भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस वर्ष 17 अगस्त का दिन विशेष महत्व का होगा। इस दिन सावन की तीसरी शाही सवारी, नागपंचमी और साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलने का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है। ऐसा संयोग करीब सात साल बाद देखने को मिलेगा।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 17 अगस्त को 8 से 10 लाख श्रद्धालु महाकाल मंदिर और नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आ सकते हैं। संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सावन की तीसरी सवारी का महत्व
सावन माह में भगवान महाकाल की शाही सवारी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। तीसरी सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और पूरे शहर में भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। इस बार नागपंचमी भी इसी दिन होने से श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर क्यों है खास?
महाकाल मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्षभर बंद रहता है और केवल नागपंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है। मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और नागराज के साथ विराजमान दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
प्रशासन की विशेष तैयारियां
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम कर रहा है। प्रमुख तैयारियों में शामिल हैं—
- अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती।
- दर्शन के लिए सुव्यवस्थित कतार और बैरिकेडिंग।
- यातायात व्यवस्था में विशेष बदलाव।
- चिकित्सा, पेयजल और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता।
- भीड़ प्रबंधन के लिए कंट्रोल रूम और निगरानी व्यवस्था।
प्रमुख बातें
- 17 अगस्त को सावन की तीसरी शाही सवारी और नागपंचमी एक साथ पड़ रही हैं।
- इसी दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट वर्ष में एकमात्र बार खुलेंगे।
- करीब सात साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है।
- प्रशासन ने 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान जताया है।
- सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।