सब्जियां बेचीं, ई-रिक्शा चलाया… अब कॉमनवेल्थ में तिरंगा लहराया: झंडू कुमार ने भारत को दिलाया पहला पदक

बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम की लिफ्ट के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज जीतकर भारत का पदक खाता खोला। उनका संघर्ष से सफलता तक का सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना।

“ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स में शनिवार को भारत ने अपने पदकों का खाता खोला।

बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम की सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

उनकी इस सफलता पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी।”

ग्लासगो।
स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले ग्लासगो में भारत का तिरंगा आज शान से फहराया गया।

मौका था,कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के नाम आए पहले पदक का।

इसे किसी बड़े नामधारी ने नहीं,बल्कि संघर्षों से लड़कर आगे बढ़े बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया।

झंडु कुमार ने पुरुष हेवीवेट वर्ग में 190 किलोग्राम की सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

इसी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पदकों का खाता खुला। झंडुकुमार की यह सफलता सिर्फ उनके खेल की नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों पर हौसले की जीत भी बन गई।

 

190 किलोग्राम की लिफ्ट से ब्रॉन्ज पर कब्जा

28 वर्षीय झंडू कुमार ने ग्रुप-बी में दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन उठाकर 130.9 अंक हासिल किए।

तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम उठाकर बर्मिंघम 2022 का गेम्स रिकॉर्ड तोड़ने की असफल कोशिश की।

इसके बावजूद उनका प्रदर्शन ब्रॉन्ज मेडल के लिए पर्याप्त रहा।

नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने गोल्ड और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने सिल्वर मेडल जीता।

सड़क किनारे सब्जियां बेचने से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

बिहार के नालंदा जिले के हरनौत निवासी झंडू कुमार बचपन से पोलियो से प्रभावित रहे।

आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने पिता के साथ सड़क किनारे आलू-प्याज बेचे ।

कोविड-19 के दौरान परिवार का सहारा बनने के लिए ई-रिक्शा भी चलाया।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेल का सपना नहीं छोड़ा।

आज उसी संघर्ष ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पहला पदक विजेता बना दिया।

ई-रिक्शा बेचकर खेला नेशनल, वहीं से बदली जिंदगी

2023 की राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए झंडू ने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया।

प्रतियोगिता में वे सफल लिफ्ट नहीं लगा सके। इसी बीच उनकी प्रतिभा पर पैरालिंपिक पदक विजेता राजिंदर सिंह राहेलू की नजर पड़ी।

इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के प्रशिक्षण केंद्र में उन्हें मौका मिला ।

इस तरह झंडुकुमार का करियर नई दिशा में आगे बढ़ा।

अब पैरालिंपिक पर नजर

2017 में पैरा एथलेटिक्स से खेल यात्रा शुरू करने वाले झंडू ने बाद में पावरलिफ्टिंग को अपनाया।

उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और विश्व कप तथा एशियन-ओशिनिया चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।

अब ,उनका अगला लक्ष्य लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।

अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन

पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में सुधीर 183 किलोग्राम की लिफ्ट के साथ छठे स्थान पर रहे।

जबकि ,महिला हेवीवेट वर्ग में कस्तूरी राजामणि तीनों प्रयासों में सफल लिफ्ट दर्ज नहीं कर सकीं। दूसरी ओर, बॉक्सिंग में जादुमणि सिंह ने जीत दर्ज की।

इसके साथ ही उन्होंने राउंड ऑफ-16 में प्रवेश किया। वहीं, लॉन बॉल्स में पुतुल सोनोवाल ने लगातार दूसरी जीत हासिल की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर झंडू कुमार को बधाई दी।

उन्होंने लिखा— यह उपलब्धि अटूट संकल्प,कठिन परिश्रम और अनुशासन का परिणाम है।

मोदी ने लिखा कि झंडू ने हर चुनौती को पार कर देश का गौरव बढ़ाया है।

इस तरह,वह लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं।

 

मां के एक वाक्य ने बनाया पदक विजेता

झंडू कुमार के लिए सबसे बड़ी ताकत उनकी मां कमला देवी के वे शब्द बने, जो मुकाबले से ठीक पहले व्हाट्सऐप कॉल पर उन्होंने बेटे से कहे थे।

मां ने सिर्फ एक बात कही—”बेटा, वहां तक पहुंच ही गए हो तो देश का तिरंगा फहराकर आना।

पहला, दूसरा या तीसरा… कोई भी स्थान लेकर लौटना।

” यही संदेश झंडू के लिए जीत का संकल्प बन गया।

जीत के बाद सबसे पहला फोन मां को

ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद झंडू कुमार ने सबसे पहले अपनी मां को फोन लगाया।

भावुक आवाज में उन्होंने कहा, “तोहनी के आशीर्वाद से जीत गई लो मइया” ।

बेटे की यह बात सुनकर पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

पूरा परिवार बना हौसले की ताकत

झंडू के बड़े भाई कुंदन कुमार के अनुसार, मुकाबले से एक रात पहले झंडू ने घर पर फोन कर सभी का आशीर्वाद लिया था।

परिवार के हर सदस्य ने उन्हें “विजयी भव” कहकर शुभकामनाएं दीं।

इसके बाद मां ने तिरंगा फहराने की बात दोहराई, जिसने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया।

मां ने रातभर जागकर देखा मुकाबला

मां कमला देवी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने पूरी रात जागकर बेटे का मुकाबला देखा।

उन्होंने कहा, “रात भर जागकर देखलियो कि बाबू देश का नाम रोशन कईलन।”

उनके लिए यह सिर्फ बेटे की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान का पल था।

झुन्नू से ‘झंडू’ बनने की कहानी

कमला देवी ने बताया कि बेटे का असली नाम झुन्नू रखा गया था।

समय के साथ परिवार और गांव के लोग उन्हें प्यार से झंडू कहने लगे।

यही नाम अब कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता के रूप में पूरी दुनिया में पहचान बना चुका है।