न्याला,सूडान ।
सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच एक बार फिर आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला के एक व्यस्त बाजार पर ड्रोन हमले में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई,
जबकि 113 लोग घायल बताए गए हैं।
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने इस हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है और
मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
यह हमला सोमवार, 26 अक्टूबर की शाम न्याला के डुमाया इलाके में स्थित तानकोंग बाजार में हुआ था।
घटना के समय बाजार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
बाजार में मची तबाही, 100 से ज्यादा लोगों की मौत
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स के मुताबिक, ड्रोन हमले ने बाजार में भारी तबाही मचाई।
संगठन ने कहा कि हमले में 100 से अधिक लोगों की जान गई और 113 लोग घायल हुए।
संगठन ने इस घटना की निंदा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है,
ताकि हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार पक्षों का पता लगाया जा सके।
न्याला दक्षिण दारफुर की राजधानी है और फिलहाल अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के नियंत्रण में है।
सूडान की सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 से संघर्ष जारी है।
अस्पताल में पहुंचे 36 शव, 150 घायलों का इलाज
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Médecins Sans Frontières यानी MSF) ने बताया कि
न्याला टीचिंग अस्पताल में 36 लोगों के शव पहुंचे थे।
अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 150 से अधिक घायल मरीजों का इलाज किया गया।
MSF के अनुसार, घायलों में कई लोगों को छर्रे लगने और गंभीर रूप से जलने जैसी चोटें आईं।
चिकित्सा कर्मियों ने घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया।
हालांकि, मृतकों और घायलों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।
इमरजेंसी लॉयर्स ने 100 से अधिक मौतों और 113 घायलों की जानकारी दी, जबकि
MSF ने अपने अस्पताल में पहुंचे शवों और इलाज कराए मरीजों के आंकड़े साझा किए हैं।
इसलिए अंतिम मृतक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सूडानी सेना पर आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार बताया है।
संगठन ने कहा कि नागरिकों से भरे बाजार पर हमला स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और
युद्ध के बीच उनकी मुश्किलें और बढ़ाता है।
हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र जांच और सभी उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।
किसी पक्ष पर जिम्मेदारी तय करने के लिए घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।
इस घटना ने संघर्षग्रस्त इलाकों में बाजारों, अस्पतालों और अन्य नागरिक ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सूडान में ड्रोन हमले क्यों बढ़ा रहे हैं चिंता?
सूडान में सेना और अर्धसैनिक RSF के बीच चल रहे संघर्ष में ड्रोन हमलों का इस्तेमाल बढ़ा है।
इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे और आबादी वाले क्षेत्रों के प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने भी संघर्ष में ड्रोन हमलों से नागरिकों को होने वाले नुकसान और आवश्यक सेवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है।
बाजारों, अस्पतालों, स्कूलों और विस्थापित लोगों के शिविरों जैसे स्थानों पर हमलों से आम नागरिकों के लिए भोजन,
चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
न्याला की ताजा घटना ने इन खतरों को फिर उजागर किया है।
खार्तूम में भी ड्रोन हमले के बाद बिजली संकट
सूडान की राजधानी खार्तूम और आसपास के इलाकों में भी एक अलग ड्रोन हमले के बाद बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
मंगलवार को ओमदुरमान के अल-मरखियात बिजली ट्रांसफॉर्मर स्टेशन पर हमले के बाद
राजधानी के बड़े हिस्सों में 12 घंटे से अधिक समय तक बिजली बाधित रही।
इसका असर अस्पतालों, बेकरी और पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा। एक बिजली कंपनी के अधिकारी ने
इस हमले के लिए RSF को जिम्मेदार बताया।
अधिकारी के अनुसार, राजधानी की बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि सूडान में जारी संघर्ष का असर केवल सीधे हमलों तक सीमित नहीं है,
बल्कि बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं।
सूडान में गृहयुद्ध से गहराया मानवीय संकट
सूडान में गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में सेना और RSF के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद शुरू हुआ था।
इसके बाद लड़ाई राजधानी खार्तूम से निकलकर देश के कई हिस्सों में फैल गई।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 3.4 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है।
दारफुर और कोर्डोफान जैसे क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा और अकाल के खतरे को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य आपूर्ति और बिजली-पानी
की व्यवस्था पर दबाव बढ़ने से आम लोगों की स्थिति लगातार कठिन बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग
न्याला बाजार पर हमले के बाद मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच और नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
जांच के जरिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ, इसमें किसकी जिम्मेदारी थी और
क्या अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हुआ। युद्ध के दौरान सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि
वे नागरिकों की सुरक्षा करें और मानवीय सहायता पहुंचाने में बाधा न डालें।