ओटावा: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता रोकने का फैसला किया है। कार्नी ने अमेरिकी प्रस्तावों में अंतिम समय पर किए गए बदलावों को अनुचित और कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह बताया।
कनाडा का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही समय बाद आया, जिसमें उन्होंने कनाडा के साथ व्यापार समझौते की उम्मीद जताई थी। दोनों देशों के बीच टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही थी।
अमेरिकी शर्तों से नाराज कनाडा
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मुताबिक, हाल की बातचीत में कुछ क्षेत्रों में प्रगति जरूर हुई, लेकिन कनाडा अपने प्रमुख आर्थिक लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका। कनाडा चाहता है कि उसके कारोबारियों को अमेरिका में टैरिफ-मुक्त बाजार पहुंच मिले, प्रमुख उद्योगों पर लगाए गए अमेरिकी शुल्क कम हों और छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार पिछले 18 महीनों से कनाडा की घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार साझेदारियों में विविधता लाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ निष्पक्ष समझौता कनाडा की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन मौजूदा अमेरिकी प्रस्ताव संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
इसके बाद कनाडाई वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया गया है।
‘डॉलर के बदले डॉलर’ टैरिफ का जवाब
कनाडा सरकार के अनुसार, अमेरिका लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में था। इसके जवाब में कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा भी बराबर जवाब देने के लिए तैयार है।
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका जितने मूल्य के कनाडाई सामान पर टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उसी के अनुरूप जवाबी शुल्क लगाने की नीति अपना सकता है। इसे उन्होंने ‘डॉलर के बदले डॉलर’ की रणनीति के तौर पर पेश किया।
अमेरिका पर निर्भरता घटाएगा कनाडा
कार्नी ने कहा कि कनाडा अब अन्य वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगा, ताकि अमेरिकी बाजार पर उसकी निर्भरता कम हो सके। कनाडा के मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों की पहुंच करीब 1.5 अरब उपभोक्ताओं तक बताई गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष के अंत तक इस पहुंच को दोगुना करना है।
इसके अलावा कनाडाई कर्मचारियों और कारोबारियों की मदद के लिए अतिरिक्त सरकारी कदम उठाने की भी बात कही गई है। सरकार पहले ही पिछले 18 महीनों में करीब 25 अरब कनाडाई डॉलर की सहायता दे चुकी है।
अमेरिका ने कनाडा पर लगाया पीछे हटने का आरोप
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कनाडा के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कनाडा ने इस सप्ताह की शुरुआत में तय शर्तों के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उसने कनाडा को अपने बाजार में बड़े निर्यातकों के लिए उपलब्ध सर्वोत्तम व्यापारिक वरीयता देने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, अमेरिका के अनुसार कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने के कारण बातचीत का संतुलन बिगड़ गया।
ट्रंप ने जताई थी समझौते की उम्मीद
कनाडा के फैसले से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्नी से बातचीत की है और दोनों देशों के संबंध अच्छे हैं।
ट्रंप ने अमेरिकी किसानों के हितों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि कनाडा के साथ समझौता आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों को डील करने में सक्षम होना चाहिए।
अब कनाडा द्वारा वार्ता रोकने और बराबर टैरिफ से जवाब देने की चेतावनी के बाद अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों में तनाव और बढ़ने की आशंका है।