उज्जैन।
सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के दुर्लभ संयोग ने उज्जैन को आस्था के विशाल केंद्र में बदल दिया।
महाकाल मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं।
वहीं,साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
महाकाल मंदिर में अब तक करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने वालों की संख्या करीब चार लाख पहुंच गई।
दोनों मंदिरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की ऊपरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
यह मंदिर सामान्य दिनों में बंद रहता है।
नागपंचमी के अवसर पर इसके पट वर्ष में केवल एक बार खोले जाते हैं।
इस कारण देशभर से श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
रविवार रात 12 बजे मंदिर के पट खोले गए। अगले 24 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिला।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव की विशेष प्रतिमा स्थापित है।
प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी के साथ नागों का स्वरूप दिखाई देता है।
यह मंदिर उज्जैन की धार्मिक परंपरा और नाग उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
नागपंचमी पर यहां दर्शन को विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
महाकाल के दर्शन के लिए रात से लगी कतारें

सावन सोमवार के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात से शुरू हो गई।
तड़के मंदिर के पट खोले गए।
भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।
इसके बाद दिनभर दर्शनार्थियों का लगातार पहुंचना जारी रहा।
प्रशासन ने महाकाल और नागचंद्रेश्वर मंदिर के लिए अलग व्यवस्थाएं कीं।
कई श्रद्धालुओं को दर्शन मार्ग पर करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
महाकाल की सवारी ने बढ़ाया धार्मिक उत्साह


नागपंचमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के कई शिव और नागदेवता मंदिरों में विशेष पूजा हुई।