पेट्रोल का विकल्प बन सकता है एथेनॉल! 100% ब्लेंडेड फ्यूल वाली कारों को मंजूरी

नई दिल्ली।

भारत में कार चलाने का तरीका भविष्य में बदल सकता है। अब ऐसी कारों का रास्ता खुल गया है,

जो 100% एथेनॉल से चल सकेंगी। केंद्र सरकार ने E100 फ्यूल से चलने वाले वाहनों के लिए नियमों में बदलाव किया है।

एथेनॉल गन्ने और मक्का जैसी फसलों से बनाया जाता है।

इसका इस्तेमाल पेट्रोल के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर कार में एथेनॉल डाला जा सकेगा।

इसके लिए खास इंजन और तकनीक से बनी गाड़ियों की जरूरत होगी।

मौजूदा पेट्रोल कारों में यह ईंधन इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

आखिर E100 फ्यूल क्या है? क्या इससे पेट्रोल का खर्च घटेगा? क्या पुरानी कारों में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा?

जानिए 9 आसान सवाल-जवाब में।

1. सरकार ने क्या मंजूरी दी है?

                          (भारत सरकार की ओर से जारी अधिसूचना।)

केंद्र सरकार ने 100% एथेनॉल यानी E100 फ्यूल से चलने वाले वाहनों के लिए नियमों में बदलाव किया है।

इसके तहत ऐसी गाड़ियों की टेस्टिंग और प्रमाणन का रास्ता साफ हुआ है। ये गाड़ियां खास तकनीक से बनाई जाएंगी।

इसका मतलब है कि भविष्य में कार खरीदने वालों को पेट्रोल के अलावा एक और विकल्प मिल सकता है।

2. E100 फ्यूल क्या है? यह पेट्रोल से कैसे अलग है?

E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग पूरा हिस्सा एथेनॉल का होता है। इसमें पेट्रोल मिलाना जरूरी नहीं होता।

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। इसे गन्ने के रस, शीरे और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है।

वहीं, पेट्रोल कच्चे तेल को रिफाइन करके तैयार किया जाता है।

आसान भाषा में समझें: पेट्रोल के लिए भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से खरीदना पड़ता है।

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एथेनॉल देश में उगाई जाने वाली फसलों से भी बनाया जा सकता है।

हालांकि, एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्याप्त कच्चा माल, पानी और बेहतर उत्पादन व्यवस्था की जरूरत होगी।

3. क्या मौजूदा पेट्रोल कारों में E100 डाला जा सकता है?

नहीं। सामान्य पेट्रोल पर चलने वाली कारों में सीधे E100 इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसके लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और दूसरे जरूरी हिस्सों को खास तरीके से तैयार करना पड़ता है।

सरकार की मंजूरी का मतलब भी यही है कि E100 के अनुकूल गाड़ियों को नियमों के तहत अनुमति मिल सकेगी।

ध्यान रखें: अपनी मौजूदा कार में बिना निर्माता की मंजूरी के E100 या E85 इस्तेमाल न करें।

इससे इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान हो सकता है।

4. क्या अब पेट्रोल कारों की जगह एथेनॉल वाली कारें आएंगी?

फिलहाल ऐसा नहीं है। एथेनॉल से चलने वाली कारों को एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

पेट्रोल कारें भी चलती रहेंगी।

इलेक्ट्रिक वाहन और CNG कारें भी अपने-अपने स्थान पर उपलब्ध रहेंगी।

भविष्य में किस तकनीक की मांग ज्यादा होगी,

यह उसकी कीमत, ईंधन की उपलब्धता और इस्तेमाल के खर्च पर निर्भर करेगा।

5. फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या होती है?

फ्लेक्स-फ्यूल कार को अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किया जाता है।

इसमें खास इंजन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे होते हैं।

ये सिस्टम ईंधन में एथेनॉल की मात्रा के अनुसार इंजन के काम करने के तरीके को नियंत्रित करते हैं।

उदाहरण के लिए, E85 में लगभग 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है।

E100 में लगभग पूरा ईंधन एथेनॉल होता है।

हालांकि, हर फ्लेक्स-फ्यूल कार E100 पर चलने में सक्षम हो, यह जरूरी नहीं है।

इसकी क्षमता वाहन के डिजाइन और प्रमाणन पर निर्भर करेगी।

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6. क्या एथेनॉल वाली कार चलाने का खर्च कम होगा?

इसका जवाब अभी सीधे हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता।

एथेनॉल की कीमत कम होने पर ईंधन का खर्च घट सकता है।

लेकिन केवल प्रति लीटर कीमत देखना काफी नहीं होगा।

एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर कम ऊर्जा होती है।

इसलिए समान दूरी तय करने के लिए इसकी ज्यादा मात्रा लग सकती है।

कार खरीदने से पहले तीन बातें देखना जरूरी होगा:

E100 की प्रति लीटर कीमत कितनी है?

एक लीटर ईंधन में कार कितनी दूरी तय करती है?

एथेनॉल वाली कार की कीमत सामान्य कार से कितनी अलग है?

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि आम लोगों को वास्तविक बचत कितनी होगी।

7. क्या E100 कारों के लिए अलग पेट्रोल पंप होंगे?

E100 कारों को चलाने के लिए एथेनॉल की उपलब्धता जरूरी होगी।

इसके लिए ईंधन की सप्लाई, भंडारण और वितरण की व्यवस्था विकसित करनी होगी।

पेट्रोल पंपों पर E100 की उपलब्धता कितनी होगी, यह भविष्य की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

अगर ईंधन आसानी से उपलब्ध नहीं हुआ, तो ऐसी कार खरीदने वालों को परेशानी हो सकती है।

इसलिए वाहन खरीदने से पहले अपने शहर में E100 की उपलब्धता की जानकारी लेना जरूरी होगा।

8. इससे देश और किसानों को क्या फायदा हो सकता है?

एथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से देश को कई संभावित फायदे हो सकते हैं।

पहला फायदा: कच्चे तेल के आयात में कमी।
अगर पेट्रोल की जगह घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ता है,

तो कच्चे तेल की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है।

दूसरा फायदा: किसानों के लिए बाजार।
गन्ने, मक्का और अन्य उपयुक्त कृषि उत्पादों से एथेनॉल बनाया जा सकता है।

इससे इन फसलों की मांग बढ़ने की संभावना है।

तीसरा फायदा: प्रदूषण में कमी की संभावना।

एथेनॉल का इस्तेमाल जीवाश्म ईंधन की खपत घटाने में मदद कर सकता है।

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हालांकि, इसका वास्तविक पर्यावरणीय लाभ उत्पादन के तरीके,

खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों और इंजन के उत्सर्जन पर भी निर्भर करेगा।

इसलिए एथेनॉल को प्रदूषण का पूरी तरह खत्म करने वाला समाधान मानना सही नहीं होगा।

9. क्या दूसरे देशों में भी एथेनॉल से चलने वाली कारें हैं?

हां। अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

ब्राजील में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन और उसका वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है।

भारत में भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।

अब E100 के अनुकूल वाहनों के लिए नियमों में बदलाव से इस दिशा में एक और विकल्प खुला है।

हालांकि, भारत में ऐसी कारों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इनकी कीमत कितनी होगी,

ईंधन कहां मिलेगा और इन्हें चलाना कितना किफायती होगा।

आम आदमी के लिए सबसे जरूरी बात

E100 कारों को मंजूरी मिलने से अभी पेट्रोल कार मालिकों को अपनी गाड़ी बदलने की जरूरत नहीं है।

न ही सामान्य पेट्रोल कार में सीधे E100 डालना चाहिए।

यह बदलाव भविष्य में वाहन खरीदने वालों के लिए एक नया विकल्प तैयार कर सकता है।

लेकिन इसे बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले ईंधन की कीमत, उपलब्धता और गाड़ियों की माइलेज का आकलन जरूरी होगा।

असली सवाल यही है कि क्या एथेनॉल से चलने वाली कारें पेट्रोल का खर्च कम कर पाएंगी?

इसका जवाब तकनीक के साथ-साथ ईंधन की कीमत और उपलब्धता तय करेगी।

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