रिश्तों का पतन! नाना ने नाती को दफनाया, मामी ने भांजे की ली जान

बालाघाट में लोकलाज के डर से नवजात को जिंदा दफनाया, सिंगरौली में अवैध रिश्ते के अंत के लिए भांजे की हत्या; दो घटनाओं ने सामाजिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

“मध्यप्रदेश के बालाघाट और सिंगरौली से आई दो अलग-अलग घटनाओं ने रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक संवेदनाओं पर गहरा सवाल खड़ा किया है। एक जगह अविवाहित बेटी की संतान होने का राज छिपाने के लिए नाना ने अपने ही नाती को जिंदा दफना दिया, जबकि दूसरी जगह प्रेम संबंध और शादी के दबाव के बीच मामी ने अपने ही भांजे की हत्या कर दी। बदलते सामाजिक परिवेश में रिश्तों की मर्यादाएं टूटने और नैतिक मूल्यों के क्षरण की ये घटनाएं समाज के लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई हैं।”

बालाघाट/सिंगरौली।

मध्यप्रदेश के दो जिलों से सामने आई घटनाओं ने रिश्तों की गरिमा को झकझोर दिया।

दोनों मामलों में परिवार के सबसे भरोसेमंद रिश्ते ही हत्या के आरोपी बने।

पहली घटना बालाघाट के वारासिवनी क्षेत्र की है।

यहां अविवाहित बेटी की संतान होने का राज छिपाने के लिए नाना ने नवजात नाती को गोबर के ढेर में जिंदा दफना दिया।

घटना के बाद उसने खुद भी कीटनाशक पी लिया।

उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

दूसरी घटना सिंगरौली के मोरवा थाना क्षेत्र की है।

यहां रिश्ते में मामी लगने वाली महिला ने अपने ही भांजे की दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या कर दी।

पुलिस के अनुसार दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे।

युवक लगातार शादी का दबाव बना रहा था।

बालाघाट: रोने की आवाज से खुला राज

ग्रामीणों ने रात में नवजात के रोने की आवाज सुनी।

परिवार के जवाब संतोषजनक नहीं मिले।

इसके बाद सरपंच और आशा कार्यकर्ता ने पुलिस को सूचना दी।

बारिश और अंधेरे के कारण शव अगले दिन निकाला गया।

नवजात के मुंह और गले में कपड़ा बंधा मिला।

पुलिस हत्या की आशंका के आधार पर जांच कर रही है।

सिंगरौली: हत्या को हादसा दिखाने की कोशिश

पुलिस जांच में तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ के बाद महिला पर संदेह हुआ।

उसने पूछताछ में हत्या स्वीकार कर ली।

पुलिस के अनुसार हत्या के बाद शव कार की ड्राइविंग सीट पर रख दिया गया।

उद्देश्य सड़क हादसे का रूप देना था।

आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।

टूटती मर्यादाएं बढ़ा रहीं चिंता

विशेषज्ञ मानते हैं कि पारिवारिक संवाद की कमी, सामाजिक दबाव और नैतिक मूल्यों का क्षरण कई बार रिश्तों को अपराध की ओर धकेल देता है।

रिश्ते विश्वास, सुरक्षा और संवेदनाओं की नींव होते हैं।

जब वही रिश्ते हिंसा और अपराध का माध्यम बन जाएं, तब यह केवल कानूनी नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक संकट भी बन जाता है।

दोनों घटनाएं याद दिलाती हैं कि समस्याओं का समाधान अपराध नहीं, संवाद, सामाजिक सहयोग और संवेदनशीलता में है।