा स्थान मिलने की आशंका भी दूर होगी।
दुकान का स्थान बना मुख्य मुद्दा

स्थानीय कलाकारों के अनुसार क्लस्टर में दुकानों की लोकेशन कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है।
फ्रंट की दुकान और पीछे की दुकान की पहुंच में अंतर हो सकता है।
इसी वजह से हितग्राही चाहते हैं कि दुकान का स्थान पहले से तय करने के बजाय लॉटरी कराई जाए।
पात्र सूची में शामिल सुजान विश्वकर्मा ने भी आवंटन प्रक्रिया स्पष्ट रखने की मांग की है।
उनका कहना है कि जब सभी हितग्राही पात्र हैं, तो सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी नामों की पर्चियां डालकर सार्वजनिक रूप से लॉटरी कराई जा सकती है।
इससे बाद में विवाद की स्थिति कम होगी।
कलाकारों ने नियम और मापदंड सार्वजनिक करने की मांग की
उमेश शर्मा ने दुकान आवंटन में फ्रंट, बीच और पीछे की दुकानों को लेकर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर अलग-अलग चर्चाएं हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि वास्तविक खिलौना कारोबारियों को पीछे की दुकानें मिलने की बात सामने आ रही है।
वहीं, कुछ अन्य लोगों को बेहतर स्थान मिलने की चर्चा है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में आवंटन का आधिकारिक आधार सामने आना जरूरी है।
दुकान की कीमत और मासिक शुल्क पर भी स्पष्टता की मांग
कलाकारों ने दुकान के लिए जमा राशि और मासिक शुल्क की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
उमेश शर्मा के मुताबिक, हितग्राहियों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए
कि दुकान के लिए कितनी राशि जमा करनी होगी।
इसके अलावा हर महीने कितना शुल्क देना होगा, यह भी बताया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि आवंटन और भुगतान से जुड़ी सभी शर्तें लिखित रूप में सामने आनी चाहिए।
42 हितग्राहियों के चयन पर भी सवाल

करीब 50 दुकानें तैयार होने और 42 हितग्राहियों के नाम सामने
आने के बाद चयन प्रक्रिया पर भी चर्चा शुरू हुई है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि इन नामों का चयन किस आधार पर किया गया।
क्या सभी आवेदकों की पात्रता की जांच हुई है?
साथ ही, लंबे समय से लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगरों को प्राथमिकता दी गई या नहीं,
यह भी स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
बुधनी की पहचान लकड़ी के पारंपरिक खिलौनों से जुड़ी है।
इसलिए कलाकारों का कहना है कि क्लस्टर का लाभ वास्तविक कारीगरों तक पहुंचना चाहिए।
ओवरब्रिज से प्रभावित पुराने दुकानदारों का मुद्दा भी सामने आया
दुकानों के आवंटन के बीच पुराने कारोबारियों का मामला भी सामने आया है।
रेलवे फाटक क्षेत्र में ओवरब्रिज निर्माण के दौरान कुछ दुकानदारों की दुकानें हटाई गई थीं।
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, उस समय प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की बात कही गई थी।
अब नई दुकानें तैयार होने के बाद प्रभावित कारोबारी जानना चाहते हैं
कि उनके लिए क्या प्रावधान किया गया है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार प्रभावित लोगों में विजय परते,
भानु प्रताप परते, भानु वर्मा, देशराज गुप्ता, मंगल सिंह, कुंज बिहारी वर्मा,
छगनलाल गढ़ेवाल, राजेश गढ़ेवाल, राजेश यादव, दीपक यादव, संजय पंजाबी,
दौलत वर्मा और नंदकिशोर यादव सहित अन्य लोग शामिल रहे हैं।
इनमें कई कारोबारी लंबे समय से लकड़ी के खिलौनों के कारोबार से जुड़े होने का दावा करते हैं।
राजनीतिक प्रभाव की चर्चा
आवंटन को लेकर कुछ स्थानीय लोगों की ओर से राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी की जा रही है।
कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि प्रभावशाली लोगों को बेहतर स्थान मिल सकता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप और आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।
व्यापारियों की मांग है कि प्रशासन पात्रता सूची और आवंटन के नियम सार्वजनिक करे।
इससे पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लॉटरी से विवाद खत्म करने का सुझाव
स्थानीय कलाकारों और कारोबारियों का कहना है कि यदि सभी 42 हितग्राही पात्र हैं,
तो दुकानों का स्थान लॉटरी से तय किया जा सकता है।
उनके मुताबिक, सभी हितग्राहियों की मौजूदगी में पर्चियां निकाली जाएं।
इससे फ्रंट या पीछे की दुकान को लेकर विवाद की संभावना कम होगी।
फिलहाल क्लस्टर से बुधनी के पारंपरिक लकड़ी खिलौना कारोबार को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
वहीं, आवंटन प्रक्रिया, हितग्राहियों के चयन और पुराने दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर उठे सवालों के जवाब का इंतजार है।
आवंटन के आधिकारिक नियम और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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