रवि अवस्थी,भोपाल। बैरसिया विधानसभा सीट Berasia Assembly Constituency भोपाल जिले की एकमात्र आरक्षित सीट है।अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण पहले ही चुनाव से इसे अजा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया।मध्यप्रदेश गठन के साथ ही यह सीट अस्तित्व में आई। आजादी के बाद का पहला चुनाव यहां कांग्रेस के हरिकृष्ण सिंह ने जीता। इसके बाद यह पहले हिंदू महासभा, फिर जनसंघ और 80 के दशक बाद यह बीजेपी का गढ़ बन गई..
इस सिलसिले को तोड़ने में कांग्रेस को चार दशक लग गए..जब 1998 के चुनाव में जोधाराम गुर्जर यहां से विधायक बने..इसके बाद का दौर एक बार फिर बीजेपी का रहा और बीते दो दशक से वह इस सीट से लगातार जीत का परचम लहराती रही है । आगे कैसा रहेगा इस सीट के मतदाताओं का मिजाज,यह समझने से पहले जानते हैं इस सीट का अब तक का चुनावी सफर
हिंदू महासभा के जमाने से बीजेपी की जड़ें गहरी
बैरसिया क्षेत्र में बीजेपी की जड़ें जनसंघ व जनता पार्टी के समय से गहरीं हैं..इस सीट से पहला चुनाव हालांकि कांग्रेस ने जीता,लेकिन यह आजादी के पहले दशक का दौर था..तब तक हिंदू महासभा यहां अपना प्रभाव जमा चुकी थी..लिहाजा 1967 का अगला चुनाव में हिंदू महासभा के भैयालाल ने जीता..
जनसंघ प्रभावी हुआ तो हिंदू महासभा दो फाड़ हो चुकी थी..इसी जगह जनसंघ ने ली और 1967 में जनसंघ के लक्ष्मीनारायण शर्मा विधायक चुने गए.. 1972 के चुनाव में जनसंघ ने शर्मा के स्थान पर भोपाल के गौरीशंकर कौशल को अपना उम्मीदवार बनाया और पुन: चुनाव जीता..इसी बीच देश में करीब 21 माह देश में आपातकाल रहा..इस दौर में बैरसिया के मतदाताओं का मानस और मजबूत हुआ..
नतीजतन,1977 से 1993 तक यानी पांच चुनाव लगातार जनता पार्टी और 80 से बीजेपी ने जीते…उसकी जीत का यह सिलसिला 1998 में टूटा..जब कांग्रेस के जोधाराम गुर्जर ने भाजपा के लक्ष्मीनारायण शर्मा को 20 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी..
बैरसिया सीट से पांच बार विधायक रहे लक्ष्मीनारायण शर्मा के लिए 98 का चुनाव आखिरी साबित हुआ…बाद के चारों चुनाव बीजेपी ने ही जीते..लेकिन सदीपरिवर्तन के साथ ही बैरसिया में पीढ़ी परिवर्तन हो चुका था..2003 के चुनाव में बीजेपी के ही भक्तपाल,2008 में ब्रह्मानंद रत्नाकर और अब विष्णु खत्री बीते दो बार से इस सीट से विधायक हैं..देखा जाए तो 66 साल के लंबे सफर में कांग्रेस ने बैरसिया से सिर्फ दो बार जीत का स्वाद चखा,शेष 12 बार यह सीट विचारधारा विशेष के खाते में ही रही…
……………………………………………… बैरसिया से अब तक चुने गए विधायक एवं उनका दल
1957 हरिकृष्ण सिंह कांग्रेस
1962 भैयालाल हिंदू महासभा
1967 लक्ष्मी नारायण शर्मा जनसंघ
1972 गौरी शंकर कौशल जनसंघ
1977 गौरी शंकर कौशल जेएनपी
1980 से 1993 तक लक्ष्मी नारायण शर्मा बीजेपी
1998 जोधाराम गुर्जर कांग्रेस
2003 भक्त पाल सिंह भाजपा
2008 ब्रह्मानंद रत्नाकर भाजपा
2013 विष्णु खत्री भाजपा
2018 विष्णु खत्री भाजपा
…………………………………….. बैरसिया में ओबीसी का दबदबा
बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 34 हजार 024 मतदाता हैं… इस सीट पर गुर्जर यानी ओबीसी और एससी वोट बैंक काफी तगड़ा है…यहां करीब 36 प्रतिशत पिछडा वर्ग और 22 फीसदी अनुसूचित जाति के वोटर हैं…
सामान्य वर्ग के लगभग साढ़े 23 फीसदी मतदाताओं में सबसे ज्यादा (करीब 10 प्रतिशत) संख्या राजपूत मतदाताओं की है..जबकि मुस्लिम वोटर करीब साढ़े 9 फीसदी है…
ओबीसी की बात करें तो इनकी संख्या 55 हजार से अधिक है..जो चुनाव में हार.जीत को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं…सीट का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण है..इसके चलते खेती.किसानी से जुड़े मुद्दे ही यहां अहम हैं..
———————————– कुल मतदाता 2,34,024 गुर्जर ओबीसी 36 प्रतिशत अजा मतदाता 22 प्रतिशत सामान्य वोटर 23 प्रतिशत राजपूत 10 प्रतिशत मुस्लिम 9 प्रतिशत
……………………………………… मुददों पर विचारधारा हावी
राजधानी भोपाल से यह इलाका ज्यादा दूर नहीं इसके बावजूद यह क्षेत्र विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है… शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं हैं..बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है.. डॉक्टरों की कमी होने से ज्यादातर मरीज राजधानी में उपलब्ध सेवाओं पर निर्भर हैं..
बावजूद इसके चुनाव में आम समस्याओं से जुड़े ये विषय कभी बडा मुद्दा नहीं बन सके…विकास व बुनियादी सुविधाओं से अधिक यहां पार्टी व उसकी विचारधारा अहम रही..इसका लाभ बैरसिया सीट से भाजपा को मिलते रहा है..
नहीं उभर सका कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा
भाजपा के 18 वर्षों से अधिक समय से सत्ता में रहने से बीजेपी से टिकट के दावेदार इस सीट पर भी कम नहीं..लेकिन मौजूदा विधायक को लेकर भी क्षेत्र की जनता में कोई बड़ा विरोध नहीं है..ऐसे में माना जा रहा है कि विष्णु खत्री चुनाव लड़ने की हैट्रिक लगा सकते हैं..हालांकि भोपाल नगर निगम परिषद के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का नाम भी प्रमुख दावेदारों की सूची में है…
कांग्रेस को यहां से चुनाव जीते एक लंबा अरसा हो चुका है..इसके चलते उसका कोई बड़ा चेहरा यहां उभर नहीं सका…..पूर्व विधायक जोधाराम गुर्जर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते तीन साल पहले उस वक्त निष्कासित किया गया था जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और गुर्जर ने पार्टी के बागी विधायकों का साथ दिया था…इससे क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति का आकलन किया जा सकता है…