मुरैना के सबलगढ़ क्षेत्र में सरकार औद्योगिक कॉरिडोर बनाने जा रही है, जिसके लिए 5000 किसानों की 2000 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। किसानों ने इसका विरोध किया है और 21 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि सरकार पहले से तय औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग नहीं लगा पाई है। इसके अलावा, चंबल नदी के किनारे औद्योगिक क्षेत्र बनाने से नदी का पानी दूषित होगा और किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी।
औद्योगिक कॉरिडोर की योजना
मुरैना के सबलगढ़ क्षेत्र में सरकार औद्योगिक कॉरिडोर बनाने जा रही है। इसके लिए 5000 किसानों की 2000 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।
किसानों ने इसका विरोध किया है और 21 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि सरकार पहले से तय औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग नहीं लगा पाई है।
किसानों की चिंताएं
किसानों का कहना है कि चंबल नदी के किनारे औद्योगिक क्षेत्र बनाने से नदी का पानी दूषित होगा और किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी।
इसके अलावा, किसानों को जमीन के शासकीय पट्टे मिले हैं और वे पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं।
औद्योगिक कॉरिडोर के प्रभाव
औद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण से चंबल नदी के जलीय जीवों को नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा, किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी और वे अपनी जमीन से वंचित हो जाएंगे।
- 5000 किसानों की 2000 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।
- चंबल नदी के किनारे औद्योगिक क्षेत्र बनाने से नदी का पानी दूषित होगा।
- किसानों को जमीन के शासकीय पट्टे मिले हैं और वे पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं।
निष्कर्ष
मुरैना के सबलगढ़ क्षेत्र में सरकार औद्योगिक कॉरिडोर बनाने जा रही है, जिसके लिए 5000 किसानों की 2000 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।
किसानों ने इसका विरोध किया है और 21 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसानों के अधिकार की लड़ाई में हमारी वेबसाइट आपके साथ है। मध्य प्रदेश समाचार के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें। औद्योगिक कॉरिडोर के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं।