ट्विशा शर्मा केस: CBI की दलीलों पर कोर्ट की मुहर, गिरिबाला सिंह को जमानत देने से इनकार

ट्विशा शर्मा मौत मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और जांच प्रभावित होने की आशंका को प्रमुख आधार माना।

भोपाल।
राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में विशेष अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया।

कोर्ट ने मामले की मुख्य आरोपी व पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले आधा दर्जन से ज्यादा जजों ने उनके केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

                                                                                                  (गिरिबाला सिंह की मृतक बहू ट्विशा शर्मा)

 

गंभीर आरोपों के चलते नहीं मिली राहत

पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों की गंभीरता और जांच पर संभावित प्रभाव को महत्वपूर्ण मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शनिवार शाम सुनाए गए आदेश में विशेष अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति गंभीर है।

इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।

महिला होने और उम्र का दिया गया था हवाला

(आरोपी सास गिरिबाला सिंह व उसका बेटा व ट्विशा का ​पति समर्थ सिंह)

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह वरिष्ठ नागरिक हैं।

वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं ।

उन्हें मानवीय आधार पर उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। यह भी कहा गया कि उनकी लगभग 100 वर्षीय मां उनकी देखभाल पर निर्भर हैं।

बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है ।

वह आर्थिक रूप से सक्षम होने के कारण दहेज मांगने का आरोप तर्कसंगत नहीं है।

CBI ने जताई जांच प्रभावित होने की आशंका

CBI ने जमानत का कड़ा विरोध करते किया।

जांच एजेंसी ने कहा कि केवल महिला होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इस मामले में मृतका भी महिला थी।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी पर जांच को प्रभावित करने के प्रयासों के आरोप हैं ।

जमानत मिलने पर गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्वास्थ्य और जांच को लेकर दोनों पक्षों में बहस

बचाव पक्ष ने जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न मिलने की बात कही।

जबकि अभियोजन ने जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश कर स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई।

CBI ने यह भी उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय पहले अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है।

जांच के दौरान आरोपी द्वारा वॉयस सैंपल देने से इनकार किए जाने का भी हवाला दिया।

महिला जज ने खुद को सुनवाई से अलग किया

जमानत आवेदन पहले विशेष न्यायाधीश नीलम शुक्ला की अदालत में पेश हुआ था।

उन्होंने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया।

इसके बाद मामला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया।

जहां विस्तृत सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।