भोपाल।
भोपाल के रिहायशी इलाकों में कारोबार के खिलाफ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
न्यायालय ने एक फैसले में कारोबारियों को रिहायशी इलाकों में व्यवसाय की वैधता साबित करने को कहा है।
इसके लिए एक सप्ताह की मोहलत दी गई है।
बुधवार को कोर्ट ने उक्ताशय के निर्देश दिए।
इसमें कहा गया कि संबंधित पक्षकरों के पास यदि आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है,
तो उसके दस्तावेज 7 दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करें।
मॉल, होटल और दूसरे कारोबार अगर आवासीय भूखंडों पर चल रहे हैं, तो उन्हें भी अपनी वैधता साबित करनी होगी।
यदि तय समय में दस्तावेज नहीं दिए गए, तो निगम अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकेगा।
वहीं, अनुमति वैध नहीं मिलने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसी स्थिति में निगम को सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या (2024) फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी।
पहले कागजों की जांच, फिर कार्रवाई
हालांकि, कोर्ट ने सीधे सभी प्रतिष्ठानों को बंद करने का आदेश नहीं दिया है।
पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है।
इसके बाद नगर निगम दस्तावेजों की जांच करेगा।
इसमें भू-उपयोग, व्यावसायिक अनुमति और दूसरी जरूरी स्वीकृतियां देखी जाएंगी।
यानी फिलहाल अगला फैसला दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करेगा।
निगम की कार्रवाई के बाद बढ़ सकता है विरोध
अगर जांच के बाद बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होती है,
तो कारोबारियों की मुश्किल बढ़ सकती है।
इसके साथ ही विरोध की संभावना भी बन सकती है।
व्यापारी संगठन ज्ञापन दे सकते हैं। विरोध प्रदर्शन भी हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
हालांकि, अभी किसी संभावित आंदोलन को लेकर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में निगम के सामने दोहरी चुनौती होगी।
एक तरफ उसे कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।
दूसरी तरफ कारोबारियों की आपत्तियों और रहवासियों की शिकायतों को भी संभालना होगा।
रहवासी बोले- कारोबार बढ़ा तो ट्रैफिक भी बढ़ा
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर रहवासियों की अलग चिंता है।
उनका कहना है कि कारोबार बढ़ने से ट्रैफिक बढ़ता है।
इसके अलावा पार्किंग की समस्या भी बढ़ती है।
शोर और भीड़ के साथ सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठते हैं।
रहवासियों ने कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है।
उन्होंने इसे रिहायशी क्षेत्रों को बचाने की दिशा में अहम कदम बताया।
उनके मुताबिक, अब नगर निगम के सामने कार्रवाई को लेकर न्यायिक निर्देश स्पष्ट हैं।
लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार
रहवासी लवनीश भाटी ने भी आदेश का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि समस्या को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं।
अब उन्हें उम्मीद है कि कार्रवाई जमीन पर भी दिखाई देगी।
इसी तरह संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी नगर निगम से जांच की मांग की है।
समिति का कहना है कि जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है,
उनके खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब 7 दिन बाद क्या होगा?
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर 7 दिन की समय-सीमा पर है।
इस दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों को दस्तावेज देने होंगे।
इसके बाद निगम उनकी जांच करेगा।
फिर स्थिति के अनुसार कार्रवाई या राहत का फैसला हो सकता है।
यदि कार्रवाई होती है, तो कारोबारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
वहीं, रहवासी संगठनों की नजर भी निगम के अगले कदम पर रहेगी।
इस तरह हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब असली परीक्षा नगर निगम की कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति को संभालने की होगी।
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