दूसरों को ट्रैप करने वाले खुद ट्रैप! CBN इंस्पेक्टर रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार

सिराज खान,नीमच/भोपाल।

(7869222020/9826019364)

नीमच के केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) में कथित रिश्वतखोरी का मामला अब जांच के घेरे में है।

इस मामले में CBN इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव को CBI ने गिरफ्तार किया है।

मामला एक ड्रग कार्रवाई से जुड़ा बताया जा रहा है।

आरोप है कि एक व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाने के बदले 50 लाख रुपए की मांग की गई थी।

बाद में कथित तौर पर 20 लाख रुपए में सौदा तय हुआ।

इसी बीच 4 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।

खास बात यह है कि रकम सीधे इंस्पेक्टर के खाते में नहीं गई।

बताया जा रहा है कि इसे उनके रिश्तेदार के खाते में भेजा गया।

यहीं से डिजिटल ट्रांजैक्शन जांच की अहम कड़ी बन गया।

50 लाख की मांग, 20 लाख में सौदा?

CBI से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पटना निवासी आलोक सिन्हा से कथित तौर पर 50 लाख रुपए मांगे गए थे।
बातचीत के बाद रकम घटाकर 20 लाख रुपए किए जाने का आरोप है।

इसके बाद 10 लाख रुपए एडवांस देने की बात सामने आई।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर पहले 4 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए।

यह रकम CBN इंस्पेक्टर के रिश्तेदार संतोष कुमार सुमन के खाते में भेजे जाने की बात कही गई है।

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इसके बाद शिकायत पटना CBI तक पहुंची।

CBI ने जांच के बाद 10 सितंबर को मामला दर्ज किया।

फिर टीम ने नीमच में दबिश दी।

छापे से गिरफ्तारी तक पहुंची जांच

CBI ने CBN अधिकारी के परिसर में तलाशी ली।

इस दौरान फाइलें, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जांच के दायरे में लिए गए।

साथ ही, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड भी खंगाले गए।

इसके बाद सिद्धार्थ श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।

अदालत ने 14 सितंबर तक ट्रांजिट रिमांड मंजूर की है।

अब CBI उन्हें पटना ले जाकर पूछताछ करेगी।

अब अफीम किसानों की शिकायतों पर भी नजर?

CBI की कार्रवाई के बीच अफीम किसानों से कथित अवैध वसूली के आरोपों ने भी सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि अफीम पट्टा, नामांतरण और अन्य प्रक्रियाओं में किसानों से अवैध रकम मांगी जाती है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

वहीं, किसानों का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया में मुखिया की भूमिका का कुछ लोग कथित तौर पर गलत फायदा उठाते हैं।

नियमों के मुताबिक, मुखिया की जिम्मेदारियों में अफीम उत्पादन का रिकॉर्ड रखना, कच्ची तौल और नपती जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।

लेकिन आरोप है कि कुछ लोग अधिकारी का डर दिखाकर किसानों से अतिरिक्त रकम मांगते हैं।

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अब बड़ा सवाल यही है कि CBI की मौजूदा जांच सिर्फ इस कथित रिश्वत मामले तक सीमित रहेगी

या अफीम किसानों से जुड़ी कथित वसूली की शिकायतों की भी जांच होगी।

जांच में सामने आ सकते हैं और नाम

फिलहाल CBI की जांच जारी है।

पूछताछ में कथित लेन-देन की पूरी कड़ी सामने आ सकती है।

साथ ही, यह भी साफ होगा कि रकम लेने के आरोप में केवल इंस्पेक्टर की भूमिका थी या अन्य अधिकारी और बिचौलिए भी जुड़े थे।

हालांकि, रिश्वतखोरी और अवैध वसूली से जुड़े आरोप जांच के विषय हैं।

अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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