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भोपाल।
अगर आप सोमवार रात के बाद Ola, Uber या Rapido टैक्सी बुक करने की सोच रहे हैं, तो मुश्किल बढ़ सकती है।
भोपाल में एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े टैक्सी चालक हड़ताल पर चले गए हैं।
संयुक्त मोर्चे ने सोमवार रात 12 बजे से टैक्सी सेवाएं बंद करने का ऐलान किया है।
इसका असर शहर में चलने वाली करीब 3,500 टैक्सियों पर पड़ सकता है।
यात्रियों को ऑटो या दूसरे किराए के वाहनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
बेहतर होगा कि आप किसी वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कर लें,
ताकि वक्त पर गंतव्य पहुंच सकें।

किराया नहीं , व्यवस्था बदलने की मांग
चालक संगठनों का कहना है कि केवल किराया बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
उनकी मुख्य मांग किराया निर्धारण की सरकारी व्यवस्था लागू करना है।
ड्राइवरों के अनुसार मौजूदा आय से खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
ईंधन, बीमा, वाहन रखरखाव और किस्तों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
इसके साथ ही परिवार के खर्च को संभालना भी कठिन बताया गया है।
चालक संघ का कहना है कि पुरानी किराया प्रणाली ज्यादा व्यावहारिक थी।
पहले बेस फेयर, टाइम चार्ज और प्रति किलोमीटर भुगतान मिलता था।
अब अधिकतर मामलों में दूरी के आधार पर ही भुगतान किया जाता है।
19 अगस्त को धरना, सरकार को देंगे ज्ञापन

भोपाल टैक्सी चालक संघ और टैक्सी यूनियन कल्याण समिति ने संयुक्त मोर्चा बनाया है।
मोर्चा 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना-प्रदर्शन करेगा।
इसके बाद मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
संगठनों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है।
मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी
चालक संगठनों ने आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
उनका कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी।
एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी रोकने की मांग भी उठाई गई है।
ड्राइवरों के लिए उचित और स्थायी किराया व्यवस्था उनकी प्रमुख मांग है।
दो महीने पहले कटोरा लेकर किया था प्रदर्शन

टैक्सी चालकों ने करीब दो महीने पहले भी जोरदार प्रदर्शन किया था।
उस समय ड्राइवरों ने कटोरा लेकर प्रतीकात्मक विरोध किया था।
उन्होंने कंपनियों की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
अब मांगों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाकर दोबारा आंदोलन शुरू किया गया है।
यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
हड़ताल लंबी चली तो कैब बुकिंग मुश्किल हो सकती है।
विशेषकर देर रात और एयरपोर्ट यात्रियों को परेशानी बढ़ने की आशंका है।
यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था पहले से करनी पड़ सकती है।